*किरंदुल के इतिहास में अनोखा ‘पति-पत्नी राज’! शैलेंद्र सिंह और रूबी सिंह की जोड़ी अब शहर को नया किरंदुल देगी या फिर पुरानी ठगी दोहराएगी?*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 28 मार्च 2026
किरंदुल के लिए आज खुशी की लहर दौड़ गई है! पहली बार जिले के इतिहास में पति-पत्नी दोनों सर्वोच्च पद पर काबिज हो गए हैं। पति शैलेंद्र सिंह दंतेवाड़ा विधायक प्रतिनिधि हैं तो पत्नी रूबी सिंह किरंदुल नगरपालिका अध्यक्ष बन चुकी हैं। अब सवाल पूरे शहर के मन में गूंज रहा है — क्या यह पति-पत्नी जोड़ी मिलकर किरंदुल को विकास की नई ऊंचाई देगी या फिर जनता एक बार फिर ठगी का शिकार होगी?
सबसे ज्वलंत और मुख्य मुद्दा — भूमि पट्टा!
किरंदुल के हजारों परिवार वर्षों से नजुल भूमि, वन भूमि और रेलवे भूमि पर बसे हुए हैं। हर कोई अपना भूमि स्वामी पट्टा मांग रहा है। नगरपालिका चुनाव के समय छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री केदार कश्यप ने साफ वादा किया था — “जो भी व्यक्ति नगरपालिका कर और बिजली बिल जमा करता है, चाहे नजुल हो, वन भूमि हो या रेलवे भूमि, सबको पट्टा मिलेगा!”
अब पूरा शहर पूछ रहा है — क्या शैलेंद्र सिंह और रूबी सिंह मिलकर यह वादा पूरा करेंगे? क्या हर परिवार को पट्टा मिल पाएगा या फिर यह भी चुनावी जुमला बनकर रह जाएगा? यह पट्टा का मुद्दा ही किरंदुल का सबसे बड़ा और सबसे गर्म मुद्दा है।
क्रमवार हर मुद्दा, हर सवाल — जनता इंतजार कर रही है:
लाल जहर (लौह अयस्क धूल) से मुक्ति — बाईपास कब?
रोजाना 500 से 1000 तक 10-चक्का, 12-चक्का, 14-चक्का भारी वाहन व 500 से अधिक हाइवा वाहन शहर के बीचों-बीच गुजरते हैं। पूरा शहर लाल धूल में डूबा रहता है। क्या पति-पत्नी मिलकर ट्रक बाईपास की मांग पूरी करेंगे?
ट्रांसपोर्ट नगर की वर्षों पुरानी मांग
(बी टी ओ ए )बैलाडीला ट्रक ओनर्स एसोसिएशन के पास 1500 से ज्यादा ट्रक और 500 से ज्यादा हाइवा हैं। पार्किंग की भारी समस्या है। क्या शैलेंद्र-रूबी जोड़ी ट्रांसपोर्ट नगर की सौगात देकर इतिहास रचेगी?
बाजार की रौनक लौटेगी?
समय के साथ किरंदुल का बाजार सिकुड़ता जा रहा है। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष (वर्तमान विधायक प्रतिनिधि) द्वारा बनवाया गांधीनगर हाट बाजार वर्षों से वीरान पड़ा है। क्या पति-पत्नी मिलकर बाजार को व्यवस्थित करेंगे और हाट बाजार में फिर से रौनक लौटाएंगे?
पेयजल संकट — रामाबूटी झरना सूख रहा है
अभी जल आपूर्ति रामाबूटी झरने से हो रही है, लेकिन स्रोत तेजी से कम होता जा रहा है। आने वाले दिनों में पेयजल का क्या होगा? क्या पति-पत्नी की जोड़ी भविष्य की पेयजल व्यवस्था का ठोस प्लान लेकर आएगी?
और भी कई छोटे-बड़े मुद्दे
सड़क, नाली, बिजली, सफाई, स्कूल-हॉस्पिटल जैसी रोजमर्रा की समस्याएं भी शहर को चिंता में डाले हुए हैं।
अब सवाल यह है…
क्या शैलेंद्र सिंह (विधायक प्रतिनिधि) और रूबी सिंह (नगरपालिका अध्यक्ष) मिलकर इन सभी मुद्दों को अपने सत्र में हल कर विकास की बाढ़ ला पाएंगे? या फिर किरंदुल की जनता इस बार भी पुरानी कहानी दोहराते हुए ठगी महसूस करेगी?
किरंदुल की जनता अब इंतजार कर रही है — वादों का अमल या फिर सिर्फ वादे?
पति-पत्नी की यह जोड़ी कितनी सफल साबित होगी, यह अगले कुछ महीनों में साफ हो जाएगा। पूरा शहर आंखें लगाए बैठा है।
किरंदुल अब देखना चाहता है — असली विकास या फिर सिर्फ एक और चुनावी नाटक!

