*किरंदुल: वार्ड 18 का लाल पानी नाला पुल – टूटने की कगार पर, ग्रामीणों की जिंदगी खतरे में*
किरंदुल के वार्ड नंबर 18 में लाल पानी नाले पर बना एकमात्र पुल, जो पिछले 20-25 वर्षों से हजारों ग्रामीणों और किरंदुल वासियों के लिए जीवन रेखा बना हुआ है, आज अपनी बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में है। यह पुल न केवल 40-50 गांवों को किरंदुल से जोड़ता है, बल्कि रोजाना भारी वाहनों की आवाजाही का भी गवाह है। लेकिन इसकी जर्जर हालत और टूटने की कगार पर होने के कारण ग्रामीणों में भय और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह पुल कभी भी ढह सकता है, जिससे हजारों लोगों का संपर्क किरंदुल से पूरी तरह टूट जाएगा।
*पुल की बदहाल स्थिति: गड्ढे, उखड़ा सरिया और टूटने का खतरा*
लाल पानी नाले पर बना यह पुल लगभग दो दशक पुराना है। इसकी संरचना को देखकर साफ पता चलता है कि यह भारी वाहनों के बोझ को और नहीं झेल सकता। पुल की सतह पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, और कई जगहों पर लोहे का सरिया तक नजर आने लगा है। स्थानीय ग्रामीण रामू कड़ती बताते हैं, “पुल की हालत इतनी खराब है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। गड्ढों में ठोकर लगने का डर रहता है, और भारी गाड़ियां गुजरती हैं तो पूरा पुल में कम्पन आता है।”
पुल को बोरो में मिट्टी डालकर दो हिस्सों में बांटा गया है – एक हिस्सा भारी वाहनों के लिए और दूसरा दोपहिया वाहनों व पैदल यात्रियों के लिए। लेकिन दोपहिया वाहनों के लिए बनाया गया हिस्सा इतना संकरा है कि दो वाहनों का एक साथ गुजरना असंभव है। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। खासकर बस्तर के कुछ आदिवासी ग्रामीण, जो शराब के नशे में इस पुल को पार करते हैं, कई बार गिरकर चोटिल हो चुके हैं या दुर्घटना का शिकार हुए हैं।
भारी वाहनों का बोझ: 800-1000 हाइवा रोजाना*
इस पुल की सबसे बड़ी समस्या है भारी वाहनों की बेतहाशा आवाजाही। किरंदुल में स्थित *आर्सेलर मित्तल निपॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी* द्वारा लाल मिट्टी की ढुलाई के लिए रोजाना 800 से 1000 दस-चक्का हाइवा वाहन इस पुल से गुजरते हैं। ये भारी वाहन न केवल पुल की संरचना को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों के लिए खतरा भी बन रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों के कारण पुल पर कंपन होता है, जिससे पूरा पुल कमजोर हो रहा है।
स्थानीय निवासी सोमा कवासी ने गुस्से में कहा, “कंपनी को सिर्फ अपने मुनाफे से मतलब है। वे हमारे गांव के रास्ते और पुल को बर्बाद कर रहे हैं। अगर यह पुल टूट गया, तो हमारा क्या होगा? हमें किरंदुल जाने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।”
*ग्रामीणों की मुश्किलें: बारिश में बढ़ता खतरा*
लाल पानी नाले पर बना यह पुल 20 से 40 गांवों के ग्रामीणों के लिए किरंदुल से संपर्क का एकमात्र जरिया है। ग्रामीण पैदल, साइकिल या दोपहिया वाहनों से इस पुल का उपयोग करते हैं। लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही के कारण कई ग्रामीणों ने इस पुल का उपयोग बंद कर दिया है और नाले को पैदल पार करने का जोखिम उठा रहे हैं। खासकर बारिश के मौसम में नाले में पानी का बहाव तेज होने के कारण यह रास्ता जानलेवा बन जाता है।
ग्रामीण महिला लक्ष्मी मंडावी बताती हैं, “बारिश में नाला पार करना मौत को दावत देने जैसा है। कई बार बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है। अगर पुल नहीं रहा, तो हमारा किरंदुल से रिश्ता ही खत्म हो जाएगा।”
*क्या होगा अगर पुल टूट गया*
यह पुल किरंदुल और आसपास के गांवों के लिए जीवन रेखा है। यदि यह टूट जाता है, तो हजारों ग्रामीणों का किरंदुल से संपर्क पूरी तरह कट जाएगा। इससे न केवल उनकी रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित होंगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और बाजार तक पहुंच भी असंभव हो जाएगी। इसके अलावा, कंपनी की ढुलाई भी प्रभावित होगी, जिसका आर्थिक नुकसान अलग से होगा।
कंपनी और प्रशासन की उदासीनता*
ग्रामीणों का आरोप है कि *आर्सेलर मित्तल निपॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी* अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। वे चाहते हैं कि कंपनी या तो अपने भारी वाहनों के लिए अलग से पुल बनवाए या ग्रामीणों के लिए एक नया पुल बनवाने में सहयोग करे। साथ ही, किरंदुल के जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पुल की जर्जर हालत के बारे में कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुंजाम कहते हैं, “यह शर्मनाक है कि इतने बड़े खतरे के बावजूद न तो कंपनी और न ही प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है। जिला कलेक्टर को तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।”
समाधान की मांग: नया पुल जरूरी*
ग्रामीणों और किरंदुल वासियों की मांग है कि इस समस्या का तत्काल समाधान किया जाए।
उनकी मांगें इस प्रकार हैं:
*1 कंपनी की जिम्मेदारी:* आर्सेलर मित्तल निपॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अपने भारी वाहनों के लिए अलग से पुल बनवाना चाहिए, ताकि मौजूदा पुल पर बोझ कम हो।
*2 नया पुल निर्माण:*
ग्रामीणों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित पुल का निर्माण तत्काल शुरू किया जाए
*3 प्रशासन की सक्रियता:*
जिला कलेक्टर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
*4 अस्थायी उपाय:* नए पुल के निर्माण तक मौजूदा पुल की मरम्मत और भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जाए।
आने वाला खतरा और उम्मीद*
लाल पानी नाले का यह पुल न केवल एक संरचना है, बल्कि हजारों ग्रामीणों की उम्मीदों और जरूरतों का प्रतीक है। यदि यह ढह गया, तो इसका असर न केवल किरंदुल और आसपास के गांवों पर पड़ेगा, बल्कि बस्तर के इस आदिवासी क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
ग्रामीणों की उम्मीद अब जिला प्रशासन और कंपनी पर टिकी है। वे चाहते हैं कि उनकी आवाज सुनी जाए और समय रहते इस पुल को बचाने या नया पुल बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और कंपनी इस खतरे को गंभीरता से लेंगे, या फिर एक बड़े हादसे का इंतजार करेंगे?



