*किरंदुल में भगवान जगन्नाथ मंदिर का प्रथम वार्षिक उत्सव 30 अप्रैल को धूमधाम से मनाया जाएगा*
किरंदुल, दंतेवाड़ा: भगवान जगन्नाथ की कृपा और भक्तों के अटूट विश्वास के साथ किरंदुल में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर का प्रथम वार्षिक उत्सव 30 अप्रैल 2025 को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भव्य रूप से मनाया जाएगा। किरंदुल जगन्नाथ सेवा समिति द्वारा आयोजित इस उत्सव में नगर के संत समाज, भक्तजनों और एनएमडीसी के सहयोग से बस्तर का सबसे भव्य जगन्नाथ मंदिर पिछले वर्ष 2024 में निर्मित हुआ था। इस मंदिर में 12 मई 2024 को अक्षय तृतीया के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की नवीन विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा भव्य समारोह के साथ संपन्न हुई थी।
इस वर्ष अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल को होने के कारण, किरंदुल जगन्नाथ सेवा समिति ने इस दिन को मंदिर के प्रथम वार्षिक उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह उत्सव नगर की सुख, शांति और समृद्धि के लिए आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
*उत्सव का कार्यक्रम*
30 अप्रैल को प्रातः काल से मंदिर में पूजा-अर्चना का दौर शुरू होगा। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति भजनों के बीच भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा की जाएगी। दोपहर 12 बजे से भगवान का महाभंडारा आयोजित होगा, जिसमें हजारों भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे। यह भंडारा भक्तों के बीच एकता और भाईचारे का प्रतीक होगा। उत्सव का समापन 1 मई को प्रातः पूर्णाहुति के साथ होगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ की कृपा के लिए विशेष हवन और पूजा-अर्चना की जाएगी।
*जगन्नाथ सेवा समिति का आह्वान*
किरंदुल जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष श्री आर.सी. नाहक ने दंतेवाड़ा जिले के समस्त भगवान जगन्नाथ भक्तों को इस पावन अवसर पर मंदिर में पधारने का हार्दिक निमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा, “यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ की कृपा से हम सभी इस उत्सव को मिलकर भव्य और अविस्मरणीय बनाएंगे। मैं सभी भक्तों से अनुरोध करता हूँ कि वे 30 अप्रैल को पूजा-अर्चना और महाभंडारे में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।”
*मंदिर निर्माण की गौरवशाली यात्रा*
किरंदुल में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण एनएमडीसी के पूर्ण सहयोग और जगन्नाथ सेवा समिति के अथक प्रयासों से संभव हुआ। वर्ष 2024 में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद, 12 मई को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर भगवान जगन्नाथ की विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। यह मंदिर न केवल किरंदुल, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र बन चुका है। मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा भक्तों को पुरी के जगन्नाथ मंदिर की याद दिलाती है।
*निमंत्रण* किरंदुल जगन्नाथ सेवा समिति और मंदिर समिति की ओर से सभी भक्तों, संत समाज और क्षेत्रवासियों को इस ऐतिहासिक उत्सव में शामिल होने का सादर निमंत्रण है। आइए, 30 अप्रैल को भगवान जगन्नाथ के चरणों में शीश झुकाकर उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करें। यह उत्सव हम सभी के लिए एकता, भक्ति और समृद्धि का संदेश लेकर आएगा।

