*गर्मियां दस्तक दे चुकी हैं*
अब देखना ये होगा कि कैसे बॉलीवुड के चमकते सितारे 20 रुपये की बोतल के लिए छलांग लगाते नजर आएंगे – कभी पहाड़ों पर, कभी रेगिस्तान में, कभी हवा में उड़ते, तो कभी पानी में तैरते!*
लेकिन हम अब समझ चुके हैं…
हम न तो चमक-दमक के पीछे भागेंगे, न ही केमिकल वाली उस नकली ठंडक के झांसे में आएंगे।
हम चलेंगे *गन्ने के रस वाले भैया* के ठेले की ओर,
*जहाँ मशीन घुंगरू की ताल पर थिरकती है और रस बहता है सीधा दिल से…*
थोड़ा नमक, थोड़ा नींबू और ढेर सारी ताजगी – बिना किसी ब्रांड, बिना किसी मिलावट।
*क्योंकि जब देश की धरती ने इतना दिया है, तो उसके किसानों को 4 पैसे देने में कैसी कंजूसी?*
*स्वाद भी, सेहत भी… और आत्मनिर्भर भारत का समर्थन भी।*
तो आइए, इस गर्मी स्वदेशी ठंडक को अपनाएं!
*एक कदम स्वदेशी की ओर – भारत को बनाएं आत्मनिर्भर और विकसित।*
*जनसेवा जनस्वर | Jasraj Jain*
*जहाँ माटी बोले, समाज जागे।*

