*किरंदुल धनतेरस: मेन रोड पर अतिक्रमण का कहर, अंदर की गलियों में व्यापारियों का रोना*

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*किरंदुल धनतेरस: मेन रोड पर अतिक्रमण का कहर, अंदर की गलियों में व्यापारियों का रोना*

किरंदुल। धनतेरस के दिन शहर का बाजार एक बार फिर दो चेहरों में बंटा नजर आया। मेन रोड पर जहाँ भीड़ इतनी थी कि पैदल चलना मुश्किल हो रहा था, वहीं चाचा होटल से आगे अंदर की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था। कुछ वर्ष पहले ये गलियाँ ग्राहकों से इतनी भरी रहती थीं कि पैदल चलना दूभर हो जाता था। आज उन्हीं गलियों में दोपहिया वाहन बेरोकटोक दौड़ते दिखे। भीड़ नाममात्र की थी।

स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि इसका सीधा कारण मेन रोड पर फैलता जा रहा अतिक्रमण है। दुकानदारों का कहना है कि पूरा बाजार अब मेन रोड पर सज गया है। जिनकी स्थायी दुकानें अंदर हैं, वे भी दुकान छोड़कर मेन रोड की ओर रुख करने लगे हैं। नतीजा यह कि 20 फुट चौड़ी सड़क पर पीछे जबरन जगह घेरकर कबाड़ की तरह सामान रख दिया जाता है और 5 से 8 फुट आगे बढ़कर दुकान लगा दी जाती है। पैदल चलने के लिए महज 3-4 फुट जगह बचती है। सड़क लगभग बंद हो चुकी है।

ग्राहक अंदर घुसने की बजाय मेन रोड पर ही फूल-लाइट, सजावट और दीवाली के सामान खरीदकर लौट जाते हैं। अंदर की दुकानों का व्यापार आधा रह गया है, जबकि मेन रोड पर अस्थायी दुकान लगाने वाले दोगुना कमा रहे हैं।

एक व्यापारी ने गुस्से में कहा, “हमने लाखों खर्च करके दुकान बनाई, सालाना नगरपालिका को टैक्स देते हैं। लेकिन व्यापार रोज घट रहा है। कारण सिर्फ यही है कि बाहर मेन रोड पर लोग पूरे साल धड़ल्ले से अतिक्रमण कर व्यापार कर रहे हैं और अंदर आने की जगह ही नहीं छोड़ रहे।”

कई व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अगर यही हाल रहा तो उन्हें भी अपनी दुकान बंद कर मेन रोड पर जगह घेरकर बैठना पड़ेगा। इससे सड़क और ज्यादा बंद होगी।

धनतेरस जैसे त्योहारी दिन पर यह तस्वीर सिर्फ भीड़ की नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता और स्थायी व्यापारियों के साथ हो रहे अन्याय की है। नगरपालिका अगर मेन रोड के अतिक्रमण पर सख्ती नहीं दिखाती, तो आने वाले वर्षों में किरंदुल का पारंपरिक बाजार सिर्फ नाम का रह जाएगा।

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