*किरंदुल की 5 साल की कृतिका ने भरतनाट्यम में जीता पहला स्थान, दंतेवाड़ा के लिए गर्व का क्षण*
दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल की 5 साल की कृतिका ने अपनी प्रतिभा से न केवल अपने परिवार और शहर का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे बस्तर अंचल को गर्व का अवसर प्रदान किया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में 15 अगस्त के ठीक पहले गुरुवार को आयोजित झूम तराना महोत्सव के अंतिम दिन कृतिका ने जूनियर कैटेगरी में भरतनाट्यम की पुष्पांजलि प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि ने किरंदुल के लिए एक ऐतिहासिक पल रच दिया।
*1.5 साल की उम्र से शुरू किया नृत्य का सफर*
कृतिका की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। मात्र 1.5 साल की उम्र से उन्होंने भरतनाट्यम सीखना शुरू किया था, जब अधिकांश बच्चे बोलना भी ठीक से नहीं सीख पाते। इस छोटी सी उम्र में कृतिका ने शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों को समझ लिया और ताल-लय पर अपनी पकड़ बना ली। उनकी मेहनत और लगन का नतीजा है कि तीन साल के भीतर उन्होंने कई बड़े मंचों पर अपनी प्रस्तुति दी और अपने से बड़े प्रतिभागियों को भी कड़ी चुनौती दी।
*झूम तराना महोत्सव में मचाई धूम*
झूम तराना महोत्सव में कृतिका की भरतनाट्यम प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी पुष्पांजलि प्रस्तुति में न केवल तकनीकी कौशल दिखा, बल्कि भावनाओं और शास्त्रीय नृत्य की गहराई भी झलकी। इस आयोजन में 100 से ज्यादा प्रतिभागियों ने क्लासिकल और सेमी-क्लासिकल नृत्य में हिस्सा लिया, जिसमें कृतिका ने अपनी श्रेणी में अव्वल स्थान प्राप्त किया। उनकी यह जीत दर्शाती है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।
*किरंदुल के लिए गर्व का पल*
कृतिका की इस उपलब्धि ने किरंदुल और दंतेवाड़ा जिले को गर्व करने का मौका दिया है। किरंदुल, जो अपनी खनिज संपदा और बैलाडीला की पहाड़ियों के लिए जाना जाता है, अब कृतिका जैसे उभरते सितारों के कारण सांस्कृतिक क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। यह छोटी सी बच्ची न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी इस जीत ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण से किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां छुई जा सकती हैं।
*प्रेरणा का स्रोत बनी कृतिका*
कृतिका की कहानी उन सभी बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो छोटे शहरों से आते हैं और बड़े सपने देखते हैं। उनकी इस उपलब्धि से यह संदेश जाता है कि उम्र, स्थान या संसाधनों की कमी प्रतिभा के आड़े नहीं आ सकती। कृतिका ने न केवल अपनी कला से सबका दिल जीता, बल्कि यह भी दिखाया कि शास्त्रीय नृत्य जैसा जटिल क्षेत्र भी छोटी उम्र में महारत हासिल की जा सकती है।
*दंतेवाड़ा की शान बनी कृतिका*
दंतेवाड़ा, जो अक्सर अपनी प्राकृतिक संपदा और चुनौतियों के लिए चर्चा में रहता है, अब कृतिका की इस उपलब्धि के साथ सांस्कृतिक क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। कृतिका की जीत न केवल उनके परिवार और गुरुओं के लिए, बल्कि पूरे दंतेवाड़ा जिले के लिए गर्व का विषय है। उनकी इस सफलता से निश्चित रूप से अन्य बच्चों को भी अपनी प्रतिभा को निखारने और बड़े मंचों पर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।
कृतिका की इस उपलब्धि पर किरंदुल और दंतेवाड़ा के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं। उनकी यह जीत एक शुरुआत है, जो भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों का संकेत दे रही है।

