*दंतेवाड़ा: एनएमडीसी किरंदुल-बचेली परियोजना में स्थानीय भर्ती की मांग को लेकर आदिवासी ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना*
दंतेवाड़ा, 26 जून 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, सुकमा, और बीजापुर जिले के आदिवासी ग्रामीणों ने आज सुबह से नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी) की किरंदुल और बचेली परियोजना के चेकपोस्ट को जाम कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि एनएमडीसी द्वारा हाल ही में शुरू की गई एल-1 और एल-2 स्तर की भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय प्रभावित निवासियों को प्राथमिकता दी जाए। इस प्रदर्शन में सयुंक्त पंचायत के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण शामिल हैं, जो अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्पित दिखाई दे रहे हैं।
*स्थानीय भर्ती की मांग और सामाजिक प्रभाव*
एनएमडीसी, एक नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, दंतेवाड़ा के बैलाडिला आयरन ओर माइन्स में लौह अयस्क खनन का कार्य करती है। हाल ही में एनएमडीसी ने किरंदुल, बचेली, और डोनिमलई परिसरों में विभिन्न ट्रेनी पदों के लिए 995 रिक्तियों की घोषणा की थी। इनमें फील्ड अटेंडेंट, मेंटेनेंस असिस्टेंट, ब्लास्टर, इलेक्ट्रीशियन, और अन्य तकनीकी पद शामिल हैं।
हालांकि, स्थानीय आदिवासी समुदाय का कहना है कि इन भर्तियों में बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि परियोजना से प्रभावित स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जा रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि खनन गतिविधियों के कारण उनकी जमीन, आजीविका, और पर्यावरण प्रभावित हुआ है, इसलिए उन्हें रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
*प्रदर्शन और प्रशासन की प्रतिक्रिया*
आज सुबह से शुरू हुए इस धरने में ग्रामीणों ने किरंदुल और बचेली परियोजना के प्रवेश द्वारों को पूरी तरह बंद कर दिया है। हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस ने रात 3 बजे से ही चेकपोस्ट पर अपनी मौजूदगी सुनिश्चित की थी ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। प्रथम पाली के लिए कार्य पर जाने वाले कर्मचारियों के लिए रास्ता खुला रखा गया था, लेकिन एनएमडीसी के कई कर्मचारियों ने ग्रामीणों के समर्थन में अपने कार्यों पर जाने से इनकार कर दिया। यह एकजुटता इस आंदोलन की ताकत को दर्शाती है।
*पिछले प्रदर्शनों का इतिहास*
यह पहली बार नहीं है जब एनएमडीसी की परियोजनाओं के खिलाफ स्थानीय समुदाय ने आवाज उठाई है। वर्ष 2019 में भी दंतेवाड़ा, सुकमा, और बीजापुर के ग्रामीणों ने बैलाडिला की पहाड़ी नंबर 13 में खनन के खिलाफ प्रदर्शन किया था, क्योंकि यह स्थानीय आदिवासियों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ था। उस समय सयुंक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के नेतृत्व में हजारों ग्रामीणों ने खनन कार्य को रोकने के लिए किरंदुल में धरना दिया था, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खनन कार्य को रोकने का आदेश दिया था।
*स्थानीय भर्ती: एक सामाजिक और आर्थिक जरूरत*
दंतेवाड़ा, सुकमा, और बीजापुर जैसे क्षेत्र नक्सल प्रभावित होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। एनएमडीसी की परियोजनाएं इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्रोत हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भर्ती न केवल सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देगी, बल्कि क्षेत्र में शांति और विकास को भी प्रोत्साहित करेगी। एनएमडीसी ने हाल ही में आदिवासी युवाओं के लिए नर्सिंग और मेडिकल टेक्नोलॉजी में मुफ्त शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया है, जो स्थानीय समुदाय के लिए सकारात्मक कदम है। फिर भी, ग्रामीणों का कहना है कि तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देना दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
*आगे की राह*
यह धरना क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को फिर से उजागर करता है। ग्रामीणों की मांग है कि एनएमडीसी अपनी भर्ती नीति में पारदर्शिता लाए और स्थानीय प्रभावित लोगों को प्राथमिकता दे। जिला प्रशासन और एनएमडीसी प्रबंधन से इस मुद्दे पर त्वरित बातचीत की उम्मीद की जा रही है ताकि स्थिति सामान्य हो सके। इस बीच, कर्मचारियों की एकजुटता और ग्रामीणों का दृढ़ संकल्प इस आंदोलन को और मजबूती प्रदान कर रहा है।*
*निष्कर्षकर्ष* : प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की मांगों को देखते हुए, एनएमडीसी और प्रशासन के बीच शीघ्र संवाद की आवश्यकता है। स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता देने की नीति न केवल सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेगी, बल्कि क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और विकास को भी बढ़ावा देगी। इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से स्थिति को सामान्य करने में मदद मिल सकती है।

