*CISF का शानदार प्रदर्शन: ‘विस्फोट कवच IX’ में तीसरा स्थान हासिल कर एकमात्र CAPF ने रचा इतिहास*
मानेसर/नई दिल्ली, 20 नवंबर 2025: राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर साबित करते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के मानेसर स्थित मुख्यालय में आयोजित नौवें संयुक्त काउंटर आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) अभ्यास ‘विस्फोट कवच IX’ में तीसरा स्थान प्राप्त करके अपनी ऑपरेशनल क्षमता का लोहा मनवा लिया है। 16 राज्यों, तीन केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर) तथा चार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) – बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ – की कुल 23 चुनिंदा टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा में सीआईएसएफ शीर्ष तीन में जगह बनाने वाला एकमात्र CAPF बन गया। यह उपलब्धि न केवल बल की बम निरोधक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में उसके बढ़ते कद को भी रेखांकित करती है।
‘विस्फोट कवच’ श्रृंखला, जो NSG द्वारा वर्ष 2017 से आयोजित की जा रही है, देश के विभिन्न पुलिस बलों और CAPF इकाइयों को आईईडी खतरों से निपटने के लिए एक मंच प्रदान करती है। इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में बम डिस्पोजल, खुफिया जानकारी के आधार पर त्वरित प्रतिक्रिया और उन्नत तकनीकी उपकरणों के उपयोग पर जोर देना है। नौवें संस्करण में, जो हाल ही में समाप्त हुआ, प्रतिभागियों को विविध परिदृश्यों का सामना करना पड़ा – विमानन सुरक्षा से लेकर शहरी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक। कर्नाटक पुलिस की बम डिस्पोजल डिवीजन (BDDS) ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि आंध्र प्रदेश की विशेष एंटी-टेरर यूनिट ‘ऑक्टोपस’ ने द्वितीय स्थान पर कब्जा जमाया। तीसरे स्थान पर CISF की संयुक्त टीम ने अपनी जगह बनाई, जो बल की कई इकाइयों से चुने गए 20 सदस्यों की थी।
*सीआईएसएफ टीम का नेतृत्व और प्रदर्शन: एक मिसाल*
सीआईएसएफ टीम का नेतृत्व बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात उप कमांडेंट संदीप मन्हास ने किया। टीम में एक डॉग हैंडलर और प्रशासनिक कर्मचारी सहित सभी सदस्यों ने उच्च क्षमता वाले बम निरोधक कौशल, आधुनिक काउंटर आईईडी उपकरणों के कुशल उपयोग और गहन तकनीकी समझ का प्रदर्शन किया। अभ्यास के दौरान टीम ने एमपीआरटीसी (मिलिट्री पैट्रोल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर) बहरोड़ के प्रशिक्षकों के सहयोग से विकसित कस्टमाइज्ड टूल्स का प्रभावी इस्तेमाल किया, जो घरेलू विस्फोटकों के उभरते रुझानों का विश्लेषण करने में सहायक साबित हुए।
विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा रिमोट सेंसिंग प्रोब (RSP) ड्रिल में सीआईएसएफ का प्रदर्शन, जहां टीम ने सभी 23 प्रतिभागी दलों में सर्वोच्च स्कोर हासिल किया। इसके अलावा, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की सीआईएसएफ यूनिट के K9 डॉग ‘चेतक’ ने विस्फोटक पहचान में असाधारण सतर्कता दिखाई। चेतक ने न केवल K9 मूल्यांकन में उच्च अंक प्राप्त किए, बल्कि RSP ड्रिल के दौरान भी मूल्यांकनकर्ताओं को प्रभावित किया। जूरी सदस्यों ने टीम की पेशेवर गहराई और वास्तविक दुनिया की परिचालन चुनौतियों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना की। एक वरिष्ठ मूल्यांकन अधिकारी ने कहा, “सीआईएसएफ की टीम ने न केवल तकनीकी दक्षता दिखाई, बल्कि टीम वर्क और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता से साबित किया कि वे देश की संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए कितने सक्षम हैं।”
*’विस्फोट कवच’ का महत्व: आईईडी खतरों से जूझते भारत के लिए एक सबक*
विश्लेषण की दृष्टि से देखें तो ‘विस्फोट कवच IX’ का आयोजन भारत की बदलती सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में आईईडी हमलों में वृद्धि देखी गई है – जम्मू-कश्मीर से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में ही 150 से अधिक आईईडी संबंधी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश शहरी केंद्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। ऐसे में, इस अभ्यास ने पुलिस और CAPF को एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का अवसर दिया।
