🔴 किरंदुल ब्रेकिंग न्यूज़
*बैलाडीला बना बेरोजगार युवाओं का ‘छोटा जंतर-मंतर’, L-1 और L-2 भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन तेज*
‘काम नहीं तो काम बंद’ के नारों के साथ NMDC किरंदुल और बचेली परियोजनाओं के चेक पोस्ट बंद, आंदोलन में ग्रामीण आदिवासी बेरोजगार युवाओं की बड़ी भागीदारी
किरंदुल। दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला क्षेत्र में रोजगार की मांग को लेकर बेरोजगार युवाओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। NMDC की किरंदुल एवं बचेली परियोजनाओं में L-1 और L-2 भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर युवाओं ने ‘काम नहीं तो काम बंद’ का नारा बुलंद किया है। पिछले चार दिनों से बचेली परियोजना का चेक पोस्ट बंद रखा गया है, वहीं आज सुबह से किरंदुल परियोजना का चेक पोस्ट भी बंद कर दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में रोजगार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
आंदोलन में 99 प्रतिशत ग्रामीण आदिवासी बेरोजगार युवा होने का दावा
इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसमें शामिल युवाओं की पृष्ठभूमि है। आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल बेरोजगार युवाओं में लगभग 99 प्रतिशत ग्रामीण आदिवासी युवा हैं, जो L-1 और L-2 भर्ती के माध्यम से रोजगार पाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह स्थिति स्थानीय रोजगार के अवसरों और ग्रामीण आदिवासी युवाओं की रोजगार संबंधी अपेक्षाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिन ग्रामीण क्षेत्रों के युवा आज रोजगार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, उनके लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार का अवसर कितना महत्वपूर्ण है, यह इस प्रदर्शन से स्पष्ट होता है।
दंतेवाड़ा जिले के शहरी क्षेत्र के युवाओं के पास जिले पर्याप्त रोजगार उपलब्ध है?
आंदोलन में ग्रामीण आदिवासी युवाओं की कथित तौर पर बड़ी भागीदारी के बीच एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या किरंदुल-बचेली के शहरी क्षेत्रों के युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर मिल चुके हैं? यदि शहरी क्षेत्र के युवाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं? क्या उन्हें पहले से ही पर्याप्त रोजगार उपलब्ध है, या उनकी रोजगार संबंधी समस्याएं अलग हैं?
ग्रामीण आदिवासी युवाओं की बड़ी भागीदारी को सीधे इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि शहरी क्षेत्र के सभी युवाओं को भरपूर रोजगार मिल चुका है। इस विषय में वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्थानीय युवाओं के रोजगार, बेरोजगारी और भर्ती में भागीदारी से जुड़े आंकड़ों की आवश्यकता है।
L-1 और L-2 भर्ती को लेकर आर-पार की लड़ाई
आंदोलन कर रहे युवाओं की प्रमुख मांग NMDC की किरंदुल एवं बचेली परियोजनाओं में L-1 और L-2 भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की है। युवाओं का कहना है कि बैलाडीला क्षेत्र के ग्रामीण आदिवासी युवाओं को भी रोजगार के उचित अवसर मिलने चाहिए। इसी मांग को लेकर वे धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और आम लोगों से आंदोलन को समर्थन देने की अपील कर रहे हैं।
युवाओं की अपील—यह किसी राजनीतिक पार्टी का आंदोलन नहीं
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल द्वारा संचालित नहीं किया जा रहा है, बल्कि बेरोजगार युवाओं ने अपने रोजगार और अधिकारों की मांग को लेकर इसे शुरू किया है। उनका आग्रह है कि इस आंदोलन को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय स्थानीय युवाओं की रोजगार संबंधी समस्याओं के रूप में समझा जाए।
अब NMDC प्रबंधन के रुख पर निगाहें
किरंदुल और बचेली परियोजनाओं के चेक पोस्ट बंद किए जाने के बाद अब सबकी नजर NMDC प्रबंधन और संबंधित प्रशासन पर टिकी है। सवाल यह है कि L-1 और L-2 भर्ती को लेकर प्रबंधन क्या निर्णय लेता है और ग्रामीण आदिवासी बेरोजगार युवाओं की मांगों पर कब तक कोई ठोस पहल होती है।
बैलाडीला में जारी यह आंदोलन केवल भर्ती की मांग नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसरों और ग्रामीण आदिवासी युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

