*किरंदुल में जमीन विवाद: बुजुर्ग भूलन प्रसाद की जमीन पर इकबाल सिंह का कथित अवैध कब्जा*
किरंदुल, वार्ड नंबर 8 में तबेला से सटी जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। यह जमीन भूलन प्रसाद (पिता स्वर्गीय फूलन प्रसाद) की बताई जा रही है, जिस पर इकबाल सिंह ने कथित तौर पर जबरन कब्जा कर तबेला और घर बना लिया है। जानकारी के अनुसार, एनएमडीसी द्वारा निर्मित नाली के ऊपर आधा तबेला इकबाल सिंह का है, जबकि आधा हिस्सा भूलन प्रसाद की जमीन पर बना है। इस मामले में भूलन प्रसाद ने 1 जुलाई 2025 को नगरपालिका में आवेदन देकर अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग की है।
*बुजुर्ग और बीमार भूलन प्रसाद की गुहार*
भूलन प्रसाद, जो उम्रदराज, बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ हैं, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इकबाल सिंह और उनके रिश्तेदारों ने धमकी देकर उनकी जमीन पर कब्जा किया है। उन्होंने कहा, “यह जमीन मेरे पास 50 साल से ज्यादा समय से है, लेकिन इकबाल सिंह ने अपनी ताकत और रिश्तेदारों के दम पर इसे हड़प लिया। मैं बीमार और लाचार हूं, मेरे पास इतनी ताकत नहीं कि मैं इकबाल जैसे कब्जाधारी से लड़ सकूं।”
भूलन प्रसाद ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले भी नगरपालिका, तहसीलदार और एसडीएम को आवेदन देकर कब्जा हटाने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आशंका जताई कि इकबाल सिंह के रिश्तेदारों में कोई नेता होने के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही। “मैं बार-बार नगरपालिका नहीं जा सकता, मेरी हालत ठीक नहीं है। फिर भी मैंने 1 जुलाई 2025 को नगरपालिका के मुख्य अधिकारी को आवेदन देकर अपनी जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई है,” उन्होंने कहा।
*नालियों पर भी कब्जे का आरोप*
इस मामले में यह भी सामने आया है कि इकबाल सिंह और उनके परिवार पर नालियों पर अवैध कब्जे का आरोप है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सिंह परिवार की यह आदत रही है कि वे सार्वजनिक संपत्तियों और नालियों पर भी कब्जा करते हैं, जिससे क्षेत्र में विवाद की स्थिति बनी रहती है। भूलन प्रसाद जैसे गरीब और असहाय व्यक्ति के लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक है।
*विश्लेषण: गरीबों की जमीन पर कब्जे की बढ़ती समस्या*
किरंदुल में भूलन प्रसाद का मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि कैसे प्रभावशाली लोग कमजोर और असहाय लोगों की जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। यह कोई नया मामला नहीं है। देश के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं, जहां ताकतवर लोग धमकी और रसूख के बल पर गरीबों की संपत्ति हड़प लेते हैं। इस मामले में भूलन प्रसाद की बीमारी और आर्थिक तंगी उनकी लड़ाई को और मुश्किल बना रही है।
नगरपालिका और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कार्रवाई में देरी भी सवाल उठाती है। क्या प्रभावशाली लोगों के सामने गरीबों की आवाज दब रही है? भूलन प्रसाद का कहना है कि उनके जैसे लोगों को इंसाफ के लिए दर-दर भटकना पड़ता है, जबकि कब्जाधारी बिना किसी डर के अपनी मनमानी करते हैं।
*निष्कर्ष और मांग*
भूलन प्रसाद ने नगरपालिका, तहसीलदार और एसडीएम से हाथ जोड़कर अपनी जमीन वापस दिलाने की अपील की है। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत अन्याय की कहानी है, बल्कि यह समाज में बढ़ती असमानता और गरीबों के शोषण को भी उजागर करता है। स्थानीय प्रशासन को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भूलन प्रसाद जैसे असहाय लोगों को उनका हक मिल सके। साथ ही, नालियों और सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे की आदत को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

