*किरंदुल में
शव मिलने पर बीजेपी नेता मनोज छलीवाल का तीखा रुख, बाहरी कंपनियों को दी चेतावनी*
किरंदुल (दंतेवाड़ा): किरंदुल के वार्ड नंबर 8 में हाल ही में एक नाले से अज्ञात शव मिलने की घटना ने स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। इस मामले में बीजेपी नेता मनोज छलीवाल ने बाहरी कंपनियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि सभी कंपनियां अपने मजदूरों की पूरी जानकारी स्थानीय थानों में दर्ज कराएं।
*अज्ञात शव की पहचान में पुलिस असमर्थ, सवालों के घेरे में प्रक्रिया*
पुलिस ने शव की पहचान के लिए सभी संबंधित कंपनियों से संपर्क किया, लेकिन किसी भी कंपनी ने मृतक को अपने कर्मचारी के रूप में पहचानने से इनकार कर दिया। इस घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। छलीवाल ने आरोप लगाया कि कंपनियां अपने मजदूरों की जानकारी थानों में दर्ज नहीं करातीं, जिसके कारण ऐसी घटनाओं में पहचान करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया, “पुलिस विभाग कंपनियों से मजदूरों की पूरी जानकारी क्यों नहीं लेता? क्या यह लापरवाही नहीं है?”
*बाहरी मजदूर और शराब का नशा: स्थानीय लोगों में आक्रोश*
छलीवाल ने बताया कि किरंदुल और बचेली क्षेत्र में बाहरी कंपनियां अपने साथ बाहर से मजदूर लाती हैं, जिनकी जानकारी स्थानीय प्रशासन के पास नहीं होती। इनमें से कई मजदूर शराब के आदी होते हैं और दंतेवाड़ा जिले में उपलब्ध सस्ती शराब को वे ‘अमृत’ मानकर अत्यधिक सेवन करते हैं। इससे न केवल स्थानीय आदिवासियों के साथ विवाद की स्थिति पैदा होती है, बल्कि कई बार ये मजदूर स्थानीय लोगों से झगड़ा और मारपीट तक करने लगते हैं। इस तरह की घटनाएं क्षेत्र में सामाजिक तनाव को बढ़ा रही हैं।
*कंपनियों पर बढ़ता दबाव, उग्र प्रदर्शन की चेतावनी*
मनोज छलीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि बाहरी कंपनियां अपने मजदूरों की जानकारी स्थानीय थानों में दर्ज करने में विफल रहती हैं, तो स्थानीय लोग और बीजेपी कार्यकर्ता इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने मांग की कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों का पूरा ब्योरा, जैसे नाम, पता, और पहचान पत्र, स्थानीय पुलिस को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया जाए। यह कदम न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को भी रोकेगा।
*स्थानीय लोगों की मांग: पारदर्शिता और जवाबदेही*
इस घटना ने किरंदुल और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाहरी मजदूरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक सख्त तंत्र की आवश्यकता है। साथ ही, पुलिस प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके!
*निष्कर्ष*
किरंदुल के वार्ड नंबर 8 में मिले अज्ञात शव ने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बाहरी कंपनियों की जवाबदेही पर भी बहस छेड़ दी है। बीजेपी नेता मनोज छलीवाल का यह बयान किरंदुल और बचेली में सामाजिक और प्रशासनिक सुधार की मांग को और मजबूत करता है। यदि कंपनियां और प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाते, तो क्षेत्र में तनाव और विरोध प्रदर्शन बढ़ने की आशंका है।
