*भूतपूर्व सैनिक स्वर्गीय मनोहरलाल के परिवार की दर्दनाक कहानी: जमीन पर अवैध कब्जा और एनएमडीसी की अनदेखी*

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*भूतपूर्व सैनिक स्वर्गीय मनोहरलाल के परिवार की दर्दनाक कहानी: जमीन पर अवैध कब्जा और एनएमडीसी की अनदेखी*

किरंदुल, छत्तीसगढ़: एक भूतपूर्व सैनिक, स्वर्गीय मनोहरलाल, जिन्होंने न केवल देश की सेवा की, बल्कि अपने गांव और समुदाय के लिए भी बलिदान दिया, उनके परिवार की कहानी आज दुख और बदहाली की तस्वीर पेश करती है। उनके परिवार की जमीन पर न केवल कुछ स्थानीय लोगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है, बल्कि भारत की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) किरंदुल परियोजना ने भी उनकी जमीन पर हाई टेंशन लाइन के पांच खंभे लगाकर 50 वर्गमीटर क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया है। यह परिवार, जिसके पास जमीन का वैध पट्टा मौजूद है, आज सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और न्याय की गुहार लगाने को मजबूर है

*एक भूतपूर्व सैनिक का बलिदान*

स्वर्गीय मनोहरलाल की कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन अनगिनत लोगों की है जो अपने हक के लिए लड़ते-लड़ते थक जाते हैं। जानकारी के अनुसार, एनएमडीसी की 11बी परियोजना के तहत किरंदुल टाउनशिप तक हाई टेंशन लाइन बिछाने का काम साइट क्लीयरेंस की वजह से रुका हुआ था। ग्रामीणों ने अपनी जमीन से लाइन गुजरने देने का विरोध किया और प्रत्येक परिवार के लिए नौकरी की मांग रखी, जो कि परियोजना के लिए संभव नहीं था। ऐसे में मनोहरलाल ने अपनी कृषि भूमि पर हाई टेंशन लाइन बिछाने की अनुमति दी, ताकि परियोजना पूरी हो सके।

इस निर्णय के लिए उन्हें न केवल ग्रामीणों की धमकियों का सामना करना पड़ा, बल्कि सामाजिक बहिष्कार का दंश भी झेलना पड़ा। फिर भी, उन्होंने बिना शर्त अपनी जमीन का उपयोग करने की अनुमति दी। परिणामस्वरूप, उनकी जमीन पर पांच हाई टेंशन खंभे लगाए गए, जिससे 50 वर्गमीटर जमीन प्रभावित हुई। इस क्षेत्र में स्टे और अर्थिंग के कारण अब यांत्रिक उपकरणों से खेती करना असंभव हो गया है।

*परिवार की बदहाली और अनदेखी*

मनोहरलाल के निधन के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई है। उनके पास जमीन का वैध पट्टा होने के बावजूद, कुछ स्थानीय लोगों ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। इसके अलावा, एनएमडीसी ने भी बिना किसी मुआवजे या वैकल्पिक व्यवस्था के उनकी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। परिवार आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। सरकारी कार्यालयों और प्रशासन के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें न तो मुआवजा मिला है और न ही कोई ठोस सहायता।

परिवार ने जो दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं, उनसे साफ है कि उनकी जमीन पर कब्जा पूरी तरह अवैध है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार, निजी संपत्ति पर 12 साल से अधिक समय तक कब्जा करने पर मालिकाना हक मिल सकता है, लेकिन सरकारी जमीन या परियोजनाओं के लिए जबरन कब्जा कानूनी रूप से मान्य नहीं है। ऐसे में एनएमडीसी का यह कदम न केवल अनैतिक है, बल्कि कानून के खिलाफ भी प्रतीत होता है। 

*रोजगार की मांग और न्याय की गुहार*

स्वर्गीय मनोहरलाल के परिवार ने एनएमडीसी से एकमात्र मांग की है कि उनके परिवार के किसी एक सदस्य को परियोजना में रोजगार दिया जाए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। यह मांग न केवल उचित है, बल्कि उस बलिदान का न्यूनतम सम्मान भी है, जो मनोहरलाल ने परियोजना के लिए दिया था। उनकी जमीन के बिना परियोजना का पूरा होना मुश्किल था, और आज उनका परिवार उसी परियोजना की अनदेखी का शिकार हो रहा है।

*प्रशासन और एनएमडीसी की चुप्पी*

यह बेहद दुखद है कि एक भूतपूर्व सैनिक का परिवार, जिसने देश और समाज के लिए इतना कुछ किया, आज अपनी ही जमीन के लिए भटक रहा है। एनएमडीसी जैसी नवरत्न कंपनी, जो सामाजिक जिम्मेदारी का दावा करती है, ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। न ही स्थानीय प्रशासन ने इस परिवार को न्याय दिलाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश के ‘एंटी भू-माफिया पोर्टल’ जैसे मंच मौजूद हैं, जहां अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज की जा सकती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस तरह की व्यवस्था की कमी इस मामले को और जटिल बनाती है।

*एक सवाल समाज और सरकार के लिए*

यह मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि आखिर क्यों एक भूतपूर्व सैनिक का परिवार, जिसने देश और समाज के लिए बलिदान दिया, आज बदहाली में जीने को मजबूर है? क्यों एक नवरत्न कंपनी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रही है? और क्यों प्रशासन इस परिवार की पुकार को अनसुना कर रहा है?

*निष्कर्ष और मांग*

स्वर्गीय मनोहरलाल के परिवार की यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए एक सबक है, जो समाज में न्याय और समानता की बात करता है। इस परिवार को न केवल उनकी जमीन पर मालिकाना हक वापस मिलना चाहिए, बल्कि एनएमडीसी को उनकी जमीन के उपयोग के लिए उचित मुआवजा देना चाहिए। साथ ही, परिवार के एक सदस्य को रोजगार प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद करनी चाहिए।

हमारी मांग है कि स्थानीय प्रशासन और एनएमडीसी इस मामले को गंभीरता से लें और तत्काल कार्रवाई करें। इसके लिए निम्न कदम उठाए जा सकते हैं:

*1:-जमीन पर कब्जे की जांच:* स्वतंत्र जांच समिति गठित कर अवैध कब्जे की स्थिति का आकलन किया जाए।

*2:-मुआवजे का प्रावधान:* एनएमडीसी द्वारा प्रभावित 50 वर्गमीटर जमीन के लिए उचित मुआवजा दिया जाए।

*3:-रोजगार की व्यवस्था:*परिवार के एक सदस्य को परियोजना में रोजगार प्रदान किया जाए।

*4:-कानूनी सहायता:* परिवार को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे अपनी जमीन वापस पा सकें।

यह समय है कि समाज और सरकार इस भूतपूर्व सैनिक के परिवार को वह सम्मान और न्याय दे, जिसका वे हकदार हैं। उनकी कहानी को नजरअंदाज करना न केवल उनके बलिदान का अपमान है, बल्कि हमारे सिस्टम की नाकामी का सबूत भी है।

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