*किरंदुल की सड़कें: गड्ढों में सड़क या सड़कों में गड्ढे?*
*करोड़ों की आमदनी वाले नगरपालिका क्षेत्र की बदहाल सड़कों पर उठे सवाल, गौरव पथ भी गड्ढों में तब्दील*
किरंदुल। दंतेवाड़ा जिले का किरंदुल क्षेत्र अपनी खनिज संपदा और औद्योगिक गतिविधियों के कारण छत्तीसगढ़ में अलग पहचान रखता है। एनएमडीसी सहित अन्य औद्योगिक संस्थानों से मिलने वाले राजस्व के बावजूद शहर की सड़कों की मौजूदा हालत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
किरंदुल की कई गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक जगह-जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। स्थिति यह है कि लोगों के बीच अब यह सवाल उठने लगा है—“किरंदुल की सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क?”
जिस गौरव पथ को किरंदुल की पहचान और गौरव के रूप में देखा जाता है, वहां भी सड़क की खराब स्थिति लोगों को परेशान कर रही है। बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नगरपालिका आखिर किसके भरोसे?
किरंदुल नगरपालिका परिषद से जनता का सीधा सवाल है कि शहर की सड़कों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि नगरपालिका के पास पर्याप्त राजस्व संसाधन हैं, तो फिर शहर की सड़कें लगातार बदहाल क्यों होती जा रही हैं?
क्या नगरपालिका परिषद सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग या एनएमडीसी की ओर देख रही है? अथवा संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने का खामियाजा आम जनता भुगत रही है?
जनता यह भी जानना चाहती है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर अब तक कितना पैसा स्वीकृत हुआ, कितना खर्च हुआ और किन एजेंसियों द्वारा कौन-कौन से कार्य कराए गए।
एनएमडीसी की सड़कों पर भी गुणवत्ता को लेकर सवाल
एनएमडीसी परियोजना क्षेत्र की सड़कों को लंबे समय तक बेहतर निर्माण और रखरखाव के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन वर्तमान में परियोजना क्षेत्र की कुछ सड़कों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है।
एनएमडीसी परियोजना क्षेत्र में स्कूल के सामने स्थित चौक की सड़क पिछले लगभग एक वर्ष में कई बार क्षतिग्रस्त होने और दोबारा बनाए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि सड़क बार-बार खराब हो रही है तो निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, तकनीकी निगरानी और ठेकेदार की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
परियोजना क्षेत्र की जिन सड़कों का निर्माण हाल के वर्षों में हुआ है, उनकी स्थिति यदि कम समय में खराब हो रही है तो एनएमडीसी प्रबंधन को इसका तकनीकी परीक्षण और गुणवत्ता ऑडिट कराना चाहिए।
सिर्फ सड़क बनाना काफी नहीं, गुणवत्ता भी जरूरी
सड़क निर्माण पर जनता का पैसा खर्च होता है। इसलिए सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि सड़क बनी या नहीं, बल्कि यह भी होना चाहिए कि सड़क कितनी लागत में बनी, किस एजेंसी ने बनाई, किस ठेकेदार ने काम किया, निर्माण की निर्धारित गुणवत्ता क्या थी और उसकी गारंटी/दायित्व अवधि कितनी है।
यदि किसी सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है, तो कम समय में उसके खराब होने की वजह भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
जनता की मांग—जिम्मेदारी तय हो
किरंदुल के नागरिकों की मांग है कि नगरपालिका परिषद और एनएमडीसी अपने-अपने क्षेत्र की सड़कों का संयुक्त निरीक्षण कराकर खराब सड़कों की सूची सार्वजनिक करें।
साथ ही प्रत्येक सड़क के संबंध में यह जानकारी भी सार्वजनिक की जाए—
सड़क निर्माण की स्वीकृत लागत कितनी थी?
निर्माण किस एजेंसी/ठेकेदार ने किया?
निर्माण कब पूरा हुआ?
सड़क की निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मानक क्या थे?
सड़क की गारंटी/दायित्व अवधि कितनी है?
निर्माण के बाद कितनी बार मरम्मत कराई गई?
मरम्मत पर अब तक कितना खर्च हुआ?
सड़क के बार-बार क्षतिग्रस्त होने की तकनीकी वजह क्या है?
सबसे बड़ा सवाल
जब किरंदुल की पहचान खनिज संपदा और बड़े औद्योगिक संस्थानों के कारण है, तो फिर शहर की आम जनता को गड्ढों वाली सड़कें क्यों मिल रही हैं?
नगरपालिका परिषद और एनएमडीसी प्रबंधन को अब रामभरोसे व्यवस्था से बाहर निकलकर जवाबदेही के साथ सड़क व्यवस्था सुधारने की जरूरत है।
सी जी संविधान न्यूज़ | छत्तीसगढ़
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