*किरंदुल: वार्ड नंबर 8 में अवैध अतिक्रमण से मटन मार्केट और घरों पर जलभराव का खतरा, BJP नेता के रिश्तेदार की तबेला पर सवाल*

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*किरंदुल: वार्ड नंबर 8 में अवैध अतिक्रमण से मटन मार्केट और घरों पर जलभराव का खतरा, BJP नेता के रिश्तेदार की डेरी पर सवाल*

किरंदुल नगरपालिका के वार्ड नंबर 8 में 19 मई 2025 को हुई 45 मिनट की झमाझम बारिश ने एक गंभीर समस्या को उजागर किया है। इस बारिश ने मटन मार्केट और आसपास के 10 से 15 घरों में 2 से 3 फीट तक पानी भरने की स्थिति पैदा कर दी। बारिश थमने के बाद नगरपालिका की टीम ने जलभराव के कारणों की जांच शुरू की, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में पाया गया कि NMDC द्वारा निर्मित मुख्य नाले पर अवैध अतिक्रमण और एक तबेला व्यवसायी द्वारा नाले के ऊपर कंक्रीट निर्माण ने नाले को पूरी तरह बंद कर दिया है। इस तबेला के कथित तौर पर BJP के शीर्ष नेता से रिश्तेदारी होने की बात सामने आई है, जिसके चलते स्थानीय लोग और मटन मार्केट के व्यापारी आगामी बारिश में डूबने के डर से चिंतित हैं।

*जलभराव का कारण: नाले पर अवैध कब्जा और तबेला का गोबर*

नगरपालिका की जांच टीम, जिसमें मुख्य नगरपालिका अधिकारी शशिभूषण महापात्र, अभियंता तीरथ राम सिन्हा, और आरआई गौरी शंकर तिवारी शामिल थे, ने पाया कि मटन मार्केट से गुजरने वाले 3 से 5 फीट चौड़े नाले पर कुछ लोगों ने कच्चे-पक्के मकान बना लिए हैं। इससे नाले की सफाई वर्षों से नहीं हो पाई। लेकिन सबसे हैरान करने वाला खुलासा तब हुआ जब जांच में पाया गया कि एक तबेला व्यवसायी ने नाले के ऊपर ही कॉलम और बीम डालकर कंक्रीट ढलाई कर डेरी का निर्माण किया है। इस डेरी से निकलने वाला पशुओं का गोबर वर्षों से नाले में डाला जा रहा है, जिसके कारण नाला पूरी तरह जाम हो गया।

इस जाम नाले की वजह से बारिश का पानी मटन मार्केट और आसपास के 10 से 15 घरों में घुस गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर यह अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो आगामी मानसून में स्थिति और भयावह हो सकती है।

*BJP नेता का रिश्तेदार और राजनीतिक दबाव का आरोप*

जांच के बाद जलभराव का कारण तो स्पष्ट हो गया, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या नगरपालिका इस अवैध अतिक्रमण को हटाने की हिम्मत दिखा पाएगी? सूत्रों के अनुसार, तबेला व्यवसायी का रिश्ता BJP के एक शीर्ष नेता से है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में BJP की सरकार है, दंतेवाड़ा के विधायक BJP से हैं, और किरंदुल नगरपालिका अध्यक्ष रूबी सिंह भी BJP से ही हैं। इसके अलावा वार्ड नंबर 8 के पार्षद राजकुमार सोनी भी BJP से हैं।

स्थानीय लोगों में चर्चा है कि क्या BJP नेता अपने रिश्तेदार के अवैध कब्जे को हटवाकर मटन मार्केट और आसपास के घरों को बचाने के लिए कदम उठाएंगे, या राजनीतिक दबाव के चलते चुप्पी साध लेंगे? मटन मार्केट के व्यापारी कुरैशी ने कहा, “हमारा धंधा चौपट हो रहा है। हर बारिश में दुकान में पानी भर जाता है। अगर तबेला का अतिक्रमण नहीं हटा तो हमारा कारोबार ठप हो जाएगा।” वहीं, पास के निवासी शांति देवी ने बताया, “हमारे घर में पानी घुसने से सामान खराब हो गया। बच्चे और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है। क्या हमें डूबने के लिए छोड़ दिया जाएगा?”

*नाले की सफाई: वाहवाही या दिखावा?*

किरंदुल नगरपालिका अध्यक्ष रूबी सिंह ने हाल ही में नाले की सफाई के लिए पोकलैंड मशीन उतारने का दावा किया था। इसकी तस्वीरें अखबारों में छपीं और उन्होंने खूब वाहवाही बटोरी। लेकिन वार्ड नंबर 8 के नाले की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 150 से 200 मीटर लंबे इस नाले की सफाई 15 दिनों से चल रही है, लेकिन अब तक आधा काम भी पूरा नहीं हुआ।

पोकलैंड मशीन की क्षमता एक दिन में 70 से 100 मीटर नाले की सफाई करने की है, लेकिन धीमी गति से हो रही सफाई ने लोगों में सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ लोग इसे दिखावा और BJP के दबाव का नतीजा मान रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सूत्रों के मुताबिक, नगरपालिका अध्यक्ष के हस्तक्षेप के कारण नाले की सफाई रुकी हुई है। तबेला वाले का BJP नेता से रिश्ता होने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं हो रही।”

*नगरपालिका की चुप्पी और जनता का गुस्सा*

नगरपालिका की इस निष्क्रियता से वार्ड नंबर 8 के निवासियों और मटन मार्केट के व्यापारियों में गुस्सा बढ़ रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जनता के टैक्स के पैसे से संचालित नगरपालिका आखिर एक तबेला के सामने इतनी बेबस क्यों है? क्या एक व्यक्ति के अवैध कब्जे की वजह से मटन मार्केट और 15 परिवारों को हर बारिश में डूबने के लिए छोड़ दिया जाएगा?

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता फूलशिंग ने कहा, “यह सिर्फ जलभराव का मामला नहीं है, यह प्रशासन की नाकामी और राजनीतिक दबाव का मामला है। अगर नगरपालिका तुरंत कार्रवाई नहीं करती, तो हम लोग सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।”

*आगे क्या होगा?*

किरंदुल के वार्ड नंबर 8 के निवासी और मटन मार्केट के व्यापारी अब नगरपालिका और BJP नेताओं के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। क्या मुख्य नगरपालिका अधिकारी शशिभूषण महापात्र, अध्यक्ष रूबी सिंह, और पार्षद राजकुमार सोनी इस अवैध अतिक्रमण को हटवाकर जनता को राहत देंगे? या फिर BJP नेता के कथित दबाव में मटन मार्केट और 15 घरों को बारिश के पानी में डूबने के लिए छोड़ दिया जाएगा?

यह मामला न केवल किरंदुल नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे राजनीतिक रसूख के आगे जनता की समस्याएं गौण हो जाती हैं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी मानसून में वार्ड नंबर 8 के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है।

*निष्कर्ष:* किरंदुल नगरपालिका के सामने अब एक बड़ा सवाल है—क्या वह जनता के हित में कदम उठाएगी, या एक तबेला और उसके पीछे खड़े कथित राजनीतिक रसूख के सामने घुटने टेकेगी? यह देखना बाकी है कि क्या मटन मार्केट और 15 परिवारों को जलभराव से बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, या यह मामला सिर्फ कागजों और अखबारों की सुर्खियों तक सीमित रह जाएगा।

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