किरंदुल परियोजना अस्पताल में एम्बुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल, शव ले जाने के लिए भी परिजनों को उठानी पड़ी परेशानी
बेंगूर गांव शव ले जाने के दौरान सामने आई अव्यवस्था; खराब शव वाहन और एम्बुलेंस के पिछले दरवाजे ने बढ़ाई मुश्किलें
किरंदुल, दंतेवाड़ा। एनएमडीसी किरंदुल परियोजना अस्पताल में एक बार फिर एम्बुलेंस व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9:30 बजे एक आदिवासी महिला की मृत्यु के बाद उनके शव को गृह ग्राम बेंगूर ले जाने के दौरान परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शव को ले जाने के लिए अस्पताल में उपलब्ध शव वाहन खराब था और स्टार्ट नहीं हो पाया। इसके बाद शव को दूसरे एम्बुलेंस वाहन से ले जाने की व्यवस्था की गई, लेकिन परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। बताया गया कि दूसरे एम्बुलेंस का पिछला दरवाजा भी नहीं खुला, जिसके कारण परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अंततः किसी तरह बीच का दरवाजा खोलकर शव को वाहन में रखने की व्यवस्था की गई।
शव वाहन खराब, दूसरा एम्बुलेंस भी नहीं मिला व्यवस्थित
सूत्रों से मिली जानकारी में यह भी सामने आया है कि शव को एम्बुलेंस में रखने के लिए अस्पताल में कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर भी परेशानी हुई। ऐसे संवेदनशील समय में शव को वाहन में रखने की व्यवस्था करने में परिजनों को कठिनाई उठानी पड़ी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
12 पंचायतों के आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल
एनएमडीसी किरंदुल परियोजना क्षेत्र में आसपास की आदिवासी आबादी के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण विषय है। क्षेत्र की 12 पंचायतों के आदिवासी परिवार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल में शव वाहन खराब हो और दूसरे एम्बुलेंस के दरवाजे तक ठीक से काम न करें, तो यह वाहनों के रखरखाव और आपातकालीन व्यवस्था की नियमित निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
यह मामला केवल एक वाहन की खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात की भी जांच आवश्यक बनाता है कि अस्पताल में उपलब्ध शव वाहन और एम्बुलेंस की तकनीकी स्थिति की नियमित जांच होती है या नहीं। साथ ही, रात के समय शव को सुरक्षित तरीके से ले जाने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था उपलब्ध है या नहीं।
अस्पताल प्रबंधन से जवाबदेही की अपेक्षा
इस घटना के बाद सवाल उठता है कि क्या अस्पताल प्रबंधन को एम्बुलेंस और शव वाहनों की नियमित तकनीकी जांच सुनिश्चित नहीं करनी चाहिए? यदि किसी वाहन में खराबी आ जाए, तो क्या वैकल्पिक वाहन तत्काल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है? और क्या शव को वाहन में रखने तथा परिजनों को आवश्यक सहायता देने के लिए पर्याप्त कर्मचारी तैनात हैं?
जनहित में मांग है कि एनएमडीसी प्रबंधन इस पूरे मामले की जांच कराए, खराब शव वाहन एवं एम्बुलेंस की तकनीकी स्थिति की समीक्षा करे और रात के समय भी सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करे। आदिवासी परिवारों को संकट की घड़ी में इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए जिम्मेदार व्यवस्था तय करना आवश्यक है।
