*प्रकाश विद्यालय किरंदुल में किताबों की बिक्री पर खुली लूट: अभिभावकों में आक्रोश, जिला शिक्षा अधिकारी ने माना नियमों का उल्लंघन*

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*प्रकाश विद्यालय किरंदुल में किताबों की बिक्री पर खुली लूट: अभिभावकों में आक्रोश, जिला शिक्षा अधिकारी ने माना नियमों का उल्लंघन*

किरंदुल 8 अप्रैल 2025: प्रकाश विद्यालय किरंदुल में किताबों की बिक्री को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन द्वारा कैंपस के अंदर ही किताबों की बिक्री की जा रही है और इसके लिए मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये किताबें बाहर की दुकानों में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण अभिभावकों को स्कूल से ही महंगी कीमतों पर किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस मामले ने स्थानीय लोगों के बीच गहरा असंतोष पैदा कर दिया है और जिला शिक्षा अधिकारी ने भी इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है।

 

*स्कूल कैंपस में किताबों की बिक्री*

 

अभिभावकों का बजट बिगड़ाप्रकाश विद्यालय किरंदुल में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही किताबों की बिक्री का सिलसिला शुरू हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने किताबों की उपलब्धता को केवल अपने कैंपस तक सीमित कर दिया है। बाजार की अन्य दुकानों में इन किताबों का मिलना नामुमकिन है, जिसके चलते स्कूल अपनी मर्जी से कीमतें तय कर रहा है। एक अभिभावक रमेश साहू (बदला हुआ नाम) ने बताया, “हमें हर साल किताबों के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। स्कूल में जो किताबें 300 रुपये की बताई जाती हैं, वही बाहर खुले बाजार में 150-200 रुपये में मिल सकती हैं, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प ही नहीं है।”

 

अभिभावकों का यह भी आरोप है कि स्कूल द्वारा दी जाने वाली किताबों की कीमतों में पारदर्शिता नहीं है। कई बार उन्हें बिल भी नहीं दिया जाता, जिससे यह साफ होता है कि स्कूल प्रशासन इस व्यवस्था से मोटी कमाई कर रहा है। एक अन्य अभिभावक, शोभा देवी ने कहा, “हम मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। बच्चों की पढ़ाई का खर्च पहले ही बहुत ज्यादा है, ऊपर से किताबों की मनमानी कीमतें हमारी कमर तोड़ रही हैं। यह एक तरह की लूट है।”

 

*जिला शिक्षा अधिकारी का बयान*

 

स्कूल का कदम गलतइस मामले को लेकर जब जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कोई भी स्कूल अपने कैंपस के अंदर किताबों की बिक्री नहीं कर सकता। अधिकारी ने बताया, “शिक्षा विभाग के नियम स्पष्ट हैं। स्कूल का काम बच्चों को पढ़ाना है, न कि किताबों का व्यापार करना। प्रकाश विद्यालय किरंदुल अगर ऐसा कर रहा है, तो यह पूरी तरह गलत है और नियमों का उल्लंघन है।” उन्होंने आगे कहा कि स्कूल किसी दुकान को अपने सिलेबस की किताबें बेचने के लिए अधिकृत कर सकता है, लेकिन यह व्यवस्था स्कूल परिसर के बाहर होनी चाहिए, न कि अंदर।

 

जिला शिक्षा अधिकारी ने यह भी आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच की जाएगी और अगर स्कूल दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे इस तरह की अनियमितताओं की शिकायत सीधे उनके कार्यालय में दर्ज कराएं, ताकि त्वरित कदम उठाया जा सके।

 

*नियमों की अनदेखी का पुराना इतिहास*

 

यह पहली बार नहीं है जब निजी स्कूलों पर किताबों की बिक्री को लेकर सवाल उठे हों। देश भर में कई जगहों पर स्कूलों द्वारा इसी तरह की मनमानी की शिकायतें सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ स्कूल किताबों के प्रकाशकों और विक्रेताओं के साथ सांठगांठ कर कमीशन का खेल खेलते हैं, जिसका बोझ अंततः अभिभावकों पर पड़ता है। प्रकाश विद्यालय किरंदुल का यह मामला भी उसी ओर इशारा करता है।

 

शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. अजय शर्मा ने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि शिक्षा जैसा पवित्र क्षेत्र भी अब व्यापार का अड्डा बन गया है। स्कूलों को चाहिए कि वे किताबों की सूची पहले से सार्वजनिक करें और अभिभावकों को खुले बाजार से खरीदने की आजादी दें। लेकिन ऐसा न करके वे अपनी जेबें भरने में लगे हैं।”

 

*अभिभावकों की मांग सख्त कार्रवाई और पारदर्शिता*

 

अभिभावकों ने इस मामले में स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा है और जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर स्कूल को किताबें बेचने की अनुमति नहीं है, तो फिर यह व्यवस्था तुरंत बंद होनी चाहिए। साथ ही, वे चाहते हैं कि किताबों की कीमतों की सूची सार्वजनिक की जाए और उन्हें बाजार से खरीदने का विकल्प दिया जाए।

 

स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता मनोज वर्मा ने कहा, “हम जिला शिक्षा अधिकारी से मांग करते हैं कि प्रकाश विद्यालय के खिलाफ तुरंत जांच शुरू की जाए। अगर नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो स्कूल की मान्यता तक रद्द की जानी चाहिए। यह सिर्फ एक स्कूल की बात नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को सुधारने की जरूरत है।”

 

*आगे क्या?*

 

प्रकाश विद्यालय किरंदुल में किताबों की बिक्री का यह मामला अब चर्चा का केंद्र बन गया है। अभिभावकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और वे इस मुद्दे को लेकर एकजुट होने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, जिला शिक्षा अधिकारी के बयान से उम्मीद जगी है कि इस मामले में जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

 

फिलहाल, यह देखना बाकी है कि क्या प्रकाश विद्यालय अपने रवैये में बदलाव लाता है या फिर जिला प्रशासन इस खुली लूट को रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई करता है। अभिभावकों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है, और वे चाहते हैं कि शिक्षा के नाम पर हो रही इस मनमानी पर जल्द से जल्द लगाम लगे।

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