*छत्तीसगढ़ की कहावत चरितार्थ: “फोकट में मिले त मरत ले खाये” – वार्ड क्रमांक 6 में टोटी चोरी से टूट रहा पानी, अन्य वार्डों में विश्राम*
🔹 “फोकट में मिले त मरेत ले खाय”: पानी की बर्बादी और प्यासे वार्ड – किरंदुल. में टोटी टूटी, टंकी सूखी!
किरंदुल , वार्ड क्र. 6 – छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कहावत “फोकट में मिले त मरेत ले खाय” (मुफ्त में मिले तो मरते वक्त भी खा लेंगे) आज के हालात में बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है। नगरपालिका द्वारा हाल ही में वार्ड क्रमांक 6 में बड़ी धूमधाम से पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। बस्तर सांसद और नगरपालिका अध्यक्ष की मौजूदगी में नलों की पूजा-अर्चना के साथ टोटियां खोली गईं थीं। लेकिन कुछ ही महीनों में यह जनसुविधा लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और चोरी की भेंट चढ़ गई।
सूत्रों के अनुसार, वार्ड क्र. 6 में एनएमडीसी की मुख्य पाइप लाइन से जोड़कर नगरपालिका द्वारा पीने के पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। बीते दो दिनों से यहाँ लगे सार्वजनिक नल की टोटियां आसपास के लोगो द्वारा तोड़ दी गई हैं, जिससे लगातार पानी व्यर्थ बह रहा है।
विडंबना यह है कि जहाँ वार्ड क्र. 1, 3, 4 और 5 में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं, वहीं वार्ड क्र. 6 में “फोकट का पानी” नालियों में बह रहा है। न पानी की कद्र, न व्यवस्था की चिंता — बस लापरवाही और संसाधनों की बर्बादी।
स्थानीय निवासियों की मानें तो टोटी तोड़ने का काम भी आसपास के ही कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा किया गया है, जिससे न केवल नगरपालिका की संपत्ति का नुकसान हुआ है, बल्कि जल संरक्षण जैसी गंभीर समस्या पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
🔍 विश्लेषण
समस्या की जड़: मुफ्त की चीजों की कद्र न होना।
प्रभाव: अन्य वार्डों में जल संकट और असंतुलन।
नुकसान: हजारों लीटर पानी दो दिनों से व्यर्थ बह रहा है।
दोषी कौन: नगरपालिका की निगरानी में कमी और स्थानीय जिम्मेदारी का अभाव।
👉 सवाल यह है:
क्या नगरपालिका इस बर्बादी पर ध्यान देगी?
क्या दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी?
और सबसे अहम — क्या हम मुफ्त की चीजों को बर्बाद करने की आदत से बाहर आ पाएंगे?
यह घटना न केवल प्रशासनिक असफलता की ओर इशारा करती है, बल्कि समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की कमी को भी उजागर करती है। पानी जैसी अमूल्य संपदा को इस तरह बहते देखना — एक अपराध के बराबर है
