*किरंदुल में जमीन विवाद ने लिया नया मोड़: भूलन प्रसाद की जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप*
किरंदुल, 5 जुलाई 2025: किरंदुल के वार्ड नंबर 8 में एक जमीन विवाद ने नया मोड़ ले लिया है, जहां बुजुर्ग और बीमार भूलन प्रसाद, पिता स्वर्गीय फूलन प्रसाद, ने अपनी जमीन पर इकबाल सिंह द्वारा जबरन कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। भूलन प्रसाद का दावा है कि उनकी 50 वर्षों से अधिक पुरानी जमीन पर इकबाल सिंह ने धमकी देकर ताबेला और घर बना लिया है। इस मामले में भूलन प्रसाद ने नगरपालिका परिषद उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी और बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ, किरंदुल को 5 जुलाई 2025 को आवेदन देकर अपनी जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
*विवाद का केंद्र: एनएमडीसी नाली और जमीन का कब्जा*
भूलन प्रसाद के अनुसार, उनकी जमीन का आधा हिस्सा एनएमडीसी द्वारा निर्मित नाली के ऊपर है, जिस पर इकबाल सिंह ने ताबेला बनाया है, जबकि शेष आधा हिस्सा उनकी निजी जमीन पर कब्जा करके बनाया गया है। भूलन प्रसाद ने बताया कि उनकी बीमारी और शारीरिक अक्षमता के कारण वह इस अन्याय के खिलाफ पहले भी कई बार नगरपालिका, तहसीलदार और एसडीएम को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
*बुजुर्ग की आपबीती: लाचारी और अन्याय की दास्तान*
भूलन प्रसाद ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “मैं बीमार और लाचार हूं। चलने-फिरने में असमर्थ हूं। इकबाल सिंह ने धमकी देकर मेरी जमीन पर कब्जा किया है। मैं बार-बार नगरपालिका नहीं जा सकता। ऐसा लगता है कि मेरे जैसे गरीब और बीमार व्यक्ति को कोई देखने वाला नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “यह जमीन मेरे लिए 50 साल से ज्यादा समय से मेरी धरोहर है, लेकिन मेरे पास इतनी ताकत नहीं कि मैं इकबाल जैसे कब्जाधारी से लड़ सकूं।”
*नगरपालिका और व्यापारी संघ से मांगी मदद*
भूलन प्रसाद ने अपनी जमीन वापस पाने के लिए नगरपालिका परिषद उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी और बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ, किरंदुल से औपचारिक रूप से आवेदन देकर सहायता मांगी है। उन्होंने नगरपालिका में समेकित कर और सांकेतिक कर जमा किया है और अधिकारियों से अपनी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की मांग की है। भूलन प्रसाद ने हाथ जोड़कर तहसीलदार, एसडीएम और अन्य अधिकारियों से अपनी जमीन वापस दिलाने में सहयोग करने की अपील की है।
*सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा*
यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत जमीन विवाद को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाता है। भूलन प्रसाद जैसे बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति की इस लड़ाई में बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ और नगरपालिका परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में भूलन प्रसाद के समर्थन में आवाज उठाने की बात कही है।
*आगे क्या?*
इस मामले में अब सभी की नजरें प्रशासन और नगरपालिका परिषद की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या भूलन प्रसाद को उनकी जमीन वापस मिल पाएगी, या यह मामला लंबे समय तक अनसुलझा रहेगा? यह देखना बाकी है कि स्थानीय प्रशासन और व्यापारी कल्याण संघ इस मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता दिखाते हैं।

