*किरंदुल एनएमडीसी टाउनशिप में फिल्टर हाउस का ‘फ्रॉड’? 5 ठेका श्रमिकों की ड्यूटी पर सवाल, क्या हो रहा पैसे का दुरुपयोग?*
किरंदुल (छत्तीसगढ़), 18 नवंबर 2025: राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की किरंदुल परियोजना के टाउनशिप क्षेत्र में शुद्ध जल आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले फिल्टर हाउस में ठेका श्रमिकों की ड्यूटी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यहां तैनात 5 ठेका श्रमिकों की मौजूदगी तो रजिस्टर पर दर्ज है, लेकिन हकीकत में वे सिर्फ ड्यूटी की शुरुआत और अंत में फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) पर चेक-इन-चेक-आउट करते हैं। बीच का समय वे घूमने या घर लौटने में बिताते हैं, जिससे एनएमडीसी के संसाधनों का संभावित दुरुपयोग उजागर हो रहा है। क्या यह वाकई 5 कर्मचारियों की जरूरत वाला प्लांट है, या सिर्फ कागजी खानापूर्ति का खेल?
एनएमडीसी, भारत की प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक कंपनी, किरंदुल में अपनी खनन गतिविधियों के साथ-साथ टाउनशिपवासियों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए फिल्टर जल हाउस संचालित करती है। यह प्लांट किरंदुल नाला, बछेली नाला और मलांगीर नाला से ली गई कच्ची जल को शुद्ध कर टाउनशिप और आसपास के क्षेत्रों में वितरित करता है। कंपनी के पर्यावरणीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, दैनिक जल आवश्यकता हजारों लीटर में है, जो टाउनशिप की 10,000 से अधिक आबादी के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, फिल्टर प्लांट की रखरखाव और निगरानी के लिए कितने कर्मचारियों की वास्तविक जरूरत है, इस पर पारदर्शिता की कमी ने अब विवाद को जन्म दे दिया है।
सूत्रों का दावा है कि शिफ्ट-वार ड्यूटी में तैनात ये ठेका श्रमिक प्लांट की मॉनिटरिंग के बजाय FRS सिस्टम का ‘दुरुपयोग’ कर रहे हैं। “ड्यूटी शुरू होते ही FRS पर फोटो खिंचवाकर वे बाहर निकल जाते हैं, और अंत में वापस आकर चेक-आउट करते हैं। बीच में प्लांट की कोई देखभाल नहीं होती,” एक अनाम सूत्र ने बताया। इससे न सिर्फ जल शुद्धिकरण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, बल्कि एनएमडीसी के ठेका व्यय पर भी सवाल उठते हैं। कंपनी की हालिया टेंडर दस्तावेजों से पता चलता है कि बछेली टाउनशिप (किरंदुल के निकट) में जल पाइपलाइन और आरओ प्लांट रखरखाव के लिए मैनपावर आवश्यकताओं का उल्लेख है, लेकिन फिल्टर हाउस के लिए स्पष्ट संख्या नहीं दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि एक छोटे-मध्यम आकार के फिल्टर प्लांट के लिए 2-3 कुशल कर्मचारियों की पर्याप्तता होनी चाहिए, बशर्ते ऑटोमेशन और FRS जैसी तकनीकें सही से लागू हों।
यह मुद्दा एनएमडीसी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ठेका प्रबंधन पर व्यापक सवाल खड़े करता है। खनन क्षेत्र में ठेका श्रमिकों की अनियमितताएं कोई नई बात नहीं हैं—पिछले वर्षों में बस्तर क्षेत्र में इसी तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। लेकिन FRS जैसी आधुनिक तकनीक के बावजूद अगर अनुपस्थिति जारी है, तो यह सिस्टम की नाकामी को दर्शाता है। एनएमडीसी ने जल आपूर्ति को अपनी प्राथमिकता बताया है; कंपनी की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट्स में टाउनशिप के लिए मौजूदा जल उपचार संयंत्र का जिक्र है, जो दैनिक 17,000 से अधिक लीटर ताजा जल की जरूरत पूरी करता है। फिर भी, कर्मचारी अनुपस्थिति से जल गुणवत्ता और आपूर्ति में जोखिम बढ़ सकता है, जो स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
विश्लेषण: यह घटना एनएमडीसी के लिए एक अवसर हो सकती है कि वह अपनी प्रक्रियाओं को मजबूत करे। FRS सिस्टम को रैंडम चेक या जीपीएस इंटीग्रेशन से जोड़कर अनुपस्थिति रोकी जा सकती है। साथ ही, ठेका एजेंसियों पर सख्त निगरानी और कर्मचारी प्रशिक्षण से दक्षता बढ़ाई जा सकती है। यदि 5 कर्मचारियों की तैनाती अतिरिक्त साबित होती है, तो यह कंपनी के पैसे की बचत का रास्ता खोलेगा—जो अंततः उपभोक्ताओं और शेयरधारकों के हित में होगा। लेकिन अगर अनदेखी की गई, तो यह भ्रष्टाचार के आरोपों को न्योता दे सकता है।
एनएमडीसी प्रबंधन से संपर्क करने पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन कंपनी ने कहा है कि वह सभी शिकायतों की जांच करती है। स्थानीय श्रम संगठनों और निवासियों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। क्या यह मामला सिर्फ एक प्लांट तक सीमित है, या एनएमडीसी की अन्य परियोजनाओं में भी यही पैटर्न है? जवाब आने तक, किरंदुल के निवासी सतर्क रहेंगे—क्योंकि स्वच्छ जल का अधिकार किसी भी ‘फ्रॉड’ से ऊपर है।
