*किरंदुल नगरपालिका के वार्ड 3 और 4 में जल संकट: नल में पानी नहीं, फिर भी वसूला जा रहा जल कर*
किरंदुल, 18 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ के किरंदुल नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 और 4 के निवासी गर्मियों की शुरुआत के साथ ही गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरपालिका द्वारा नलों में पानी की आपूर्ति नाममात्र की है, जो दिन में केवल एक बार कुछ मिनटों के लिए होती है। एक बाल्टी पानी भरने से पहले ही आपूर्ति बंद हो जाती है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए वार्डवासियों को 200 मीटर दूर स्थित हैंडपंप, बंगाली कैंप में नाले, बोरिंग, या कुएं का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि पानी की इस किल्लत के बावजूद नगरपालिका द्वारा नल जल कर नियमित रूप से वसूला जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।
*नागरिकों की शिकायत: शिकायतें बेकार, समाधान नदारद*
वार्ड 3 और 4 के निवासियों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगरपालिका में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज की हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने गुस्से में कहा, “हमारे घरों में नल तो लगे हैं, लेकिन पानी नहीं आता। फिर भी हर महीने बिल आता है। नगरपालिका को शिकायत करते-करते थक गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।” वहीं, एक अन्य निवासी सुनीता देवी ने बताया, “गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। हैंडपंप से पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, और वहां भी भीड़ के कारण समय बर्बाद होता है।”
*जल संकट का असर: दैनिक जीवन पर पड़ रही भारी मार*
पानी की कमी के कारण वार्डवासियों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पीने, खाना बनाने, नहाने, और अन्य घरेलू कार्यों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बंगाली कैंप के नाले और कुएं से पानी लाने के लिए लोग मजबूर हैं, लेकिन वहां का पानी कई बार अशुद्ध होता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। एक स्थानीय निवासी, मोहन साहू ने चिंता जताते हुए कहा, “अशुद्ध पानी पीने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। नगरपालिका को यह समझना चाहिए कि पानी जीवन की मूलभूत जरूरत है।”
*नल जल कर वसूली: बिना सेवा के टैक्स का बोझ*
सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि नगरपालिका द्वारा नल जल कर नियमित रूप से वसूला जा रहा है, जबकि नलों में पानी की आपूर्ति लगभग न के बराबर है। वार्डवासियों का आरोप है कि नगरपालिका बिना सेवा प्रदान किए टैक्स वसूल रही है, जो अन्यायपूर्ण है। स्थानीय निवासी अनूप शाह सुभाष नंदी ने कहा, “जब नल में पानी ही नहीं आता, तो हम कर क्यों दें? नगरपालिका को पहले पानी की व्यवस्था करनी चाहिए, फिर बिल वसूलना चाहिए।”
*नगरपालिका की उदासीनता: जनता में बढ़ रहा आक्रोश*
वार्डवासियों का कहना है कि नगरपालिका अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह समस्या सालों से अनसुलझी बनी हुई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो पाइपलाइन की मरम्मत की गई और न ही पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कोई कदम उठाया गया। स्थानीय पार्षदों पर भी जनता का गुस्सा फूट रहा है, क्योंकि वे भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। कुछ निवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
*समाधान की मांग: वार्डवासियों की अपील*
वार्ड 3 और 4 के निवासियों ने नगरपालिका प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांगों में शामिल हैं:
*1=नियमित जल आपूर्ति:* नलों में दिन में कम से कम दो बार पर्याप्त दबाव के साथ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
*2=पाइपलाइन की मरम्मत:* पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को ठीक किया जाए ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके।
*3=नए जल स्रोत:* वार्ड में अतिरिक्त हैंडपंप या बोरिंग की व्यवस्था की जाए।
*4=कर में छूट:* जब तक नियमित जल आपूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक नल जल कर वसूली पर रोक लगाई जाए।
*5=स्वच्छ पानी:* बंगाली कैंप के कुओं और नालों के पानी की गुणवत्ता जांच की जाए और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए।
*नगरपालिका का रवैया: जवाबदेही की कमी*
जब इस मामले में नगरपालिका अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कुछ अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए वार्डवासियों को इन वादों पर भरोसा नहीं है।आगे की राह: जनता को राहत की उम्मीद
किरंदुल के वार्ड 3 और 4 के निवासियों का जल संकट न केवल एक स्थानीय समस्या है, बल्कि यह नगरपालिका प्रशासन की जवाबदेही और शहरी शासन की विफलता को भी उजागर करता है। केंद्र और राज्य सरकार की ‘हर घर नल’ योजना के तहत स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के दावों के बावजूद, किरंदुल जैसे छोटे शहरों में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
स्थानीय निवासियों ने अब मीडिया और सामाजिक मंचों के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला किया है। वे मांग कर रहे हैं कि नगरपालिका प्रशासन और जिला प्रशासन इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और जल संकट का स्थायी समाधान निकाले। साथ ही, नल जल कर की वसूली को तब तक रोकने की अपील की जा रही है, जब तक नियमित और पर्याप्त जल आपूर्ति शुरू नहीं हो जाती।
*निष्कर्ष*
किरंदुल नगरपालिका के वार्ड 3 और 4 के निवासियों की यह व्यथा केवल पानी की कमी की कहानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जनता के प्रति उदासीनता की तस्वीर भी पेश करती है। अब समय है कि नगरपालिका और संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से लें और वार्डवासियों को इस जल संकट से निजात दिलाएं। जनता की उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें वह मूलभूत सुविधा मिलेगी, जिसका वे हकदार हैं।
