*किरंदुल: फ्रीडम रेस में सड़क की भयावह हालत ने दौड़ को डर के साये में बदल दिया*

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*किरंदुल: फ्रीडम रेस में सड़क की भयावह हालत ने दौड़ को डर के साये में बदल दिया*

किरंदुल में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित दो अलग-अलग फ्रीडम रेस में सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया, लेकिन रेस ट्रैक की जर्जर और खतरनाक सड़क ने पूरे आयोजन को शर्मसार कर दिया। सड़क पर बने विशाल गड्ढे और कीचड़ भरे रास्ते ने धावकों के पैर तोड़ने का खतरा पैदा कर दिया था।

संयुक्त खदान मजदूर संघ ने 15 अगस्त को शाम 4 बजे फ्रीडम रेस का आयोजन किया, जबकि एनएमडीसी किरंदुल परियोजना ने 16 अगस्त को सुबह 7:30 बजे 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की रेस कराई। दोनों आयोजनों की व्यवस्था और विजेताओं के सम्मान की तारीफ हुई, लेकिन सड़क की हालत ने सबकी चिंता बढ़ा दी।

रेस जहां से शुरू हुई, वहीं समापन तक सड़क इतनी खराब थी कि बड़े-बड़े गड्ढे और कीचड़ से भरे रास्ते पर दौड़ना जान जोखिम में डालने जैसा लग रहा था। प्रतिभागियों में भयानक डर बना हुआ था कि कहीं किसी गड्ढे में पैर फंस जाए या गिरकर गंभीर चोट न लग जाए।

संयुक्त खदान मजदूर संघ की रेस में प्रथम आने वाले पुरुष और महिला विजेताओं ने एक स्वर में कहा कि “यहां की सड़क देखकर हमें अपने भविष्य की चिंता हो रही है। अगर इस सड़क की वजह से पैर में कुछ हो गया तो आगे का करियर क्या होगा?”

सैकड़ों धावकों ने जोखिम उठाकर रेस पूरी की, लेकिन स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की लापरवाही साफ झलक रही है। इतने बड़े आयोजन के बावजूद सड़क की मरम्मत न करवाना घोर उपेक्षा का प्रमाण है। किरंदुल जैसे औद्योगिक क्षेत्र में सड़कें इस हाल में हों तो आम नागरिकों की सुरक्षा कहां बची है?

दोनों आयोजनों में व्यवस्था अच्छी रही और विजेताओं का सम्मान भी हुआ, लेकिन सड़क की खतरनाक हालत ने पूरी रेस की चमक को फीका कर दिया। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस भयावह स्थिति पर ध्यान देगा या फिर लोगों की जान को यूं ही खतरे में डालता रहेगा?

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