*नगरपालिका परिषद द्वारा सामाजिक भवन बनाया गया दो समाज के लिए, लोकार्पण किया गया एक समाज को, दूसरे समाज को सूचना तक नहीं दी गई*

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*नगरपालिका परिषद द्वारा सामाजिक भवन बनाया गया दो समाज के लिए, लोकार्पण किया गया एक समाज को, दूसरे समाज को सूचना तक नहीं दी गई*

नगरपालिका परिषद किरंदुल के द्वारा अध्यक्ष एवं उनकी टीम द्वारा यादव एवं सिन्हा समाज के लिए बराबर-बराबर भू-खंड आबंटित करते हुए एकसमान माप के कक्ष एवं दोनों समाज के लिए मिलाकर एक हॉल के निर्माण हेतु सर्वसम्मति से नगर के गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों के समक्ष दोनों समाज के पदाधिकारियों, नगरपालिका परिषद के CMO, कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति में 14 मार्च 2024 को भूमि पूजन किया गया था। तत्पश्चात् भवन निर्माण के दौरान यादव समाज एवं सिन्हा समाज के लिए प्रस्तावित बराबर कक्ष तो बनाये गए लेकिन जो हॉल दोनों समाज के लिए मिलकर उपयोग करने की सर्वसम्मति से बनाई जा रही थी, उसे यादव समाज की ओर छोटा तथा सिन्हा समाज की ओर से बड़ा करते हुए भेदभाव पूर्ण निर्माण किया जा रहा था, जिसपर यादव समाज द्वारा लिखित माननीय श्री अरुण साव ज़ी, उप मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री ज़ी को पत्र प्रेषित करते हुए लिखित में आपत्ति दर्ज कराई गईं थी तथा स्थानीय नगरीय प्रशासन को भी लिखित में दिया गया था कि जो माप (कक्ष का आकार 3×3 मीटर एवं सभागार 4×6.20 मीटर) प्लानिंग में था, जिसका नक्शा, बजट पास हुआ था, भूमि पूजन के समय जो मार्किंग कि गईं थी, नगर के गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार बंधुओं को जो दिखाया गया था वैसा ही निर्माण हो यह मांग किये जाने पर CMO सर द्वारा निर्माण स्थल पर जाकर स्वयं निरीक्षण करके दोनों समाज के लिए एक बराबर निर्माण हेतु बीच के हॉल को बराबर बराबर बांटकर समाधान निकालने के पश्चात ही लोकार्पण की बात हुई थी। पत्राचार की समस्त प्रतियाँ एवं पावती, भूमिपूजन के समय की तस्वीरे, मॉकिंग, प्रस्ताव की कार्यालयीन दस्तावेज आदि सभी की प्रतियाँ उपलब्ध है तथा यह सभी नगरपालिका परिषद की जानकारी में भी है, इसके बावजूद विवाद का समाधान किये बगैर यादव समाज को सूचना दिए बिना सिन्हा समाज भवन का लोकार्पण कर दिया गया। छत्तीसगढ़ की अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आने वाली दो बड़ी समाज में से एक समाज विशेष के साथ नगरपालिका परिषद द्वारा इस तरह से भेदभाव किया जाना अत्यंत ही निंदनीय है। यादव समाज द्वारा लिखित में यह आपत्ति की गईं थी कि दो समाज के लिए बनाये गए भवन को कोई भी जाकर सिर्फ सामान्य नजर से भी देख ले, उसमें किया गया भेदभाव (एक तरफ बड़ा एवं दूसरी ओर जानबूझकर छोटा निर्माण) एकदम स्पष्ट परिलक्षित होता है। तथा यादव समाज द्वारा एकमात्र मांग यह किया गया था कि किसी को बड़ा न किसी को छोटा अपितु दोनों समाज को बिल्कुल बराबर भागों में भवन बनाकर लोकर्पित किया जाये। किन्तु अचानक ही एक समाज को बिना किसी सूचना के दूसरे सामाजिक भवन का लोकार्पण किया जाना छत्तीसगढ़ के दो अन्य पिछड़ा वर्ग के जातियों के मध्य आपसी वैमनस्यता बढ़ाने वाला कार्य किया गया है, इसकी पुनरावृति किसी भी समाज या नागरिक के साथ न हो इसके लिए यादव समाज द्वारा जनप्रतिनिधियों, नगरीय प्रशासन के समक्ष पुरजोर तरीके से मांग रखी जाएगी।

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