*किरंदुल नगरपालिका में स्वतंत्रता दिवस का अपमान: गंभीर लापरवाही या साजिश?*
छत्तीसगढ़ की सबसे धनी नगरपालिका परिषद किरंदुल में 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के आयोजन में हुई कई गंभीर गलतियों ने न केवल स्थानीय लोगों को निराश किया, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज और स्वतंत्रता दिवस की गरिमा पर भी सवाल उठाए हैं। इन गलतियों के लिए नगरपालिका के मुख्य अधिकारी शशि भूषण महापात्र और अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इन लापरवाहियों को राष्ट्रीय गौरव के साथ खिलवाड़ और संभावित साजिश करार दिया है।
*स्वतंत्रता दिवस के आयोजन में हुईं ये गंभीर गलतियां:*
‘*1:-हर घर तिरंगा’ अभियान का मखौल:* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राष्ट्रीय ध्वज को प्रत्येक घर में पहुंचाने की जिम्मेदारी थी। लेकिन 14 अगस्त को नगरपालिका द्वारा वितरित तिरंगे उल्टे और झुके हुए तरीके से दुकानों और गलियों में लगाए गए, जो राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का स्पष्ट उदाहरण है।
*2:-गांधी जी की प्रतिमा की अनदेखी:* स्वतंत्रता दिवस के दिन नगरपालिका परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा को नजरअंदाज किया गया। केवल उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के याद दिलाने पर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए, जो आयोजन की लापरवाही को दर्शाता है।
*3:-मुख्यमंत्री के संदेश की अवहेलना:* प्रत्येक सरकारी कार्यालय में मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन अनिवार्य होता है। लेकिन किरंदुल नगरपालिका में ध्वजारोहण के बाद मुख्य अधिकारी शशि भूषण महापात्र, अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह और कुछ पार्षद नाश्ता करने के बाद दंतेवाड़ा के कार्यक्रम में चले गए। बाद में किसी के टोकने पर आनन-फानन में कुछ कर्मचारियों को बुलाकर बिना मुख्य अधिकारी की उपस्थिति में संदेश का वाचन किया गया, जो औपचारिकता मात्र था।
*4:-कर्मचारियों की अक्षमता:* जिला स्तर पर स्वतंत्रता दिवस के लिए प्रत्येक नगरपालिका से 12 कर्मचारियों का चयन किया जाता है, जिन्हें उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया जाता है। लेकिन किरंदुल नगरपालिका से एक भी कर्मचारी का चयन न होना मुख्य अधिकारी की नाकामी को उजागर करता है। यह सवाल उठता है कि क्या नगरपालिका में कोई कर्मचारी उत्तम कार्य करने में सक्षम नहीं है?
*5:-राष्ट्रीय ध्वज का बार-बार अपमान:* नगरपालिका द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज को अन्य झंडों और सामाजिक संगठनों के बैनरों के नीचे जमीन को छूते हुए बांधा गया, जो तिरंगे के सम्मान के खिलाफ है। यह राष्ट्रीय ध्वज के प्रति घोर असम्मान का प्रतीक है।
*क्या यह लापरवाही या साजिश?*
इन गंभीर गलतियों ने किरंदुल नगरपालिका के प्रशासनिक ढांचे और नेतृत्व पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इसे महज लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर स्वतंत्रता दिवस की गरिमा को ठेस पहुंचाने की साजिश मान रहे हैं। खासकर मुख्य अधिकारी शशि भूषण महापात्र की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें पहले भी मतदान केंद्रों में अव्यवस्था के लिए निलंबित किया जा चुका है।
इसके साथ ही, नगरपालिका अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह, जो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से हैं, की चुप्पी और इन गलतियों में उनकी सहभागिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोग इसे बीजेपी शासित नगरपालिका में राष्ट्रीय गौरव के प्रति उदासीनता के रूप में देख रहे हैं। यह सवाल उठता है कि क्या अध्यक्ष ने मुख्य अधिकारी के साथ मिलकर इन लापरवाहियों को नजरअंदाज किया?
*जनता में आक्रोश, जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग*
किरंदुल की जनता में इन घटनाओं को लेकर भारी आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि जिला कलेक्टर और प्रशासन इन गलतियों की जांच कर मुख्य अधिकारी शशि भूषण महापात्र और अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान और स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र अवसर की गरिमा को ठेस पहुंचाने की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
*निष्कर्ष*
किरंदुल नगरपालिका में स्वतंत्रता दिवस 2025 के आयोजन में हुई ये गलतियां न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव के प्रति उदासीनता और संभावित साजिश की ओर भी इशारा करती हैं। मुख्य अधिकारी शशि भूषण महापात्र और अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह की जवाबदेही तय होनी चाहिए। जिला प्रशासन को इस मामले में तत्काल जांच शुरू कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। किरंदुल की जनता अब इस मामले में प्रशासन के रुख का इंतजार कर रही है।

