*इस बार क्या होगा – ग्रहण या जनहित? 9 सितंबर 2026 तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सवाल यह है कि 17 सितम्बर विस्वकर्मा पूजा पर एनएमडीसी इस बार फिर सुरक्षा का हवाला देकर सौंदर्य दर्शन पर पाबंदी लगाएगा या नियंत्रित अनुमति देकर जनहित और स्थानीय अर्थव्यवस्था का ध्यान रखेगा।*
दंतेवाड़ा/किरंदुल-बचेली: 17 सितंबर विश्वकर्मा पूजा के दिन बैलाडीला की पहाड़ियों और एनएमडीसी खदान क्षेत्रों में आमजन व पर्यटकों के प्रवेश को लेकर फिर अनिश्चितता बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों की तरह सुरक्षा का हवाला देकर प्रतिबंध लगाया जाएगा या जनहित में राहत दी जाएगी, यह सवाल स्थानीय व्यापारियों, पर्यटकों और निवासियों के बीच चर्चा का विषय है।
परंपरा और आकर्षण
हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर बैलाडीला की खूबसूरत वादियां, एशिया के उत्तम लौह अयस्क खदानों वाले क्षेत्र (किरंदुल और बचेली परियोजनाएं) और विशाल मशीनरी देखने के लिए छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से हजारों-लाखों पर्यटक पहुंचते थे। यह दिन मेले जैसा माहौल बना देता था। विश्वकर्मा पूजा एक बहाना था, असल आकर्षण प्राकृतिक सौंदर्य और खनन गतिविधियों का नजारा था, जिसे लोग यादों में संजोना चाहते थे।
एनएमडीसी कर्मचारियों द्वारा विभिन्न विभागों में खिचड़ी, खीर-पूरी, पुलाव जैसे प्रसाद का बड़े पैमाने पर वितरण भी होता था। स्थानीय व्यापारियों, होटल-लॉज संचालकों और टैक्सी वालों को इस दिन अच्छा कारोबार मिलता था।
पिछले वर्षों का अनुभव (खासकर 2025)
2025 में एनएमडीसी प्रबंधन ने सुरक्षा कारणों (अत्यधिक बारिश, भूस्खलन की आशंका, खतरनाक सर्पिल रास्ते और खनन क्षेत्र की संवेदनशीलता) का हवाला देते हुए खदान क्षेत्रों (निक्षेप 5, 10-11ए, माइन्स 14, 11सी/बी आदि) और पहाड़ी मार्गों पर आम नागरिकों व पर्यटकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। केवल कर्मचारियों को मशीन-औजार पूजा के लिए अनुमति थी।
इससे दूर-दराज़ से आए पर्यटक निराश हुए। स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हुआ। प्रसाद भी कई जगह बेकार गया। स्थानीय मांग के बाद कुछ जगहों (जैसे बचेली) पर शाम 4 बजे तक आम जनता/निवासियों के लिए आंशिक अनुमति दी गई, लेकिन पर्यटकों के लिए राहत अधूरी रही। इससे पहले भी पिछले 2-3 वर्षों में इसी तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं, जिससे “खूबसूरती पर ग्रहण” जैसी शिकायतें उठीं।
इस बार (2026) की स्थिति
9 सितंबर 2026 तक सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है कि 17 सितंबर को प्रवेश खुला रहेगा या बंद। पिछले वर्षों में ऐसे आदेश 11-12 सितंबर के आसपास जारी होते रहे हैं। मौसम, सुरक्षा आकलन और स्थानीय मांगों पर निर्भर करेगा कि एनएमडीसी प्रबंधन जनहित में राहत देता है या फिर सुरक्षा प्राथमिकता रखते हुए प्रतिबंध जारी रखता है।
दोनों पक्ष:
सुरक्षा पक्ष: खदान क्षेत्र संवेदनशील है। भारी मशीनरी, सर्पिल खतरनाक रास्ते, बारिश के मौसम में भूस्खलन का जोखिम और बड़ी भीड़ से किसी अप्रिय घटना की आशंका प्रबंधन को प्रतिबंध लगाने के लिए प्रेरित करती है।
जनहित और आर्थिक पक्ष: साल में एक दिन की यह परंपरा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। पूर्ण पाबंदी से पर्यटक निराश होते हैं, व्यापारियों को नुकसान होता है और प्रसाद वितरण का उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है। स्थानीय निवासियों को कम से कम सीमित समय के लिए अनुमति देने की मांग पहले भी उठी है।
आगे की उम्मीद
स्थानीय नागरिक, व्यापारी संगठन और प्रशासन से अनुरोध किया जा रहा है कि एनएमडीसी प्रबंधन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए (सीआईएसएफ तैनाती, समय सीमा, वाहन नियंत्रण आदि) आंशिक या नियंत्रित प्रवेश की अनुमति दे। इससे प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद भी मिल सकेगा और आर्थिक नुकसान भी कम होगा।
अभी तक कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं हुआ है। 17 सितंबर नजदीक है, इसलिए आने वाले दिनों में एनएमडीसी किरंदुल/बचेली कॉम्प्लेक्स या जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक सूचना की उम्मीद है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सलाह है कि आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
(यह विश्लेषण पिछले वर्षों की घटनाओं, स्थानीय रिपोर्ट्स और वर्तमान उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक निर्णय आने पर स्थिति स्पष्ट होगी।)
