*एनएमडीसी 11सी माइनिंग: किरंदुल में जल सैलाब और बीजापुर के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी त्रासदी*
किरंदुल, 21 जुलाई 2024: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) की बैलाडीला 11सी माइनिंग परियोजना से निकलने वाला लाल पानी एक बार फिर तबाही का पर्याय बन गया। 21 जुलाई 2024 को दोपहर करीब 3 बजे किरंदुल में लाल पानी का सैलाब कहर बनकर टूटा, जिसने सैकड़ों घरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा ने न केवल किरंदुल के लोगों को प्रभावित किया, बल्कि पड़ोसी बीजापुर जिले के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी पीड़ा को भी उजागर किया, जो इस लाल जहर से दशकों से जूझ रहे हैं।
*किरंदुल में लाल पानी का कहर*
21 जुलाई को किरंदुल में अचानक आए लाल पानी के सैलाब ने स्थानीय निवासियों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। एनएमडीसी की 11सी माइनिंग से निकलने वाली लाल मिट्टी और पानी का मिश्रण सैकड़ों घरों में घुस गया, जिसे लोग स्थानीय भाषा में “काला सोना” कहते हैं। इस सैलाब ने घरों के सोफे, पलंग, सूटकेस, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसे सामानों को बहा ले गया। कई परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि उनके जीवन की कमाई और सामान इस लाल पानी की भेंट चढ़ गए।
स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, “पानी इतनी तेजी से आया कि हमें कुछ समझ ही नहीं आया। घर में सब कुछ बर्बाद हो गया। यह पहली बार नहीं है, लेकिन इस बार नुकसान बहुत ज्यादा है।” किरंदुल में यह पहला मौका था जब लाल पानी ने इतनी बड़ी तबाही मचाई, लेकिन बीजापुर जिले के ग्रामीणों के लिए यह कोई नई बात नहीं है।
*बीजापुर: लाल पानी की दशकों पुरानी त्रासदी*
बीजापुर जिले के पालनार, हिरोली, पुसनार, डुमीरपालनार, मुतवेंडी, कावड़गांव जैसे दर्जनभर गांवों में एनएमडीसी की खदानों से निकलने वाला लाल पानी वर्षों से ग्रामीणों के लिए अभिशाप बना हुआ है। यह लाल पानी बेरूकी नदी को दूषित कर रहा है, जिसका पानी खेती, पशुपालन और दैनिक उपयोग के लिए ग्रामीणों की जीवनरेखा है। दूषित पानी के कारण फसलें नष्ट हो रही हैं, मवेशियों की अकाल मृत्यु हो रही है, और ग्रामीण बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
पुसनार के ग्रामीण लक्ष्मण मंडावी ने कहा, “हमारे खेत बंजर हो गए हैं। नदी का पानी लाल हो चुका है, जिसे पीने से हमारे मवेशी मर रहे हैं और लोग बीमार पड़ रहे हैं। एनएमडीसी को हमारी समस्याओं की कोई परवाह नहीं है।” ग्रामीणों का आरोप है कि एनएमडीसी की खदानों से निकलने वाली लाल मिट्टी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिसके चलते उनकी आजीविका और स्वास्थ्य दोनों खतरे में हैं।
*ग्रामीणों का आक्रोश और विधायक से मुलाकात*
लाल पानी की इस समस्या से त्रस्त बीजापुर जिले के पुसनार, हिरोली और डुमीरपालनार के ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सोमवार को बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी से मुलाकात की। उन्होंने एक ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं, जिसमें शामिल हैं:
*1:-नुकसान का मुआवजा:* लाल पानी से प्रभावित खेतों, फसलों और मवेशियों के नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा राशि।
*2:-सर्वेक्षण:* प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर नुकसान का आकलन और समाधान की दिशा में कदम उठाना।
*3:-रोजगार:* लाल पानी प्रभावित क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को एनएमडीसी बचेली में रोजगार के अवसर।
*4:-स्वास्थ्य सुविधाएं:* प्रभावित क्षेत्रों में सर्वसुविधायुक्त अस्पताल की स्थापना।
*5:-मवेशियों के लिए मुआवजा:* दूषित पानी से मरने वाले मवेशियों के लिए मुआवजा।
*6:-डैम निर्माण:* कदमपाल डैम की तर्ज पर डुमीरपालनार में डैम निर्माण।
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत पहुंचकर भी अपनी मांग दोहराई कि लाल पानी को रोका जाए और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए।
*विधायक का आश्वासन और दौरा*
विधायक विक्रम मंडावी ने ग्रामीणों की मांगों को जायज ठहराते हुए कहा, “लाल पानी से प्रभावित ग्रामीणों की पीड़ा वास्तविक है। सरकार को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।” उन्होंने आश्वासन दिया कि वे 20 जून को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और एनएमडीसी खदान से निकलने वाले लाल पानी के प्रभाव का जायजा लेंगे। मंडावी ने सरकार से मांग की कि ग्रामीणों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए और प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
*एनएमडीसी की चुप्पी और पर्यावरणीय चिंताएं*
एनएमडीसी की बैलाडीला खदानों से निकलने वाला लाल पानी आयरन ऑक्साइड (लौह अयस्क) का अवशेष है, जो खनन प्रक्रिया के दौरान पानी के साथ मिलकर नदियों और खेतों में बह जाता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इस दूषित पानी से न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि यह जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है।
पर्यावरण कार्यकर्ता संजय ठाकुर ने बताया, “एनएमडीसी को अपनी खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट को नियंत्रित करने के लिए उचित प्रबंधन करना चाहिए। लाल पानी को नदियों में बहने से रोकने के लिए सेडिमेंटेशन टैंक और अन्य तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।” हालांकि, एनएमडीसी की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ रहा है।
*क्या है समाधान?*
लाल पानी की समस्या का समाधान तलाशने के लिए विशेषज्ञ कई उपाय सुझाते हैं:
*1:-अपशिष्ट प्रबंधन:* खनन से निकलने वाली लाल मिट्टी को नदियों में बहने से रोकने के लिए सेडिमेंटेशन टैंक और फ़िल्टर सिस्टम की स्थापना।
*2:-पुनर्वास और मुआवजा:* प्रभावित ग्रामीणों को उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था।
*3:-स्वास्थ्य और शिक्षा:* प्रभावित क्षेत्रों में अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास।
*4:-रोजगार सृजन:* स्थानीय युवाओं को एनएमडीसी परियोजनाओं में रोजगार के अवसर प्रदान करना।
*:-पर्यावरण संरक्षण:* खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का नियमित आकलन और निगरानी।
*निष्कर्ष* एनएमडीसी की 11सी माइनिंग परियोजना से निकलने वाला लाल पानी किरंदुल में 21 जुलाई 2024 को एक आपदा के रूप में सामने आया, लेकिन बीजापुर जिले के ग्रामीणों के लिए यह वर्षों से एक जीवित दुःस्वप्न है। ग्रामीणों की मांगें और विधायक विक्रम मंडावी का आश्वासन इस समस्या के समाधान की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन इसके लिए एनएमडीसी और सरकार को ठोस और त्वरित कदम उठाने होंगे। यह केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की आजीविका, स्वास्थ्य और भविष्य का सवाल है।
क्या एनएमडीसी और सरकार इस लाल जहर को रोक पाएंगे? या यह त्रासदी और गहराती जाएगी? इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा, लेकिन फिलहाल ग्रामीणों की उम्मीदें विधायक के दौरे और सरकारी कार्रवाई पर टिकी हैं।

