*किरंदुल के बस चालकों की वर्षों पुरानी पीड़ा अब खत्म होने की कगार पर*
*नगरपालिका अध्यक्ष का सी ज़ी संविधान न्यूज़ को आश्वासन: मात्र 2-3 दिन में 25 बसों की पार्किंग तैयार होंगी*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 20 नवंबर 2025
बस्तर का यह छोटा-सा औद्योगिक कस्बा किरंदुल लौह अयस्क के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन पिछले कई सालों से यहां आने वाली निजी बसों के चालक-परिचालक और यात्री एक ऐसी मूलभूत समस्या से जूझ रहे थे जिसका कोई स्थायी हल नहीं दिख रहा था। रात भर 400-450 किलोमीटर की थकाऊ यात्रा करके जब बसें किरंदुल पहुंचती है, तो सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है— “जाए तो जाए कहां?”
NMDC के विशाल परिसर के कारण शहर का बड़ा हिस्सा “प्रतिबंधित क्षेत्र” में आता है। NMDC के सुरक्षा गार्ड बसों को परिसर के अंदर घुसने की इजाजत नहीं देते। दूसरी तरफ मुख्य सड़क पर बस खड़ी करने पर पुलिस तुरंत चालान काट देती है। बीच में फंसे बस चालक रात-दिनभर इधर-उधर भटकते रहते थे। कई बार तो बसों को दूर जंगल की ओर ले जाकर खड़ा करना पड़ता था, जिससे चोरी और सुरक्षा का खतरा बना रहता था।
यात्रियों की स्थिति और भी दयनीय थी। सुबह जल्दी कहीं जाना हो तो बस मिलती ही नहीं थी, क्योंकि चालक पार्किंग की तलाश में रात भर जागते रहते थे। बस्तर के आदिवासी अंचल में जहां सरकारी बसें नहीं है, वहां निजी बसें ही आम जनता की लाइफलाइन हैं। किरंदुल, बचेली, नागरनार, गीदम, दंतेवाड़ा, भांसी, कुआकोंडा और जगदलपुर के लिए चलने वाली सैकड़ों बसें इसी एक समस्या की वजह से परेशान है।
*सी जी संविधान न्यूज़ की पहल, सीधी मुलाकात नगरपालिका अध्यक्ष से*
इस ज्वलंत मुद्दे को लगातार उठाते रहने वाले सी जी संविधान न्यूज़ के संपादक किशोर कुमार रामटेके ने अब इसे सीधे प्रशासन के सामने रख दिया। गुरुवार को उन्होंने किरंदुल नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती रूबी सींग एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री शशिभूषण महापात्र से विशेष मुलाकात की और बस चालकों की पूरी व्यथा विस्तार से रखी।
नगरपालिका अध्यक्ष ने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ पूरी बात सुनी और तुरंत आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि बसों के लिए पहले से चिन्हित जगह पर पिछले कुछ दिनों में मिट्टी डलवाई गई थी। अब उस जगह को पूरी तरह समतल करने का काम 2 दिनों के अंदर युद्धस्तर पर शुरू होने जा रहा है।
*अध्यक्ष के शब्दों में आश्वासन*
*श्रीमती रूबी सींग ने सी जी संविधान न्यूज़ से कहा,*
“हम बस चालकों की परेशानी को बहुत अच्छे से समझते हैं। मैं खुद कई बार चालकों से मिली हूं। जिस जगह को बस स्टैंड के लिए चुना गया है, वहां पिछले महीने मिट्टी डलवाई गई थी। अब मात्र दो-तीन दिन में जेसीबी और ग्रेडर मशीनें लगाकर इसे पूरी तरह समतल कर दिया जाएगा। इसके बाद एक साथ 20 से 25 बसें आराम से खड़ी हो सकेंगी। हमने यह भी तय किया है कि वहां रोशनी, पानी और शौचालय की भी व्यवस्था जल्द कर दी जाएगी।”
मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने बताया कि यह जगह किरंदुल के मुख्य बाजार से महज 500 मीटर की दूरी पर है और NMDC के प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर है, इसलिए कोई कानूनी अड़चन भी नहीं आएगी।
*बस चालकों ने लिऐ राहत की सांस होंगी*
इस घोषणा के बाद किरंदुल बस स्टैंड पर मौजूद दर्जनों चालकों-परिचालकों ने राहत की सांस होंगी। रायपुर-किरंदुल रूट की बस चलाने वाले चालक रामकुमार साहू ने कहा,
“साहब, पिछले कई साल से हम इसी परेशानी से गुजर रहे थे। कई बार तो रात दो-दो बजे तक बस घुमाते रहते थे। अब लगता है भगवान ने हमारी सुन ली। सी जी संविधान न्यूज़ और नगरपालिका अध्यक्ष को दिल से धन्यवाद।”
इसी तरह राजनांदगांव से आने वाले चालक तुलसीराम यादव ने कहा, “अब रात में नींद पूरी हो जाएगी। सुबह यात्री भी समय पर बस पाएंगे।”
बस्तर के लिए बड़ी राहत
बस्तर अंचल में जहां एक तरफ नक्सल प्रभाव और दूसरी तरफ संसाधनों की कमी है, वहां यह छोटी-सी सुविधा हजारों लोगों के लिए बहुत बड़ा बदलाव लाएगी। किरंदुल, बचेली और नागरनार में काम करने वाले मजदूर, स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे, मरीज और आम यात्री — सभी को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
सी जी संविधान न्यूज़ ने नगरपालिका अध्यक्ष से वादा लिया है कि जैसे ही पार्किंग पूरी तरह तैयार होगी, हम दोबारा वहां जाकर ग्राउंड रिपोर्ट करेंगे और बस चालकों की प्रतिक्रिया भी दिखाएंगे।
फिलहाल किरंदुल के बस चालकों के चेहरे पर मुस्कान है और उनके जुबान पर एक ही बात —
*“अब जाए तो जाए कहां? अब तो अपना बस स्टैंड ही है!”*
रिपोर्ट: किशोर कुमार रामटेके
सम्पादक, सी जी संविधान न्यूज़, किरंदुल (दंतेवाड़ा)