सीआईएसएफ का तीसरा स्थान CAPF के बीच एकमात्र होने से यह स्पष्ट होता है कि औद्योगिक सुरक्षा पर केंद्रित यह बल अब काउंटर-टेररिज्म के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पारंपरिक रूप से बीएसएफ और सीआरपीएफ जैसे बल सीमा और आंतरिक सुरक्षा पर फोकस करते हैं, लेकिन सीआईएसएफ की विशेषज्ञता विमानन, मेट्रो और परमाणु सुविधाओं जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में है। इस उपलब्धि से यह संकेत मिलता है कि सीआईएसएफ न केवल प्रतिरक्षात्मक रणनीतियों पर बल दे रहा है, बल्कि आक्रामक काउंटर-आईईडी क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन भविष्य के अभ्यासों में अन्य CAPF को प्रेरित करेगा, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित बम निरोधक नेटवर्क का निर्माण होगा।
अभ्यास के दौरान विमानन सुरक्षा पर विशेष फोकस रहा, जो सीआईएसएफ की कोर जिम्मेदारी है। टीम ने विविध आईईडी मॉडलों – जैसे वाहन-जनित, पैदल यात्री-जनित और ड्रोन-आधारित – का सामना किया। इसके अलावा, उपकरण नवाचारों पर दल की प्रस्तुति ने जूरी को प्रभावित किया। उदाहरण के लिए, कस्टमाइज्ड टूल्स ने घरेलू विस्फोटकों (जैसे यूरिया नाइट्रेट आधारित) के उभरते पैटर्न का विश्लेषण कैसे किया जाए, इस पर प्रकाश डाला। यह न केवल तकनीकी उन्नति का प्रतीक है, बल्कि आतंकवादी नेटवर्क्स द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों से निपटने की रणनीति को भी मजबूत करता है।
*सीआईएसएफ की व्यापक भूमिका: राष्ट्र की ढाल के रूप में*
सीआईएसएफ की यह सफलता उसके व्यापक मिशन को और मजबूत करती है। वर्तमान में बल 360 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभाल रहा है, जिनमें 68 हवाई अड्डे, 15 बंदरगाह, अंतरिक्ष केंद्र (जैसे श्रीहरिकोटा), परमाणु ऊर्जा संयंत्र, मेट्रो नेटवर्क और दंतेवाड़ा जैसे नक्सल-प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं। दैनिक आधार पर, सीआईएसएफ एक करोड़ से अधिक यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है – चाहे वह हवाई अड्डों पर हो या मेट्रो स्टेशनों पर। इसके लिए बल की बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वायड (BDDS) और K9 टीमें 24×7 तैनात रहती हैं, जो नियमित रूप से आईईडी खतरों का पता लगाती और निष्क्रिय करती हैं।
पिछले वर्षों में सीआईएसएफ ने कई वास्तविक घटनाओं में अपनी क्षमता सिद्ध की है। उदाहरण के लिए, 2024 में दिल्ली मेट्रो में संदिग्ध पैकेज की खोज और निष्क्रियकरण में K9 टीमों की भूमिका सराहनीय रही। इसी तरह, बेंगलुरु एयरपोर्ट पर तैनात BDDS ने कई संभावित खतरों को विफल किया। ‘विस्फोट कवच IX’ में प्राप्त यह सम्मान इन प्रयासों का औपचारिक मान्यता प्रदान करता है। बल के महानिदेशक ने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह हमारी टीमों की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। हम प्रतिज्ञा करते हैं कि देश की सुरक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।”
*भविष्य की चुनौतियां और सुझाव: एक मजबूत सुरक्षा तंत्र की ओर*
विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि जबकि सीआईएसएफ ने शीर्ष तीन में जगह बनाई, लेकिन प्रथम दो स्थान राज्य पुलिस इकाइयों के पास गए। इससे संकेत मिलता है कि CAPF को राज्य स्तर की विशेष यूनिटों से और अधिक सीखने की जरूरत है, विशेष रूप से ड्रोन-आधारित आईईडी और साइबर-एकीकृत हमलों के संदर्भ में। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि भविष्य के अभ्यासों में AI-आधारित सिमुलेशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को शामिल किया जाए, ताकि वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत की क्षमता बढ़े।
कुल मिलाकर, ‘विस्फोट कवच IX’ सीआईएसएफ के लिए एक विजय है, लेकिन यह राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में एक सकारात्मक संकेत है। जब तक ऐसे अभ्यास जारी रहेंगे, भारत आईईडी जैसे उभरते खतरों से निपटने में अधिक सक्षम होता जाएगा। यह घटना न केवल बल की क्षमता को प्रमाणित करती है, बल्कि पूरे देश को एक संदेश देती है – सुरक्षा में कोई समझौता नहीं।

