*एनएमडीसी की कृतघ्नता और भेदभावपूर्ण रवैया: राष्ट्रीय महापर्व पर स्थानीय छत्तीसगढ़ पुलिस को कोसों दूर रखा, सीआईएसएफ को लाल कार्पेट*
किरंदुल-बचेली (दंतेवाड़ा), 22 जनवरी 2026 – वर्षों से किरंदुल और बचेली में स्थापित एनएमडीसी की विशाल लौह अयस्क परियोजनाओं में सुरक्षा की दोहरी व्यवस्था चली आ रही है। खदान क्षेत्र में तो सीआईएसएफ की कमान है, लेकिन एनएमडीसी टाउनशिप, सहरी क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह छत्तीसगढ़ पुलिस के कंधों पर है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, बड़े अधिकारियों के आगमन, क्षेत्रीय ग्रामीणों या राजनीतिक संगठनों के धरना-प्रदर्शन – हर विषम परिस्थिति में स्थानीय पुलिस ही एनएमडीसी परियोजना और उसके कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
फिर भी राष्ट्रीय महापर्व – गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस – पर एनएमडीसी का रवैया बेहद भेदभावपूर्ण है। पूरे देश में जहां स्थानीय पुलिस ही राष्ट्रीय पर्वों की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है, वहीं किरंदुल-बचेली में एनएमडीसी स्थानीय पुलिस को जानबूझकर दरकिनार कर देता है। एनएमडीसी परियोजना इन दिनों पूरी तरह सीआईएसएफ पर निर्भर हो जाती है। सीआईएसएफ के जवानों को अच्छे कार्य के लिए सम्मानित किया जाता है, जबकि साल भर की मुश्किलें झेलने वाली छत्तीसगढ़ पुलिस को कार्यक्रम से कोसों दूर रखा जाता है।
यह विडंबना चरम पर है। जिस पुलिस बल ने पूरे वर्ष एनएमडीसी की सुरक्षा में अपनी जान जोखिम में डाली, उसी को राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर उपेक्षित किया जाता है। एनएमडीसी प्रबंधन का यह रवैया कृतघ्नता, भेदभाव और स्थानीय संवेदनाओं की ठेस पहुँचाने वाला है। जब धरना-प्रदर्शन या संकट की घड़ी में पुलिस ही सबसे आगे रहती है, तो राष्ट्रीय पर्व जैसे गौरवशाली मौकों पर उसे हशिए पर धकेलना किस नीति का हिस्सा है?
यह मामला एनएमडीसी प्रबंधन की संवेदनहीनता और केंद्रीय बल के प्रति पक्षपात को उजागर करता है। उम्मीद है कि उच्च स्तर पर इस भेदभावपूर्ण नीति पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और स्थानीय छत्तीसगढ़ पुलिस को भी राष्ट्रीय महापर्वों में उचित सम्मान और भूमिका दी जाएगी। अन्यथा यह स्थानीय पुलिस का मनोबल तोड़ने और एनएमडीसी की छवि खराब करने का काम करेगा।

