*किरंदुल में नगरपालिका प्रशासन का भ्रष्ट और शर्मनाक दोहरा रवैया उजागर: छोटे मछली-सब्जी विक्रेताओं पर बुलडोजर का कहर, राजनेताओं-पूंजीपतियों को खुली छूट, पुल तोड़कर अतिक्रमण पर सिर्फ दिखावा नोटिस!*

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*किरंदुल में नगरपालिका प्रशासन का भ्रष्ट और शर्मनाक दोहरा रवैया उजागर: छोटे मछली-सब्जी विक्रेताओं पर बुलडोजर का कहर, राजनेताओं-पूंजीपतियों को खुली छूट, पुल तोड़कर अतिक्रमण पर सिर्फ दिखावा नोटिस!*

दंतेवाड़ा जिले के खनन क्षेत्र किरंदुल में नगरपालिका प्रशासन ने एक बार फिर अपने चरित्र को नंगा कर दिया है। कल गुरुवार, 22 जनवरी 2026 की शाम को सीजी संविधान न्यूज़ द्वारा प्रमुखता से प्रसारित खबर के असर में एनएमडीसी फुटबॉल ग्राउंड के समीप चौक पर चार दिन पहले हुए हादसे के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाई। लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ छोटे-मोटे मछली और सब्जी विक्रेताओं के खिलाफ थी। बुलडोजर दौड़ाकर उनके अस्थायी बांस-तिरपाल के अतिक्रमण तोड़ दिए गए और क्षेत्र को अतिक्रमण-मुक्त दिखाने का नाटक रचा गया।

यह कार्रवाई तो ठीक थी, लेकिन असली सवाल यह है कि नगरपालिका का यह रवैया क्यों सिर्फ गरीब और छोटे व्यापारियों के खिलाफ कठोर है? इसी मार्ग पर डीएवी स्कूल के ठीक सामने मुख्य सड़क पर तिरपाल बिछाकर सब्जी की दुकान खुलेआम चल रही है। ग्राहकों की गाड़ियां सड़क पर खड़ी होकर ट्रैफिक जाम पैदा कर रही हैं, रोजाना बड़े हादसे का खतरा मोल लिया जा रहा है। फिर भी नगरपालिका की आंखें फेर ली गई हैं। कोई बुलडोजर नहीं, कोई कार्रवाई नहीं। यह स्पष्ट दोहरा मापदंड है जो आम आदमी को कुचलता है और प्रभावशाली लोगों को बचाता है।

सबसे शर्मनाक और घृणित पहलू वार्ड क्रमांक 6 और वार्ड क्रमांक 3 में हो रहा है। कुछ राजनेता और धनी व्यापारी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमाकर सरकारी पुल को तोड़कर निर्माण कार्य जोरों पर चला रहे थे। गौरव पथ मुख्य मार्ग के ऊपर ही यह अतिक्रमण चल रहा है। नगरपालिका ने पहले नोटिस जारी किया और रोक लगाई, लेकिन जिद्दी तत्वों ने नगरपालिका के आदेशों को ठुकरा दिया। अब वे तिरपाल लगाकर निर्माण को लोगों की नजरों से छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। पक्का निर्माण हो रहा है, लेकिन प्रशासन सिर्फ कागजी नोटिस और नाममात्र की कार्रवाई पर अटका हुआ है।

क्या यह संयोग है कि छोटे विक्रेता जिनके पास सिर्फ बांस और तिरपाल था, उन पर बुलडोजर चल गया, लेकिन राजनेता और पूंजीपति जो पुल तोड़कर पक्का मकान बना रहे हैं, उन्हें सिर्फ नोटिस का सहारा दिया जा रहा है? यह दोहरा रवैया न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है। आम लोगों के मन में सवाल उठ रहा है—क्या टेबल के नीचे नोटों का बड़ा बंडल चल रहा है? क्या छोटे व्यापारियों को कुचलकर और बड़े लोगों को बचाकर नगरपालिका कोई बड़ा सौदा कर रही है? कहावत तो सही साबित हो रही है—“टेबल के नीचे नोटों का बंडल, टेबल के ऊपर दिखावे का नोटिस।”

यह घटना किरंदुल जैसे संवेदनशील खनन क्षेत्र में प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार की चरम मिसाल है। एनएमडीसी जैसे बड़े संगठन के आसपास का क्षेत्र पहले से ही अतिक्रमणों से जूझ रहा है। सड़कें संकरी हो रही हैं, ट्रैफिक बढ़ रहा है, हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता सिर्फ दिखावा है। छोटे व्यापारी जो अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़क किनारे बैठते हैं, उन्हें बिना विकल्प दिए कुचला जा रहा है। वहीं सत्ता और पूंजी के करीब वाले खुलेआम सरकारी संपत्ति लूट रहे हैं, पुल तोड़ रहे हैं, मुख्य मार्ग पर कब्जा कर रहे हैं।

नगरपालिका आयुक्त और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जवाब देना चाहिए। क्या वे बड़े अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बुलडोजर क्यों नहीं चला रहे? क्या राजनेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं? क्या भ्रष्टाचार ने प्रशासन को जकड़ लिया है? सीजी संविधान न्यूज़ जैसी रिपोर्टिंग ने तो कार्रवाई तो शुरू कराई, लेकिन अब जरूरी है कि पूरी सच्चाई सामने आए। स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट रहा है। वे पूछ रहे हैं—क्या किरंदुल में न्याय सिर्फ अमीरों और सत्ताधारियों के लिए है?

यह दोहरा रवैया न सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि गरीबों के विश्वास को भी तोड़ रहा है। अगर नगरपालिका प्रशासन तुरंत बड़े अतिक्रमणों पर सख्त बुलडोजर कार्रवाई नहीं करती, तो यह साबित हो जाएगा कि यहां छोटे लोग कुर्बानी के बकरे हैं और बड़े लोग संरक्षित। जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। उच्च प्रशासन, कलेक्टर और राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना होगा। अन्यथा किरंदुल का यह शर्मनाक दोहरा चरित्र और खुलकर सामने आएगा और भ्रष्टाचार की कहानी और लंबी होती जाएगी।

किरंदुल के नागरिकों को अब एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी होगी। सिर्फ छोटे व्यापारियों पर नहीं, असली दोषियों—राजनीतिक संरक्षण पाने वाले बड़े अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई हो। वरना यह दिखावा जारी रहेगा और आम आदमी का हक लगातार छीना जाता रहेगा।

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