*किरंदुल वार्ड 17 में स्वास्थ्य आपदा का खतरा: चिकन दुकानों का कचरा नाली में, नगरपालिका की अनदेखी*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 16 मई 2026 — छत्तीसगढ़ के किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 17 की कॉलोनी के बीचों-बीच बह रही नाली अब एक खुला शवघर और संक्रमण का केंद्र बन गई है। तीन चिकन की दुकानों के मालिक नियमित रूप से चिकन कचरा, खून, आंत और यहां तक कि मरी हुई मुर्गियों को सीधे इस नाली में फेंक रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने वीडियो में मरी हुई मुर्गियों को नाली के पानी में तैरते हुए कैद किया है, जो बेहद चिंताजनक है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस नाली से लगातार बदबू आ रही है और मक्खियां-मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मरी हुई मुर्गियों से निकलने वाले बैक्टीरिया और वायरस से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के अलावा अन्य संक्रामक रोग फैलने का खतरा मंडरा रहा है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति घातक साबित हो सकती है।
शिकायतों पर सन्नाटा
पीड़ित निवासियों ने नगरपालिका के सीएमओ (Chief Municipal Officer) को कई बार लिखित और मौखिक शिकायत की। स्थानीय पार्षद को भी बार-बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नाली की सफाई, दुकानदारों पर जुर्माना या उन्हें वैकल्पिक कचरा निपटान व्यवस्था अपनाने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया गया।
यह घटना स्वच्छ भारत मिशन और नगरपालिका के स्वास्थ्य व सफाई दायित्वों की सीधी उपेक्षा को दर्शाती है। किरंदुल नगरपालिका, जो दंतेवाड़ा जिले का हिस्सा है, अपने क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम नजर आ रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
पोल्ट्री कचरा (chicken waste) खुली नालियों में फेंकने से Salmonella, E. coli और अन्य पैथोजेंस तेजी से फैल सकते हैं। गर्मियों के मौसम में यह समस्या और विकराल हो जाती है। यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर बीमारी का प्रकोप देखने को मिल सकता है।
नागरिकों की मांग
नगरपालिका तुरंत नाली की सफाई कराए और नियमित डिसइन्फेक्शन कराए।
चिकन दुकानदारों को कचरा निपटान के लिए बायो-बिन या कलेक्शन सिस्टम अपनाने के निर्देश दिए जाएं।
दोषी दुकानदारों पर पर्यावरण प्रदूषण और पब्लिक हेल्थ एक्ट के तहत कार्रवाई हो।
पार्षद और सीएमओ जवाबदेह ठहराए जाएं।
नगरपालिका प्रशासन से सवाल:
क्या किरंदुल की जनता को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण का अधिकार नहीं है? शिकायतों के बावजूद लगातार अनदेखी क्यों? क्या मरी मुर्गियों का यह नजारा देखकर भी प्रशासन जागेगा?
स्थानीय निवासी अब उच्चाधिकारियों, जिला कलेक्टर और मीडिया के माध्यम से इस समस्या का समाधान चाहते हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला अदालत तक जा सकता है

