*किरंदुल में बड़ा सवाल: पूरे देश में महिलाओं को आरक्षण, SKMS में क्यों शून्य? क्या किरंदुल की स्थायी महिला कर्मचारी यूनियन चुनाव लड़ने लायक नहीं?*
किरंदुल में इन दिनों त्योहारों के मौसम में चुनावी सरगर्मी छाई हुई है। यहां दो महत्वपूर्ण चुनाव एक साथ चल रहे हैं। पहला,बैलाडीला ट्रक ऑनर असोसिएशन किरंदुल दूसरा श्रमिक संगठन एसकेएमएस का हाओ पहला चुनाव जो पूरे दंतेवाड़ा जिले के ट्रक मालिकों से जुड़ा है। दोनों चुनाव अपने-अपने क्षेत्र में काफी महत्व रखते हैं।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक मुद्दा जोर पकड़ रहा है— चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण की अनुपस्थिति। सवाल साफ है: पूरे देश में तमाम चुनावों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जा रही हैं, फिर एसकेएमएस में महिलाओं के लिए कोई आरक्षण क्यों नहीं? क्या किरंदुल परियोजना में कार्यरत एनएमडीसी की स्थायी महिला कर्मचारियों में कोई भी योग्य उम्मीदवार नहीं है जो यूनियन के किसी पद पर चुनाव लड़कर कर्मचारियों के हितों के लिए काम कर सके?
देशभर में महिलाओं को चुनावी प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जा रही है। इसके उलट किरंदुल की दो प्रमुख यूनियनें—आईएनटीयूसी और एसकेएमएस—दोनों में किसी भी महिला प्रत्याशी के लिए पद आरक्षित नहीं हैं। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। क्या श्रम संगठनों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं महसूस की जा रही? या फिर स्थानीय स्तर पर महिलाओं को आगे बढ़ाने के प्रयासों में कमी है?
यह मुद्दा सिर्फ आरक्षण का नहीं, बल्कि यूनियन नेतृत्व में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और कर्मचारियों के हितों को व्यापक प्रतिनिधित्व देने का भी है। किरंदुल के चुनावी माहौल में यह सवाल अब और अधिक चर्चा में आने लगा है।
