*भारत बंद: 25 करोड़ कर्मचारियों की हड़ताल, एनएमडीसी किरंदुल में मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन*
नई दिल्ली/किरंदुल, 9 जुलाई 2025: देशभर में आज 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित ‘भारत बंद’ ने केंद्र सरकार की कथित मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के खिलाफ व्यापक असंतोष को उजागर किया। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में लगभग 25 करोड़ कर्मचारी और ग्रामीण मजदूर शामिल हुए, जिसका असर बैंकिंग, डाक, कोयला खनन, परिवहन, बिजली और निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ा। छत्तीसगढ़ की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी किरंदुल परियोजना में भी हजारों मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
*एनएमडीसी किरंदुल में प्रदर्शन*
छत्तीसगढ़ के किरंदुल में एनएमडीसी परियोजना के मजदूरों ने ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के अध्यक्ष देवरायलु और सचिव राजेश संधू, साथ ही इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के अध्यक्ष विनोद कश्यप और सचिव ए.के. सिंह के नेतृत्व में बस स्टैंड चौक पर धरना-प्रदर्शन किया। हजारों मजदूरों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों, विशेष रूप से चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और निजीकरण के फैसलों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ये नीतियां मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करती हैं और इन्हें तत्काल रद्द किया जाए।
*हड़ताल का कारण और मांगें*
10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, जिनमें एटक, इंटक, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), और सेल्फ-एम्प्लॉयड वूमेन्स एसोसिएशन (सेवा) शामिल हैं, ने सरकार को 17 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था। इन मांगों में शामिल हैं:
:-चार नए श्रम संहिताओं को रद्द करना, जो यूनियनों के अनुसार हड़ताल और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार को सीमित करते हैं।
:-न्यूनतम वेतन को 26,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग।
:-पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली।
:-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण पर रोक।
:-बेरोजगारी और महंगाई पर नियंत्रण, साथ ही मनरेगा के तहत कार्यदिवस और मजदूरी बढ़ाने की मांग।
:-संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की मांगों जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कर्ज माफी को लागू करना।
*देशभर में हड़ताल का असर*
हड़ताल के कारण देशभर में कई सेवाएं प्रभावित हुईं। बैंकिंग सेवाओं में रुकावट, डाकघरों में देरी, और कोयला खनन व बिजली उत्पादन में व्यवधान की खबरें सामने आईं। कई राज्यों में सरकारी बसें और परिवहन सेवाएं ठप रहीं। हालांकि, रेलवे और स्वास्थ्य सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया, लेकिन कुछ स्थानों पर ट्रेनों में देरी की आशंका जताई गई। पश्चिम बंगाल, बिहार, और ओडिशा जैसे राज्यों में सड़क जाम और रेलवे ट्रैक अवरुद्ध करने की घटनाएं भी दर्ज की गईं। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने भी इस बंद को समर्थन दिया, जिससे वहां ‘बिहार बंद’ का व्यापक असर देखा गया।
*किसानों और ग्रामीण मजदूरों की भागीदारी*
संयुक्त किसान मोर्चा और ग्रामीण मजदूर संगठनों ने इस हड़ताल को पूर्ण समर्थन दिया। ग्रामीण इलाकों में रास्ता रोको, जुलूस और प्रदर्शन आयोजित किए गए। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य और कर्ज माफी की मांग को दोहराया, जबकि मजदूर संगठनों ने सरकार पर कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। सीटू के राष्ट्रीय सचिव ए.आर. सिंधु ने कहा, “यह हड़ताल मजदूरों और किसानों की एकजुटता का प्रतीक है, जो सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करती है।”
*आर्थिक प्रभाव और सरकार का रुख*
हड़ताल के कारण करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। विशेष रूप से कोयला खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस हड़ताल पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पिछली हड़तालों में सरकार ने इसे “सीमित प्रभाव” वाला बताया था, लेकिन इस बार 25 करोड़ कर्मचारियों और किसानों की भागीदारी ने इसे ऐतिहासिक बना दिया है।
*आम जनता के लिए सलाह*
हड़ताल के चलते आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे बैंकिंग, डाक, या परिवहन से जुड़े कार्यों के लिए पहले से वैकल्पिक व्यवस्था करें। स्कूल, कॉलेज, और निजी कार्यालय सामान्य रूप से खुले रह सकते हैं, लेकिन यात्रा से पहले रूट की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।
यह हड़ताल न केवल मजदूरों और किसानों के अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है, बल्कि सरकार और जनता के बीच नीतिगत मुद्दों पर संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
