*बचेली शराब घोटाला: अब मास्टरमाइंड का नाम खुला – दंतेवाड़ा आबकारी उपनिरीक्षक शर्मा ही हैं पूरे खेल के सूत्रधार!*

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ब्रेकिंग | सी-जी संविधान न्यूज़ एक्सक्लूसिव

*बचेली शराब घोटाला: अब मास्टरमाइंड का नाम खुला – दंतेवाड़ा आबकारी उपनिरीक्षक शर्मा ही हैं पूरे खेल के सूत्रधार!*

*चार नहीं, पूरे जिले की चार सरकारी शराब दुकानों पर था इनका एकछत्र राज; अब गीदम-दंतेवाड़ा से भी जुड़ने लगे घोटाले के तार*

दंतेवाड़ा/बचेली, 27 नवंबर 2025

जो घोटाला पहले “चार सेल्समैन की छोटी-मोटी चोरी” बता कर दबाया जा रहा था, उसका असली चेहरा आखिरकार सामने आ गया है।

सी-जी संविधान न्यूज़ को विश्वसनीय सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार बचेली के 1 करोड़ 61 लाख रुपये के QR कोड घोटाले का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि दंतेवाड़ा जिले के आबकारी उपनिरीक्षक शर्मा खुद हैं।

हाँ, वही शर्मा, जिनकी जिम्मेदारी थी जिले की चारों सरकारी शराब दुकानों (बचेली, किरंदुल, गीदम और दंतेवाड़ा शहर) की निगरानी करना।

और अब यही शर्मा थाना बचेली में आरोपी नंबर-1 बन चुके हैं। पुलिस ने उपनिरीक्षक शर्मा सहित कुल 5 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर ली है।

सूत्रों ने जो खुलासा किया, उससे रीढ़ की हड्डी तक कंपकंपी छूट जाएगी:

बचेली में जो QR कोड वाला खेल चला, ठीक वही सिस्टम गीदम और दंतेवाड़ा शहर की सरकारी शराब दुकानों में भी पिछले कई सालों से चलने की जानकरी मिल रही है।

हर दुकान पर अलग-अलग निजी QR कोड लगवाए गए थे, जिनका पैसा सीधा शर्मा और उनके चुने हुए लोगों के खातों में जाता था।

सेल्समैन और कैशियर सिर्फ मोहरे थे – असली रिमोट कंट्रोल शर्मा के हाथ में था।

सूत्रों का दावा है कि शर्मा पिछले 6-7 साल से दंतेवाड़ा जिले में जमे हुए हैं और हर तबादले को “पैसे देकर” रुकवाते रहे हैं।

अब हिसाब लगाइए खुद:

चारों दुकानों की औसत दैनिक बिक्री: 32-35 लाख रुपये (सरकारी आंकड़े)

महीने में: करीब 10 से 11 करोड़ रुपये

पिछले 3 साल में सिर्फ इन चार दुकानों से कुल बिक्री: 350-400 करोड़ रुपये के करीब

अगर सिर्फ 8-10% भी निजी जेब में गया हो, तो भी 30-40 करोड़ रुपये से कम नहीं

और अभी तो सिर्फ बचेली का 1.61 करोड़ का घोटाला ही पकड़ा गया है। गीदम दंतेवाड़ा लूट की तो कोई ऑडिट ही नहीं होती!

सवाल सरकार से – अब भी लीपापोती होगी?

जब पूरा खेल उपनिरीक्षक शर्मा चला रहे थे, तो जिला आबकारी अधिकारी, सहायक आबकारी आयुक्त, उप आयुक्त – सब सो क्यों रहे थे?

*क्या शर्मा अकेले इतने ताकतवर थे या ऊपर तक “हिस्सेदारी” तय थी?*

*क्या फिर वही पुराना खेल होगा – दो-चार सेल्समैन और कैशियर को बली का बकरा बनाकर मुख्य सूत्रधार को क्लीन चिट दे दी जाएगी?*

पूर्व आबकारी मंत्री के करीबियों की जेल यात्रा के बाद भी सबक क्यों नहीं लिया गया?

जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर

नक्सल प्रभावित बस्तर में लोग कह रहे हैं,

“नक्सली बंदूक से लूटते हैं, ये अफसर कलम और QR कोड से लूटते हैं।

हमारी मेहनत की कमाई से बनने वाली सड़कें, स्कूल, अस्पताल – सब इनकी दुबई यात्रा और बंगलों में खर्च हो रहे हैं।”

सी-जी संविधान न्यूज़ लगातार इस घोटाले पर नजर बनाए हुए है।

अब देखना यह है कि सरकार इस बार सिर्फ एक उपनिरीक्षक को बलि देकर कहानी खत्म कर देगी,

या सचमुच पूरे सिस्टम की सर्जरी करेगी।

पर इतना तय है – जब तक शर्मा जैसे “खाकी वाले शराब माफिया” सलाखों के पीछे नहीं जाएंगे,

तब तक छत्तीसगढ़ की हर सरकारी शराब दुकान एक “लाइसेंसी लूटेरा ठिकाना” ही बनी रहेगी।

जारी… बहुत कुछ बाकी है।

(रिपोर्ट: सी-जी संविधान न्यूज़ जांच टीम)

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