*किरंदुल नगरपालिका वार्ड नं. 3 में अंधेरा: पार्षद और पूर्व पार्षद की ‘कुंभकर्णी नींद’ पर सवाल*
किरंदुल नगरपालिका के वार्ड नं. 3 की गलियों में पिछले एक हफ्ते से अंधेरा छाया हुआ है। वार्ड की स्ट्रीट लाइट्स बंद पड़ी हैं, जिसके चलते रात के समय गलियां पूरी तरह अंधेरे में डूब गई हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अंधेरे की चपेट में वार्ड के वर्तमान पार्षद और पूर्व पार्षद के घर भी शामिल हैं, जो पति-पत्नी हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दोनों जनप्रतिनिधि इस समस्या के प्रति उदासीन हैं और मानो ‘कुंभकर्ण की गहरी नींद’ में सो रहे हैं।
वार्ड वासियों ने अपनी परेशानी को लेकर सीजी संविधान न्यूज, छत्तीसगढ़ के संपादक को फोन पर जानकारी दी। उनका कहना है कि अंधेरे के कारण रात में गलियों में चलना मुश्किल हो गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को खास तौर पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक निवासी ने गुस्से में कहा, “पार्षद और पूर्व पार्षद का घर भी इसी अंधेरे में डूबा है, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा। क्या वे अपने ही वार्ड की समस्याओं से अनजान हैं?”
स्थानीय लोगों ने बताया कि स्ट्रीट लाइट्स की मरम्मत या बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। वार्ड की बदहाल गलियां इस बात का सबूत हैं कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही कहीं नजर नहीं आ रही। एक अन्य निवासी ने तंज कसते हुए कहा, “पार्षद महोदय की नींद इतनी गहरी है कि शायद उन्हें अंधेरे और उजाले का फर्क ही नहीं पता।”
वार्ड नं. 3 के निवासियों ने पार्षद से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधि अपने वार्ड की मूलभूत समस्याओं को हल नहीं कर सकते, तो वे जनता का भरोसा कैसे जीतेंगे?
अब सवाल यह है कि क्या वार्ड पार्षद और पूर्व पार्षद की ‘कुंभकर्णी नींद’ टूटेगी? और कब तक वार्ड नं. 3 के निवासियों को अपनी गलियों में उजाला नसीब होगा? जनता इंतजार में है, और जवाब की जिम्मेदारी अब पार्षद महोदय पर है।


