*किरंदुल: बेमौसम बारिश ने उजागर की आंगनबाड़ी और उचित मूल्य दुकान की बदहाल स्थिति*
किरंदुल, छत्तीसगढ़ (23 मई 2025): किरंदुल के वार्ड नंबर 1 में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र और सरकारी उचित मूल्य की दुकान इन दिनों बेमौसम बारिश की मार झेल रहे हैं। महज 30 से 45 मिनट की बारिश ने इन दोनों महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। आंगनबाड़ी केंद्र में पानी का रिसाव इस कदर है कि कमरे तालाब में तब्दील हो रहे हैं, और छोटे-छोटे बच्चे पानी के बीच बैठने को मजबूर हैं। वहीं, उचित मूल्य की दुकान में रखा राशन—चावल, नमक, शक्कर और चना—भीगकर खराब हो रहा है, जिससे खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
*आंगनबाड़ी केंद्र: बच्चों के लिए असुरक्षित और अस्वास्थ्यकर माहौल*
आंगनबाड़ी केंद्र, जो छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का आधार है, आज खुद बदहाली का शिकार है। स्थानीय सहायिका ने बताया कि इस बार की बेमौसम बारिश ने स्थिति को और विकट कर दिया है। “पहले कभी इतना पानी नहीं आता था, लेकिन इस बार पूरी तरह कमरा भर जा रहा है। बच्चे पानी में बैठकर पढ़ने या खाने को मजबूर हैं। यह न सिर्फ असुविधाजनक है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है,” सहायिका ने चिंता जताई।
केंद्र में पानी का रिसाव फर्श और दीवारों की खराब स्थिति के कारण है। बारिश के दौरान फर्श से पानी रिश रहा है और दीवारों से रिसकर कमरे में जमा हो जाता है। इस स्थिति में बच्चों को न तो ठीक से बैठने की जगह मिल रही है और न ही स्वच्छ वातावरण। अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दिनों में बच्चे गीले कपड़ों में रहते हैं, जिससे सर्दी, खांसी और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
*उचित मूल्य की दुकान: राशन की बर्बादी, गरीबों के लिए दोहरी मार*
पास में ही स्थित उचित मूल्य की दुकान की हालत भी कुछ अलग नहीं है। यह दुकान गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सस्ते दामों पर राशन उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण साधन है। लेकिन रिसाव के कारण चावल, नमक, शक्कर और चना जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ भीग रहे हैं। दुकान संचालक ने बताया, “पानी रिसने से राशन खराब हो रहा है। चावल में नमी आ रही है, नमक घुल रहा है, और शक्कर गल रही है। इससे न सिर्फ राशन की गुणवत्ता खराब हो रही है, बल्कि हमें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।”
यह स्थिति गरीब परिवारों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है। एक ओर, उन्हें खराब गुणवत्ता वाला राशन मिल रहा है, जिसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। दूसरी ओर, राशन की बर्बादी से दुकान में स्टॉक की कमी हो रही है, जिसके चलते कई परिवारों को समय पर राशन नहीं मिल पा रहा।
*बेमौसम बारिश: समस्या की जड़ या लचर व्यवस्था का बहाना?*
छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश कोई नई बात नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, मई 2025 में बारिश का यह दौर जलवायु परिवर्तन और मानसून के अनियमित पैटर्न का नतीजा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि किरंदुल की इस समस्या का मूल कारण इमारतों की खराब रखरखाव और पुरानी निर्माण गुणवत्ता है। स्थानीय निवासी रामू कोर्राम ने कहा, “हर साल बारिश में यही हाल होता है। आंगनबाड़ी और राशन दुकान की मरम्मत के लिए कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
*प्रशासन की उदासीनता: समाधान कब?*
स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका और जिला प्रशासन को शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका ने कहा, “हमने कई बार अधिकारियों को बताया कि छत और दीवारों की मरम्मत जरूरी है, लेकिन हर बार हमें सिर्फ आश्वासन मिलता है।” उचित मूल्य दुकान के संचालक ने भी यही शिकायत दोहराई, “राशन की बर्बादी का नुकसान हमें उठाना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि इमारत की मरम्मत के लिए तुरंत कदम उठाए।”
*स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव*
आंगनबाड़ी में पानी का रिसाव न केवल बच्चों के लिए असुरक्षित है, बल्कि यह उनके शारीरिक और मानसिक विकास को भी प्रभावित कर रहा है। गीले और अस्वच्छ वातावरण में पढ़ाई और भोजन करना बच्चों के लिए जोखिम भरा है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अस्वच्छ परिस्थितियों में बच्चों को डायरिया, श्वसन संबंधी बीमारियां और त्वचा रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
इसी तरह, उचित मूल्य दुकान में खराब हो रहे राशन का सीधा असर गरीब परिवारों पर पड़ रहा है, जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इस दुकान पर निर्भर हैं। खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है, जिससे पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

