*किरंदुल की ‘कुबेर’ नगरपालिका की नाकामी उजागर: CAF कैंप के पास जंगल में भीषण आग, डीजल न होने से अग्निशमन वाहन 25-35 मिनट लेट; पुलिस अधिकारी संजय यादव और NMDC-CISF की त्वरित कार्रवाई ने बचाई स्थिति*

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*किरंदुल की ‘कुबेर’ नगरपालिका की नाकामी उजागर: CAF कैंप के पास जंगल में भीषण आग, डीजल न होने से अग्निशमन वाहन 25-35 मिनट लेट; पुलिस अधिकारी संजय यादव और NMDC-CISF की त्वरित कार्रवाई ने बचाई स्थिति*

दंतेवाड़ा, 27 मार्च 2026 – छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कुंवाकोंडा ब्लॉक की हीरोली ग्रामपंचायत के दोकापारा में स्थित CAF कैंप के पास घने जंगलों में आज प्रथम प्रहर में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरा जंगल देखते-ही-देखते राख का ढेर बन गया। पहाड़ी पर बसे CAF कैंप के बैरकों के चारों ओर आग की लपटें दिखाई देने लगीं, जिससे जवानों की जान-माल को खतरा पैदा हो गया।

लेकिन इस आपातकालीन स्थिति में किरंदुल की कुबेर नगरपालिका की तैयारियों की पोल खुल गई। जब  किरंदुल नगरपालिका को अग्निशमन वाहन भेजने के लिए सूचित किया, तो पता चला कि वाहन में आपात स्थिति के लिए डीजल तक नहीं भरा हुआ था! छत्तीसगढ़ की इस ‘कुबेर’ नगरपालिका (जिसे धन-दौलत से भरपूर माना जाता है) की इस लापरवाही ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।

पुलिस की सतर्कता और NMDC-CISF की फुर्ती ने संभाली कमान

जैसे ही CAF कैंप से आग की सूचना मिली, किरंदुल थाना प्रभारी संजय यादव ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने सबसे पहले एनएमडीसी किरंदुल परियोजना के CISF को सूचित किया। एनएमडीसी की अग्निशमन टीम ने बिना किसी देरी के हीरोली-दोकापारा के लिए रवाना होकर घटनास्थल पर पहुंचकर जंगल की आग पर पानी की बौछार कर दी।

इसके बाद नगरपालिका का अग्निशमन वाहन 25 से 35 मिनट की देरी से पहुंचा और दूसरी ओर से आग पर काबू पाया। थाना प्रभारी संजय यादव खुद अपने दल-बल के साथ CAF कैंप पहुंचे। उन्होंने जंगलों में लगी आग बुझाने में सीधे सहयोग किया और यह सुनिश्चित किया कि आग कैंप तक न पहुंचे तथा जवानों को कोई नुकसान न हो।

CAF कैंप की भौगोलिक चुनौती

दोकापारा CAF कैंप पहाड़ की चोटी पर करीब 2 से 3 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां वाहनों के लिए कोई ठोस मार्ग नहीं है, जिसके कारण आग को पूरी तरह बुझाना मुश्किल था। फिर भी पुलिस, एनएमडीसी और CISF की संयुक्त त्वरित कार्रवाई से कैंप को बचाया गया।

नगरपालिका पर सवाल

कहा जाता है कि किरंदुल को छत्तीसगढ़ की ‘कुबेर नगरपालिका’ कहा जाता है, लेकिन आज की घटना ने साबित कर दिया कि आपातकालीन स्थिति में इसकी तैयारियां कितनी खोखली हैं। डीजल न होने जैसी बुनियादी लापरवाही ने पूरे इलाके को जोखिम में डाल दिया। स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं – क्या नगरपालिका पर भरोसा किया जा सकता है? क्या आपात स्थिति में हम सिर्फ पुलिस और निजी कंपनियों (जैसे NMDC) पर निर्भर रहें?

घटना का सबक

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सतर्क प्रशासनिक अधिकारी और उद्योगों की जिम्मेदारी ही आपातकाल में असली बचाव बनते हैं। थाना प्रभारी संजय यादव की तत्परता, एनएमडीसी-CISF की फुर्ती और उनकी टीम वर्क ने CAF कैंप को बड़े नुकसान से बचा लिया। वहीं कुबेर नगरपालिका किरंदुल की इस लापरवाही ने स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय प्रशासन से अपील है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर अग्निशमन सेवाओं को मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में कोई देरी न हो।

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