*लौह नगरी किरंदुल में रजत जयंती मिलन समारोह: 25 साल बाद बिखरी खुशियों की सौगात*
किरंदुल, 26 मई 2025: छत्तीसगढ़ के बैलाडीला क्षेत्र की लौह नगरी किरंदुल में 24 और 25 मई 2025 को एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने न केवल इतिहास रचा, बल्कि गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते और सहपाठियों के बीच की आत्मीयता को एक नया आयाम दिया। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विद्यानगर, किरंदुल के सन 2000 बैच के बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई के 25 साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया। यह कार्यक्रम मंगल भवन, किरंदुल में आयोजित हुआ, जो इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला अनूठा आयोजन था।
*25 साल बाद मिलन की खुशी*
दो दिवसीय इस समारोह में कुल 35 विद्यार्थी और उनके परिवारजन शामिल हुए। देश के विभिन्न हिस्सों से आए इन पूर्व छात्र-छात्राओं के चेहरों पर 25 साल बाद एक-दूसरे से मिलने की खुशी साफ झलक रही थी। वह पल, जब पुराने दोस्तों ने एक-दूसरे को गले लगाया, पुरानी यादें ताजा कीं और हंसी-मजाक के साथ स्कूल के दिनों को फिर से जिया, देखने वालों के लिए अविस्मरणीय था। छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके गुरुजनों की आंखें भी इस भावुक पुनर्मिलन को देखकर नम हो उठीं।
*गुरुजनों का सम्मान, भावनाओं का संगम*
कार्यक्रम की शुरुआत माता सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद सभी पूर्व छात्र-छात्राओं ने अपने उन गुरुजनों का स्वागत किया, जिन्होंने साल 2000 में उन्हें पढ़ाया था। गुरुजनों को पुष्प गुच्छ, श्रीफल और शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, सभी शिक्षकों को स्मृति चिन्ह देकर उनकी शिक्षाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस दौरान कई विद्यार्थियों ने अपने स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं, जब उनके शिक्षकों ने न केवल उन्हें किताबी ज्ञान दिया, बल्कि जीवन के मूल्यों को भी सिखाया।
कार्यक्रम में अनुभव साझा
समय कई विद्यार्थियों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। एक पूर्व छात्रा ने कहा, “25 साल बाद अपने सहपाठियों और गुरुजनों से मिलना ऐसा है, जैसे समय ने हमें फिर से उसी स्कूल के प्रांगण में ला खड़ा किया हो।” गुरुजनों ने भी अपने शिष्यों की इस पहल की सराहना की और उनके जीवन में आए बदलावों को देखकर गर्व का अनुभव किया।
*कार्यक्रम की परिकल्पना और सामूहिक प्रयास*
इस अनूठे आयोजन की परिकल्पना पूर्व छात्र श्री राजेश कुमार बेहेरा ने की थी। उन्होंने बताया कि इस समारोह का उद्देश्य न केवल पुरानी यादों को ताजा करना था, बल्कि गुरु-शिष्य और सहपाठियों के बीच बढ़ती दूरी को कम करना भी था। बैलाडीला जैसे क्षेत्र में, जहां संसाधनों और अवसरों की कमी रहती है, इस तरह का आयोजन भावी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बैलाडीला क्षेत्र में रहने वाले सभी पूर्व विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से जिम्मेदारी उठाई। स्थानीय लोगों ने भी इस आयोजन की खूब सराहना की और इसे एक मिसाल बताया। बड़े-बुजुर्गों ने आयोजकों को शुभकामनाएं दीं और इस तरह के आयोजनों को भविष्य में भी जारी रखने की अपील की।
*दो दिवसीय आयोजन का रोमांच*
पहले दिन, 24 मई को मंगल भवन में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए, पुरानी तस्वीरें देखीं और स्कूल के दिनों की मजेदार कहानियां सुनाईं। गीत-संगीत और नृत्य ने समारोह में रंग भरा। दूसरे दिन, 25 मई को सभी ने मां दंतेश्वरी के दर्शन किए। इसके बाद, बाहर से आए विद्यार्थियों की विदाई का क्षण अत्यंत भावुक रहा। सभी ने एक-दूसरे को फिर से मिलने का संकल्प लिया और नम आंखों के साथ अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।
*स्थानीय समुदाय में उत्साह*
यह आयोजन किरंदुल जैसे छोटे से कस्बे के लिए एक ऐतिहासिक पल था। पहली बार किसी शासकीय स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों ने इतने बड़े स्तर पर मिलन समारोह का आयोजन किया। स्थानीय लोगों ने इसे एक सामाजिक और सांस्कृतिक उपलब्धि के रूप में देखा। कई लोगों ने कहा कि यह आयोजन नई पीढ़ी को अपने शिक्षकों और सहपाठियों के प्रति सम्मान और अपनेपन का महत्व सिखाएगा।
*गुरुजनों का आशीर्वाद*
कार्यक्रम के अंत में गुरुजनों ने अपने सभी पूर्व छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद दिया और इस आयोजन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। एक शिक्षक ने भावुक होते हुए कहा, “आज के इस दौर में, जब लोग अपने व्यस्त जीवन में पुराने रिश्तों को भूल जाते हैं, आप सभी ने हमें याद करके और इतना सुंदर आयोजन करके हमारा दिल जीत लिया।”
*आगे की राह*
रजत जयंती मिलन समारोह केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक संदेश था कि रिश्ते, चाहे वे गुरु-शिष्य के हों या सहपाठियों के, समय के साथ और मजबूत हो सकते हैं। इस आयोजन ने न केवल पुरानी यादों को ताजा किया, बल्कि एक नई मिसाल भी कायम की। किरंदुल के इस अनूठे आयोजन की गूंज निश्चित रूप से अन्य क्षेत्रों तक पहुंचेगी और भावी पीढ़ी को प्रेरित करेगी।
*निष्कर्ष:* यह रजत जयंती मिलन समारोह न केवल एक पुनर्मिलन था, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा थी, जिसमें पुरानी यादों, गुरु-शिष्य के रिश्ते और दोस्ती की गर्माहट ने सभी के दिलों को छू लिया। किरंदुल की धरती पर बिखरी यह खुशियां लंबे समय तक याद रखी जाएंगी।


