*गीदम के गुंडाधुर चौक में भूमकाल स्मृति दिवस व मुरियाराज स्थापना दिवस मनाया गया ।*
बस्तर महान भूमकाल स्मृति दिवस की 116 वीं वर्षगांठ के अवसर पर गीदम के गुंडाधुर चौक में अमर शहीद वीर गुंडाधुर व भूमकाल में शहीद हुए सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देकर उनके बलिदानों को याद किया गया 7 फरवरी मुरियाराज स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है इस दिन आदिवासी क्रांतिकारी नेता वीर गुंडाघुर ने गीदम में मुरियाराज की स्थापना की थी। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज एवं जिला धुरवा समाज व विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया गया। इस कार्यक्रम में मूल बस्तरिया समाज सहित मुरिया, धुरवा ,कलार, राऊत, माडिया,हलबा ,धाकड़, माहरा, गोंड़, कोया ,भतरा,घसिया,कुम्हार ,सोनार, लोहरा,परजा,गदबा ,पनारा, समेत ,विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि समाज प्रमुख एवं युवा व बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रही। वक्ताओं ने वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह में अमर शहीद वीर गुंडाधुर व शहीद हुए 52 क्रान्तिकारी वीरों के संघर्ष साहस और बलिदान को याद करते हुए नई पीढ़ी को उनके आदर्शों पर चलने तथा जल जंगल जमीन की रक्षा के संकल्प को आगे बढ़ने का आह्वान किया । इस अवसर पर धुरवा समाज अध्यक्ष जयराम कश्यप, महेश स्वर्ण, संजय पंत ,मनकू लेकामी मंगलू कड़ती ,बोगाराम ताती ,गणेश यादव ,संतोष सेठिया ,कुरसोराम मौर्य,संतोष नायर ,पुरुषोत्तम दुर्गा ,हनुमान जोशी ,रमेश भास्कर, बोमडा़राम भास्कर, भीम आर्मी के उपाध्यक्ष राजकुमार जांगड़े एवं प्रतिनिधि मंडल सहित विभिन्न समाजों के प्रमुख जन मौजूद रहे साथ ही संतोष साहू साहू समाज के सदस्य तथा राजमनी यादव, सावरी ,लक्ष्मी रूघनी कश्यप समेत बड़ी संख्या में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही । कार्यक्रम के माध्यम से बस्तर के गौरवशाली इतिहास समृद्ध संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए समाज में एकता जागरूकता और स्वाभिमान का संदेश दिया गया।

