*किरंदुल की ‘कुबेर नगरी’ में सरकारी स्कूल की शर्मनाक हालत: NMDC-नवरत्न और AM/NS गोद लिए स्कूल में 24 बच्चों को खुले मैदान में शौच, ना दीवार, ना क्लासरूम!*
दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 18 मार्च 2026 – जहां लोहे की खदानें दिन-रात सोना उगल रही हैं, वहीं महज 200 मीटर दूर AM/NS इंडिया के दफ्तर और 500 मीटर दूर किरंदुल नगरपालिका कार्यालय से एक सरकारी स्कूल बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। शासकीय माध्यमिक विद्यालय, किरंदुल नगरपालिका वार्ड क्र. 18 में आज भी 24 मासूम बच्चे बिना शौचालय, बिना बॉउंड्री वॉल और बिना अतिरिक्त कक्ष के पढ़ रहे हैं। कहने को यह स्कूल “AM/NS द्वारा गोद लिया गया” है और NMDC किरंदुल परियोजना के ठीक बीच में है, फिर भी हालत इतनी बदतर कि बच्चे पढ़ाई के दौरान खुले मैदान में शौच के लिए मजबूर हैं।
स्कूल में कुल 24 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। एक-दो क्लासरूम में सबको ठूंस-ठूंस कर बैठना पड़ता है। अतिरिक्त कक्ष न होने से एक क्लास खत्म होते ही दूसरी शुरू नहीं हो पाती। शिक्षक मजबूरन समय बर्बाद करते हैं। सबसे शर्मनाक – शौचालय की कोई सुविधा नहीं। लड़के-लड़कियां दोनों को जंगल-जैसी खुली जगह पर जाना पड़ता है। बॉउंड्री वॉल न होने से जानवर घुसते हैं, चोरी-छुपे का डर रहता है और सुरक्षा का नामोनिशान नहीं।
कुबेर नगरी में भीख मांगता स्कूल
किरंदुल को छत्तीसगढ़ की ‘कुबेर नगरी’ कहा जाता है। NMDC की किरंदुल आयरन ओर प्रोजेक्ट से हर साल हजारों करोड़ का राजस्व आता है। AM/NS इंडिया ने इसे CSR के तहत गोद लिया था। दावा किया जाता है कि वे स्कूल सुधारने के लिए पैसे और संसाधन दे रहे हैं। लेकिन हकीकत देखिए – स्कूल AM/NS दफ्तर से सिर्फ 200 मीटर और नगरपालिका से 500 मीटर दूर है। फिर भी कोई नहीं पूछता। न NMDC, न AM/NS, न नगरपालिका, न जिला प्रशासन।
स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे बच्चे खदान के मालिकों की छाया में पढ़ रहे हैं, लेकिन शौचालय तक नहीं मिल रहा। NMDC और AM/NS करोड़ों खर्च करते हैं प्रचार पर, लेकिन स्कूल में एक टॉयलेट भी नहीं बनवा सकते?”
शिक्षा विभाग और CSR की दोहरी नीति
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र की नवरत्न कंपनी NMDC लगातार दावा करती है कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। PM SHRI स्कूल, समग्र शिक्षा अभियान, CSR फंड – सबके नाम हैं। लेकिन किरंदुल वार्ड 18 का यह स्कूल इन सब योजनाओं से अछूता है। AM/NS का “गोद लिया स्कूल” प्रोजेक्ट कागजों पर तो चमक रहा है, जमीन पर सन्नाटा।
यह मामला सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के खनन क्षेत्रों में CSR और सरकारी उपेक्षा का जीवंत उदाहरण है। जहां खदानें चल रही हैं, वहीं स्कूल बिना बुनियादी सुविधाओं के चल रहे हैं। बच्चे जो कल खदान मजदूर बन सकते हैं, आज ही उनके भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।
अब सवाल यह है – कुबेर नगरी किरंदुल में सोना उगलने वाली कंपनियां और प्रशासन कब तक इन 24 मासूमों की जिंदगी को खुले मैदान और टूटी दीवारों के बीच छोड़ेंगे? क्या NMDC और AM/NS का CSR सिर्फ फोटो-ओप और प्रेस रिलीज तक सीमित है? या फिर इन बच्चों को भी एक शौचालय, एक दीवार और दो अतिरिक्त कक्ष मिल पाएंगे?
यह खबर उन सभी के लिए आईना है जो “आदिवासी विकास”, “CSR” और “शिक्षा क्रांति” के बड़े-बड़े दावे करते हैं। अब समय है जवाब देने का।

