*दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर में एनएमडीसी भर्ती विवाद: संयुक्त पंचायत की मांगों पर सकारात्मक निर्णय, स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता*
दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों की संयुक्त पंचायत के नेतृत्व में एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के किरंदुल और बचेली प्लांट को चार दिनों तक बंद रखने के बाद, आखिरकार स्थानीय लोगों की मांगों पर एक सकारात्मक कदम उठाया गया है। संयुक्त पंचायत, जिला प्रशासन, और एनएमडीसी के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता देने का लिखित आश्वासन दिया गया है। इस धरने के नेतृत्वकर्ता सोमारु कड़ती की अगुवाई में यह आंदोलन न केवल स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा के लिए एक मिसाल बन गया है, बल्कि यह क्षेत्रीय एकता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हुआ है।
*धरने का कारण और संयुक्त पंचायत की मांगें*
संयुक्त पंचायत ने एनएमडीसी की भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर यह आंदोलन शुरू किया था। एनएमडीसी द्वारा हाल ही में जारी L1 और L2 पदों के लिए नोटिफिकेशन में राष्ट्रीय स्तर पर आवेदन मंगवाए गए थे, जिसके कारण दंतेवाड़ा, सुकमा, और बीजापुर के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसरों से वंचित होने का डर सता रहा था। संयुक्त पंचायत ने मांग की कि इन पदों पर भर्ती में केवल इन तीन जिलों के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा, भर्ती नियमों में बदलाव की मांग भी उठाई गई, जिसमें पहले के नियमों को संशोधित कर अधिक समावेशी और स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने वाला नया नोटिफिकेशन जारी करने की बात शामिल थी।
*सकारात्मक वार्तालाप और लिखित आश्वासन*
चार दिनों के धरने और तीव्र विरोध के बाद, संयुक्त कलेक्टर, संयुक्त पुलिस अधीक्षक, एनएमडीसी परियोजना के अधिकारियों, और संयुक्त पंचायत के जनप्रतिनिधियों के बीच एक सकारात्मक बैठक हुई। इस बैठक में एनएमडीसी ने लिखित रूप से आश्वासन दिया कि:
*1:-स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता:* L1 और L2 पदों की भर्ती में दंतेवाड़ा, सुकमा, और बीजापुर के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
*2:-नोटिफिकेशन में संशोधन:* वित्तीय वर्ष 2025 के अंत तक एक नया नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिसमें पुराने नियमों में बदलाव किया जाएगा। पहले L1 के लिए मिडिल और आईटीआई, और L2 के लिए केवल आईटीआई की शर्त थी, लेकिन नए नियमों में कोई भी अभ्यर्थी दोनों पदों के लिए आवेदन कर सकेगा।
*3:-स्थानीयता की जांच के लिए अंकसूची का मिलान:* संयुक्त पंचायत ने मांग की कि स्थानीयता की पुष्टि के लिए 5वीं, 8वीं, 10वीं, और 12वीं की अंकसूची का मिलान किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैर-स्थानीय लोग स्थानीय पते का दुरुपयोग न कर सकें।
इन सभी शर्तों पर सहमति बनने के बाद, एनएमडीसी ने 2025 के अंत तक भर्ती प्रक्रिया को लागू करने का वादा किया है।
*सोमारु कड़ती का नेतृत्व और संयुक्त पंचायत की अधूरी जीत*
इस धरने का नेतृत्व कर रहे सोमारु कड़ती ने इस लिखित आश्वासन को एक सकारात्मक कदम तो बताया, लेकिन इसे पूर्ण जीत मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “यह केवल लिखित आश्वासन है। हमारी असली जीत तब होगी जब एनएमडीसी इन सभी मांगों को अमल में लाकर स्थानीय आधार पर भर्ती शुरू करेगा।” कड़ती ने यह भी जोर दिया कि अगर एनएमडीसी अपने वादे से मुकरता है, तो संयुक्त पंचायत और भी बड़े आंदोलन के लिए तैयार है। उनकी इस दृढ़ता और नेतृत्व की क्षेत्र में व्यापक प्रशंसा हो रही है। उन्होंने स्थानीय युवाओं के हक के लिए एकजुटता और साहस का परिचय दिया है, जो बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में एक प्रेरणा बन गया है।
*जिला कांग्रेस का समर्थन, बीजेपी की दूरी*
इस धरने को जिला कांग्रेस कमेटी का भरपूर समर्थन मिला, जिसने संयुक्त पंचायत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन को मजबूती दी। वहीं, सत्ताधारी बीजेपी और स्थानीय विधायक की इस पूरे मामले में दूरी बनाये रखी किरंदुल मे 27 जून को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा थी और इस रथ यात्रा मे दंतेवाड़ा विधायक आये और खूब नाचे कूदे परन्तु धरना स्थल महज 500 मीटर की दुरी पर थी वहां जा कर सयुक्त पंचायत प्रतियोगिता से मिलना मुनासिब नहीं समझा जिसके कारण संयुक्त पंचायत और स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा किया। आज अंतिम निर्णायक मोड़ पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने इस बैठक मे अपनी उपस्थित दी संयुक्त पंचायत ने एन एम डी सी को खुली चेतावनी दी कि अगर एनएमडीसी अपने वादे पूरे नहीं करता, तो भविष्य में होने वाला आंदोलन और भी व्यापक और तीव्र होगा।
*निष्कर्ष* संयुक्त पंचायत की यह पहल न केवल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक एकता और सामाजिक जागरूकता का भी प्रतीक है। सोमारु कड़ती का नेतृत्व इस आंदोलन को एक नई दिशा देने में सफल रहा है। हालांकि, संयुक्त पंचायत ने इसे “अधूरी जीत” करार दिया है, लेकिन यह सकारात्मक कदम उम्मीद की किरण जरूर है। अब सभी की निगाहें एनएमडीसी पर टिकी हैं कि वह अपने लिखित वादे को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से लागू करता है।
यह खबर न केवल स्थानीय समुदाय के लिए, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि एकजुटता और नेतृत्व के दम पर सामाजिक बदलाव संभव है।

