*किरंदुल वार्ड नंबर  बंगाली कैंप: नाली में गोबर, बदबू से हाहाकार, नगरपालिका की तारीख पे तारीख से तंग आए मोहल्लेवासी*

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*किरंदुल वार्ड नंबर  बंगाली कैंप: नाली में गोबर, बदबू से हाहाकार, नगरपालिका की तारीख पे तारीख से तंग आए मोहल्लेवासी*

किरंदुल (छत्तीसगढ़): वार्ड नंबर 4 के बंगाली कैंप में महीनों से गंदगी और बदबू का आलम है। स्थानीय पशुपालकों द्वारा नाली में रोजाना गोबर डालने से मोहल्ले में नालियां जाम हो चुकी हैं, जिससे गंदगी और दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। मोहल्लेवासियों का कहना है कि नगरपालिका अधिकारियों, नेताओं और पार्षदों को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला, सिर्फ “तारीख पे तारीख” मिल रही है। हताश होकर अब निवासियों ने नाली को मिट्टी डालकर बंद करने का फैसला लिया है, जिसके लिए अगले 1-2 दिनों में सामूहिक कार्रवाई की जाएगी।

*महीनों से अनसुनी शिकायतें, टूटा भरोसा*

बंगाली कैंप के निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार नगरपालिका को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं। अधिकारी और स्थानीय पार्षद मौके पर आते हैं, स्थिति देखते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलता है। एक निवासी ने गुस्से में कहा, “नेता, पार्षद, अधिकारी सब आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। नाली में गोबर डालना बंद नहीं हुआ, ना ही बदबू कम हुई। हमारी सुनता कौन है?”

 

*नाली बंद करने की मजबूरी*

 

हद तो तब हो गई जब मोहल्लेवासियों ने खुद नाली को मिट्टी डालकर बंद कर दिया था, ताकि गंदगी और बदबू से राहत मिले। इसकी सूचना नगरपालिका को दी गई, जिसके बाद मुख्य अधिकारी शशिभूषण महापात्र ने मौके पर पहुंचकर पशुपालक को नोटिस जारी किया और नाली में गोबर डालने से मना किया। साथ ही, निवासियों को आश्वासन दिया गया कि दोबारा ऐसा होने पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। पशुपालक बेरोकटोक नाली में गोबर डाल रहे हैं, और नगरपालिका की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

 

*गधे के सिर से सींग की तरह गायब हुए अधिकारी”*

 

निवासियों का गुस्सा अब चरम पर है। एक स्थानीय निवासी ने तंज कसते हुए कहा, “नगरपालिका अधिकारी और पार्षद गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो गए। तारीख पे तारीख देकर हमें ठगने का काम किया जा रहा है।” हताशा में मोहल्लेवासियों ने एक बार फिर नाली को बंद करने का फैसला लिया है। अगले 1-2 दिनों में पूरा मोहल्ला एकजुट होकर नाली में मिट्टी डालकर इसे बंद कर देगा, ताकि गंदगी और बदबू से कुछ राहत मिल सके।

 

*नगरपालिका की चुप्पी, पार्षदों की निष्क्रियता*

 

स्थानीय निवासियों ने नगरपालिका और वार्ड पार्षदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि न तो नाली की नियमित सफाई हो रही है, न ही पशुपालकों पर कोई ठोस कार्रवाई। एक निवासी ने सवाल उठाया, “हम टैक्स देते हैं, फिर भी हमें गंदगी और बदबू में जीने को मजबूर किया जा रहा है। नगरपालिका का काम सिर्फ आश्वासन देना नहीं, समाधान करना भी है।”

*आगे क्या?*

बंगाली कैंप के निवासियों की यह लड़ाई अब सिर्फ गंदगी के खिलाफ नहीं, बल्कि नगरपालिका की लापरवाही और उदासीनता के खिलाफ भी है। अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो मोहल्लेवासियों का गुस्सा और उग्र हो सकता है। नाली को बंद करने का उनका फैसला इस बात का सबूत है कि जनता अब अपनी समस्याओं का समाधान खुद तलाशने को मजबूर है।नगरपालिका प्रशासन और स्थानीय नेताओं से सवाल है- आखिर कब तक बंगाली कैंप के लोग तारीख पे तारीख सुनते रहेंगे? क्या स्वच्छता और स्वास्थ्य के इस गंभीर मुद्दे पर अब भी कार्रवाई नहीं होगी?

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