*दंतेवाड़ा: भांशी -किरंदुल मार्ग पर जंगली झाड़ियां बन रहीं हादसों की जड़, विभागों की लापरवाही से खतरे में जानें*

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*दंतेवाड़ा: भांशी -किरंदुल मार्ग पर जंगली झाड़ियां बन रहीं हादसों की जड़, विभागों की लापरवाही से खतरे में जानें*

दंतेवाड़ा, 14 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में भांशी से किरंदुल जाने वाला मार्ग, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, अब हादसों का न्योता दे रहा है। घने जंगलों और घुमावदार घाटियों से गुजरने वाली इस लगभग 20 किलोमीटर लंबी सड़क पर उगी झाड़ियां और पेड़-पौधे वाहन चालकों की visibility को बाधित कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों की शिकायतों के बावजूद वन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनदेखी इस समस्या को और गंभीर बना रही है।

यह मार्ग भांसी से किरंदुल तक फैला हुआ है, जहां घने वन और पहाड़ी इलाके इसे एक अद्भुत पर्यटन स्थल बनाते हैं। लेकिन सड़क के किनारे उगे वृक्षों की शाखाएं और झाड़ियां अब सड़क पर ही फैल गई हैं। खासकर मोड़ों पर ये झाड़ियां सामने से आने वाले वाहनों को छिपा लेती हैं, जिससे चालक को प्रतिक्रिया देने का समय नहीं मिलता। एक स्थानीय ट्रक ड्राइवर रामेश्वर साहू बताते हैं, “यह रोड बैलाडिला की लौह अयस्क खदानों से जुड़ा है, जहां रोजाना सैकड़ों भारी वाहन गुजरते हैं। लेकिन झाड़ियों की वजह से अंधे मोड़ों पर हादसे होना आम हो गया है। पिछले महीने ही दो बाइक सवार घायल हो चुके हैं।”

समस्या की जड़: विभागीय लापरवाही

विश्लेषण करने पर पता चलता है कि यह समस्या मौसमी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक उपेक्षा का नतीजा है। मानसून के दौरान तेजी से बढ़ने वाली वनस्पतियां सड़क पर अतिक्रमण कर लेती हैं, लेकिन नियमित रखरखाव की कमी से स्थिति बिगड़ती जाती है। वन विभाग का दायित्व है कि जंगली क्षेत्रों में सड़क किनारे की सफाई सुनिश्चित करे, जबकि PWD को सड़क की मरम्मत और सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी है। लेकिन दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आती है।

दंतेवाड़ा जिला, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, में सड़क सुरक्षा पहले से ही एक चुनौती है। राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े इस मार्ग पर यातायात बढ़ रहा है, क्योंकि किरंदुल की खदानें देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी न केवल स्थानीय लोगों की जान जोखिम में डाल रही है, बल्कि पर्यटन को भी प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते झाड़ियों की कटाई और सड़क चौड़ीकरण नहीं किया गया, तो बड़े हादसे अपरिहार्य हैं।

आंकड़ों से समझें गंभीरता

दुर्घटना दर: जिले में पिछले एक साल में सड़क हादसों में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें घुमावदार रोड्स पर visibility की कमी मुख्य कारण है।

यातायात मात्रा: रोजाना 500 से अधिक वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, जिसमें मालवाहक ट्रक और पर्यटक वाहन शामिल हैं।

पर्यावरणीय संतुलन: झाड़ियों की कटाई जरूरी है, लेकिन इसे पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि जंगलों की जैव विविधता प्रभावित न हो।

क्या है समाधान?

स्थानीय प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। वन विभाग द्वारा नियमित ट्रिमिंग अभियान चलाया जाए, जबकि PWD सड़क पर रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगा सकता है। साथ ही, ड्रोन सर्वेक्षण से समस्या वाले स्पॉट्स की पहचान की जा सकती है। एक पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा कहती हैं, “यह मार्ग प्रकृति का वरदान है, लेकिन सुरक्षा के बिना यह अभिशाप बन सकता है। विभागों को मिलकर एक स्थायी योजना बनानी होगी।”

यह मुद्दा न केवल सड़क सुरक्षा का है, बल्कि विकास और पर्यावरण संरक्षण का भी। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह खूबसूरत मार्ग हादसों की कहानियां लिखने लगेगा। जिला प्रशासन से अपील है कि शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लें और कार्रवाई करें।

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