*किरंदुल वार्ड नं. 1 बंगाली कैंप: न सड़क, न बिजली, मुश्किलों में जिंदगी*
किरंदुल (छत्तीसगढ़): किरंदुल के वार्ड नंबर 1, बंगाली कैंप के निवासियों के लिए जिंदगी किसी चुनौती से कम नहीं है। एक तरफ ग्राम पंचायत, दूसरी तरफ नगरपालिका का दायरा, लेकिन इन दोनों के बीच फंसी आम जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। यहां न तो गलियों में सड़क है, न ही बिजली का उजाला। करीब 15 से 25 परिवारों के इस इलाके में लोग जंगल-झाड़ियों के बीच बसे हैं, जहां बारिश का मौसम मुसीबतों का पहाड़ लेकर आता है।
*कच्चे रास्तों पर जिंदगी की जंग*
बंगाली कैंप के लोग स्वयं के बनाए कच्चे रास्तों पर निर्भर हैं। गर्मी और सर्दी में ये रास्ता किसी तरह काम चलाता है, लेकिन बारिश में कीचड़ और पानी से भरा यह रास्ता चलना दूभर हो जाता है। जंगल-झाड़ियों से घिरे इस इलाके में बारिश के दौरान जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा जानलेवा बन जाता है। निवासी बताते हैं कि पैदल चलना ही मुश्किल है, और दोपहिया वाहन तो घर तक लाना असंभव है। वाहनों को रात में 200 मीटर दूर खुले में छोड़ना पड़ता है, जिससे चोरी का डर सताता रहता है। हाल के दिनों में किरंदुल में वाहन चोरी की बढ़ती घटनाएं इस डर को और गहरा रही हैं।
*न बिजली, न सड़क: अंधेरे में जिंदगी*
बंगाली कैंप की गलियों में बिजली के खंभे और तार तो दूर, रात का अंधेरा भी लोगों के लिए खतरे का सबब बना हुआ है। निवासियों का कहना है कि न तो नगरपालिका और न ही ग्राम पंचायत उनकी सुध ले रही है। दोनों प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं। नतीजा, जनता मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
*निवासियों का दर्द: “जाएं तो जाएं कहां?”*
स्थानीय निवासियों का कहना है, “हमारी सुनवाई कहीं नहीं हो रही। नगरपालिका कहती है ये पंचायत का क्षेत्र है, और पंचायत कहती है ये नगरपालिका का। हम बीच में पिस रहे हैं।” बारिश में बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर से निकलना जोखिम भरा हो जाता है। सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग हताश हैं।
*प्रशासन से मांग*
बंगाली कैंप के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके इलाके में पक्की सड़क, स्ट्रीट लाइट और बिजली की व्यवस्था की जाए। साथ ही, वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के इंतजाम भी किए जाएं।
*क्या होगा समाधान?*
किरंदुल जैसे औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का यह हाल चिंताजनक है। प्रशासन को चाहिए कि ग्राम पंचायत और नगरपालिका के बीच समन्वय स्थापित कर बंगाली कैंप के निवासियों की समस्याओं का तत्काल समाधान करे। सवाल यह है कि आखिर कब तक ये लोग अंधेरे और मुश्किलों में जिंदगी गुजारने को मजबूर रहेंगे?


