*किरंदुल नगरपालिका का अग्निशमन वाहन आपातकाल में फेल! टूटे-फूटे पाइप, बिना डीजल – ‘कुबेर नगरी’ के नागरिकों की जान पर मंडरा रहा खतरा*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 28 मार्च 2026 – छत्तीसगढ़ की खनिज समृद्ध ‘कुबेर नगरी’ किरंदुल नगरपालिका इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार गंभीर लापरवाही की वजह से। नगरपालिका का अग्निशमन वाहन (फायर टेंडर) ऐसी दयनीय स्थिति में पहुंच गया है कि आपातकाल में यह पूरी तरह बेकार साबित हो रहा है। न डीजल, न काम करने वाले प्रेशर पाइप – बस यही हाल है किरंदुल के एकमात्र सरकारी अग्निशमन वाहन का।
नगरपालिका के अग्निशमन वाहन में न तो डीजल भरा हुआ है और न ही आग बुझाने के लिए जरूरी प्रेशर पाइप ठीक हालत में हैं। जो पाइप लगे हुए हैं, वे वर्षों पुराने और पूरी तरह टूट-फूट चुके हैं। ऐसे में आग लगने पर वाहन को शुरू करना ही मुश्किल है, फिर आग पर काबू पाना तो दूर की बात।
किरंदुल की भौगोलिक स्थिति भी आग बुझाने की राह में बड़ी बाधा है। यहां कई संकरी गलियां ऐसी हैं जहां 100 से 200 मीटर, कहीं-कहीं तो 500 मीटर तक चार पहिया वाहन पहुंच ही नहीं पाते। केवल दो पहिया वाहन ही इन इलाकों तक जा सकते हैं। ऐसे में अगर किसी घर या बस्ती में आग लग गई तो अग्निशमन वाहन कितनी देर में पहुंच पाएगा, यह सोचकर ही स्थानीय निवासियों के मन में दहशत फैल गई है।
पिछले दो महीनों में किरंदुल में दो अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाएं हुईं। दोनों बार आग पर काबू पाने के लिए एनएमडीसी (National Mineral Development Corporation) के अग्निशमन वाहन को बुलाना पड़ा। इससे साफ संकेत मिलता है कि किरंदुल नगरपालिका अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एनएमडीसी के भरोसे बैठी हुई है।
नागरिकों में सवाल उठ रहे हैं – क्या नगरपालिका प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा है? अगर कोई बड़ी आग या आपातकालीन स्थिति आ गई तो क्या होगा? क्या तब भी एनएमडीसी का इंतजार करना पड़ेगा? खनिज समृद्ध क्षेत्र होने के कारण यहां आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में सरकारी अग्निशमन व्यवस्था का कमजोर होना पूरे इलाके के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
नगरपालिका प्रशासन से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि अग्निशमन वाहन को तुरंत ठीक किया जाए, नए पाइप और पर्याप्त डीजल की व्यवस्था की जाए तथा संकरी गलियों के लिए छोटे, हल्के अग्निशमन वाहनों का प्रबंध किया जाए।
किरंदुल की यह खबर एक बार फिर साबित करती है कि विकास के नाम पर बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस ‘पोल खोल’ खबर पर एक्शन लेता है और नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

