*छत्तीसगढ़ में बिजली बिल राहत: भाजपा सरकार ने 200 यूनिट तक आधा बिल की सीमा बढ़ाई, लेकिन AAP ने की 300 यूनिट मुफ्त बिजली की मांग*
बीजापुर, 21 नवंबर 2025 (स्पेशल रिपोर्ट) – छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा हाल ही में 200 यूनिट तक बिजली बिल आधा करने की घोषणा के बाद राज्य में बिजली नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे जनता को ‘गुमराह करने का षड्यंत्र’ बताते हुए पंजाब मॉडल की तर्ज पर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली की मांग की है। AAP के जिला अध्यक्ष सतीश मंडावी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार पर छलावा करने का आरोप लगाया है, जो राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत का संकेत देता है।
*सरकार की नई योजना: राहत या सीमित कदम?*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 18 नवंबर को राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह घोषणा की। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर बिजली बिल का आधा हिस्सा ही चुकाना होगा। पहले यह सुविधा केवल 100 यूनिट तक सीमित थी, जिसे अगस्त 2025 में घटाया गया था। यह योजना 45 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाएगी, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपर्याप्त बताते हुए पूर्व की 400 यूनिट वाली सीमा बहाल करने की मांग की है।
जुलाई 2025 में बिजली दरों में औसतन 1.89% की वृद्धि के बाद यह कदम सरकार की ओर से जन-रोष को शांत करने का प्रयास माना जा रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत प्रदान करेगी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि वृद्धि के बाद भी उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जहां बिजली आपूर्ति अनियमित है।
*AAP का तीखा प्रहार: ‘ऊंट के मुंह में जीरा’*
बीजापुर में AAP के जिला अध्यक्ष सतीश मंडावी ने कहा, “200 यूनिट तक आधा बिल जनता को राहत के नाम पर धोखा है। भाजपा सरकार ने पहले 400 यूनिट से घटाकर 100 यूनिट कर दिया, अब घबराहट में 200 कर रही है। यह जन-विरोधी नीति है, जो लोगों को गुमराह करने का प्रयास है।” उन्होंने पंजाब में AAP सरकार की 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भी कम से कम 300 यूनिट पूरी तरह मुफ्त होनी चाहिए, ताकि आम जनता सुखी हो सके।
मंडावी ने जुलाई 2025 की दर वृद्धि के खिलाफ AAP के प्रदेशव्यापी आंदोलन का श्रेय देते हुए कहा कि 3 जुलाई और 4 नवंबर को हर जिला मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन हुए थे। “सरकार घबरा गई है, लेकिन हमारा संघर्ष जारी रहेगा। पंजाब मॉडल यहां लागू हो, यह हमारी मांग है,” उन्होंने जोर देकर कहा। AAP का मानना है कि यह योजना 80% से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचा सकती है, जैसा पंजाब में हुआ जहां सालाना 5,500 करोड़ रुपये का सब्सिडी बोझ उठाया गया।
*पंजाब मॉडल: सफलता की मिसाल?*
पंजाब में AAP सरकार ने जुलाई 2022 से हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना लागू की, जो पार्टी का प्रमुख चुनावी वादा था। मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुसार, इससे 85% उपभोक्ता लाभान्वित हुए और राज्य की जनता बिजली के मोर्चे पर संतुष्ट दिखी। छत्तीसगढ़ AAP इसे राज्य के लिए आदर्श मान रही है, जहां बिजली दरें पहले ही महंगी हो चुकी हैं। हालांकि, विपक्ष अक्सर इसे वित्तीय बोझ बताता रहा है।
*आगे की राह: आंदोलन या समझौता?*
AAP ने स्पष्ट किया है कि बिजली दरों के खिलाफ आंदोलन को तेज किया जाएगा और सरकार से 300 यूनिट मुफ्त बिजली का ज्ञापन सौंपा जाएगा। दूसरी ओर, भाजपा सरकार का कहना है कि यह योजना केंद्र और राज्य योजनाओं का हिस्सा है, जो सतत विकास को बढ़ावा देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहस छत्तीसगढ़ की आगामी राजनीति को प्रभावित कर सकती है, खासकर 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले।
क्या छत्तीसगढ़ पंजाब की तरह मुफ्त बिजली का सपना देखेगा? यह सवाल अब जनता और राजनीतिक दलों के बीच गूंज रहा है। AAP के इस बयान से बीजापुर समेत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

