*दिवाली में पूरा किरंदुल रोशनी से जगमग, लेकिन नगरपालिका का वार्ड क्रमांक 2 अंधेरे में! आखिर पानी टंकी की सुध कौन लेगा?*
*कुबेर नगरी किरंदुल में सजावट और भूमिपूजन पर खर्च करने के लिए धन की कमी नहीं, लेकिन नगर की पेयजल व्यवस्था संभालने वाली पानी टंकी में रोशनी के लिए बिजली बिल का भुगतान तक नहीं? नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।*
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की कुबेर नगरी किरंदुल में दीपावली के अवसर पर पूरा नगर रंग-बिरंगी विद्युत सजावट से जगमगा रहा है। बाजार, चौक-चौराहे और प्रमुख मार्ग रोशनी से सराबोर हैं। लेकिन इसी जगमगाते किरंदुल का एक ऐसा भी हिस्सा है, जहां शाम ढलते ही लगभग एक हफ्ते से घनघोर अंधेरा छा जाता है। यह कोई सुनसान इलाका नहीं, बल्कि नगरपालिका के वार्ड क्रमांक 2 में स्थित पानी टंकी परिसर है, जहां से नगर की पेयजल व्यवस्था संचालित होती है।
हैरानी की बात यह है कि जिस पानी टंकी की जिम्मेदारी नगरवासियों को पानी उपलब्ध कराने की है, उसी परिसर में रात्रि पाली के दो कर्मचारियों को अंधेरे के बीच ड्यूटी करनी पड़ रही है। बताया जाता है कि यह क्षेत्र जंगल से लगा हुआ है, जहां जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। दिन में प्राकृतिक रोशनी के कारण स्थिति सामान्य रहती है, लेकिन शाम होते ही कर्मचारियों के लिए पानी टंकी की निगरानी करना जोखिम भरा हो जाता है।
सवाल यह है कि यदि रात्रि ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी के साथ जहरीले जीव-जंतु के काटने या किसी अन्य प्रकार की दुर्घटना की घटना हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या नगरपालिका प्रशासन किसी अप्रिय घटना का इंतजार कर रहा है?
किरंदुल नगरपालिका की कार्यप्रणाली इन दिनों कई सवालों के घेरे में है। नगर में एक नहीं, बल्कि दो मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को लेकर भी चर्चाएं हैं। एक ओर वर्तमान सीएमओ को किरंदुल में पदस्थ रहते हुए दो वर्ष से अधिक समय हो चुका है, वहीं दूसरी ओर नए सीएमओ की पदस्थापना के बाद उनके द्वारा किरंदुल में ज्वाइनिंग किए जाने के बावजूद पदभार ग्रहण नहीं किए जाने की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आखिर नगरपालिका की प्रशासनिक जिम्मेदारी किसके हाथों में है? क्या अधिकारियों के बीच पदभार को लेकर चल रही स्थिति का खामियाजा नगरवासियों और नगरपालिका कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है?
भूमिपूजन के लिए बजट, लेकिन पानी टंकी की रोशनी के लिए नहीं!
नगरपालिका की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आए दिन कहीं नाली निर्माण तो कहीं मरम्मत कार्यों के भूमिपूजन और विकास कार्यों की घोषणाओं पर गतिविधियां दिखाई देती हैं। लेकिन नगर की मूलभूत पेयजल व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण परिसर में पर्याप्त विद्युत व्यवस्था नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
यदि पानी टंकी परिसर का विद्युत बिल बकाया होने के कारण बिजली व्यवस्था बाधित है, तो यह और भी गंभीर विषय है। आखिर नगरपालिका के पास विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध है, लेकिन पेयजल व्यवस्था की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुविधा के लिए बजट क्यों नहीं?नगरपालिका प्रशासन से सीधे सवाल
वार्ड क्रमांक 2 स्थित पानी टंकी परिसर में पर्याप्त विद्युत व्यवस्था क्यों नहीं है?
क्या बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण परिसर में अंधेरा है?
रात्रि पाली में तैनात दो कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
पानी टंकी परिसर में प्रकाश व्यवस्था बहाल करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
जब किरंदुल नगरपालिका में सीएमओ के पदभार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो प्रशासनिक निर्णय कौन ले रहा है?
अब सवाल सिर्फ एक पानी टंकी में बिजली का नहीं, बल्कि किरंदुल नगरपालिका के कुशल नेतृत्व, प्रशासनिक जवाबदेही और प्राथमिकताओं का है।
दीपावली का पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, लेकिन किरंदुल नगरपालिका के वार्ड क्रमांक 2 की पानी टंकी आज भी रोशनी की बाट जोह रही है।
क्या नगरपालिका प्रशासन किसी अनहोनी के बाद जागेगा, या कर्मचारियों की सुरक्षा और नगर की पेयजल व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तत्काल विद्युत व्यवस्था बहाल करेगा?
जनता जानना चाहती है, आखिर कैसे चलेगी कुबेर नगरी किरंदुल की नगरपालिका?
सी जी संविधान न्यूज़ छत्तीसगढ़
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