*पुस्तकालय के नाम पर पुराने पोस्ट ऑफिस भवन पर नियंत्रण बनाए रखने का खेल
10–15 पुस्तकों से पुस्तकालय! अस्थायी आवंटन के बावजूद भवन लंबे समय से उपयोग में, NMDC के आदेश ने खड़े किए बड़े सवाल
किरंदुल। किरंदुल बस स्टैंड के समीप स्थित पुराने पोस्ट ऑफिस भवन को लेकर स्थानीय नागरिकों और आसपास के ग्रामीणों में सवाल उठने लगे हैं। मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि NMDC ने 24 नवंबर 2024 के अपने आधिकारिक आदेश के माध्यम से इस भवन को केवल पुस्तकालय के संचालन एवं रखरखाव के लिए अस्थायी आधार पर आवंटित किया था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुस्तकालय के नाम पर गिनती की लगभग 10–15 पुस्तकें रखकर भवन को लंबे समय से अपने उपयोग में बनाए रखा गया है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में वहां नियमित एवं जनोपयोगी पुस्तकालय संचालित हो रहा है या पुस्तकालय के नाम पर भवन पर नियंत्रण बनाए रखने की स्थिति बनी हुई है।
NMDC के आदेश में शर्तें बिल्कुल स्पष्ट
NMDC के 24 नवंबर 2024 के पत्र में पुराने पोस्ट ऑफिस भवन के टाइप IIC/01 एवं IIC/02 को MMWU, किरंदुल के सचिव को पुस्तकालय के लिए अस्थायी रूप से आवंटित करने की बात कही गई है।
आदेश की शर्त क्रमांक 1 में स्पष्ट किया गया है कि भवन का उपयोग केवल पुस्तकालय के उद्देश्य से किया जाएगा। यदि परिसर का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है तो आवंटन रद्द कर भवन तत्काल NMDC प्रबंधन को सौंपना होगा।
शर्त क्रमांक 3 में कहा गया है कि यदि MMWU द्वारा पुस्तकालय का संचालन जारी नहीं रखा जाता है तो भवन खाली कर तत्काल प्रबंधन को सौंपना होगा।
वहीं शर्त क्रमांक 4 में NMDC ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रबंधन को भवन की आवश्यकता किसी अन्य उद्देश्य के लिए होती है तो आवंटन रद्द कर भवन खाली कराना होगा।
सबसे महत्वपूर्ण—आवंटन किसी भी समय वापस लिया जा सकता है
NMDC के आदेश की शर्त क्रमांक 7 इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बनाती है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रबंधन की आवश्यकता होने पर आवंटन किसी भी समय रद्द या वापस लिया जा सकता है।
साथ ही आदेश में यह भी स्पष्ट है कि यह आवंटन पूरी तरह अस्थायी है और इस संबंध में प्रोजेक्ट हेड, किरंदुल कॉम्प्लेक्स अंतिम निर्णय लेने वाले प्राधिकारी होंगे।
यानी भवन का आवंटन किसी स्थायी अधिकार के रूप में नहीं किया गया था।
सवाल—क्या 10–15 पुस्तकों से चल रहा है पुस्तकालय?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भवन वास्तव में पुस्तकालय के लिए आवंटित है तो वहां नियमित रूप से पुस्तकालय की गतिविधियां दिखाई देनी चाहिए।
NMDC को जांच करनी चाहिए कि—
भवन में कुल कितनी पुस्तकें उपलब्ध हैं?
नियमित रूप से कितने पाठक वहां आते हैं?
पुस्तकालय का निर्धारित समय क्या है?
क्या पाठकों का रजिस्टर संधारित किया जा रहा है?
पुस्तकालय संचालन का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है?
क्या भवन का पूरा उपयोग केवल पुस्तकालय के लिए ही हो रहा है?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
अस्थायी आवंटन को लंबे समय तक बनाए रखने पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्थायी आधार पर आवंटित भवन को निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप ही उपयोग किया जाना चाहिए। यदि पुस्तकालय का संचालन नाममात्र का है तो NMDC को इसकी वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।
लोगों का सवाल है कि क्या कुछ पुस्तकें रख देना ही पुस्तकालय संचालन की पर्याप्त शर्त है? यदि नहीं, तो NMDC द्वारा आवंटन की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही?
किरंदुल की जनता की मांग—पुराना पोस्ट ऑफिस वापस आए
किरंदुल नगर और आसपास के ग्रामीणों की मांग है कि पुराने पोस्ट ऑफिस भवन को व्यवस्थित कर डाक विभाग को उसके पुराने स्थान पर वापस लाया जाए, ताकि आम नागरिकों को डाक सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि NMDC को अपने पुराने भवन की आवश्यकता नहीं है और संबंधित विभाग को इसकी जरूरत है, तो जनहित में इस दिशा में पहल की जानी चाहिए।
NMDC के आदेश की शर्त क्रमांक 6 भी महत्वपूर्ण
आदेश की शर्त क्रमांक 6 में स्पष्ट किया गया है कि आवंटित परिसर को किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर या सबलेट नहीं किया जा सकता तथा आवंटितकर्ता अपनी ओर से परिसर में कोई परिवर्तन नहीं कर सकता।
इससे स्पष्ट है कि आवंटित संस्था को भवन के संबंध में असीमित अधिकार नहीं दिए गए हैं।
अब NMDC प्रबंधन की परीक्षा
पूरा मामला अब NMDC प्रबंधन, विशेषकर प्रोजेक्ट हेड किरंदुल कॉम्प्लेक्स, के निर्णय पर टिका है।
जब NMDC के अपने आदेश में स्पष्ट है कि—
“आवंटन पूरी तरह अस्थायी है”
और
“प्रबंधन आवश्यकता होने पर किसी भी समय आवंटन रद्द/वापस ले सकता है”
तो फिर पुराने पोस्ट ऑफिस भवन के वर्तमान उपयोग और पुस्तकालय संचालन की वास्तविक स्थिति की जांच होना जरूरी है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि NMDC तत्काल भवन का भौतिक निरीक्षण कराए, पुस्तकालय संचालन की वास्तविक स्थिति की जांच करे और यदि आवंटन की शर्तों का पालन नहीं हो रहा है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई करे।
इसके साथ ही जनता की मांग के अनुरूप पुराने पोस्ट ऑफिस भवन को डाक विभाग के उपयोग के लिए व्यवस्थित करने की दिशा में भी पहल की जाए।
जनता का सीधा सवाल—वास्तविक पुस्तकालय या सिर्फ भवन का उपयोग बनाए रखने की व्यवस्था?
किरंदुल की जनता पुस्तकालय के विरोध में नहीं है। सवाल केवल यह है कि जिस भवन को पुस्तकालय के लिए अस्थायी आधार पर दिया गया था, उसका उपयोग वास्तव में कितने व्यापक जनहित में हो रहा है।
यदि पुस्तकालय नियमित और प्रभावी रूप से संचालित हो रहा है तो रिकॉर्ड और निरीक्षण से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि पुस्तकालय केवल नाममात्र का है, तो NMDC के अपने आदेश की शर्तों के अनुसार आवंटन की समीक्षा करना और भवन के भविष्य के उपयोग पर निर्णय लेना प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
अब निगाहें NMDC प्रबंधन के अगले कदम पर हैं।


