*एनएमडीसी का 68वां स्थापना दिवस: श्रम, नेतृत्व और तकनीक का गौरवपूर्ण उत्सव, इंटक यूनियन ने दी बधाई*
हैदराबाद, 17 नवंबर 2025: भारत की प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड ने 15 नवंबर को अपना 68वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। मुख्यालय में आयोजित भव्य समारोह में पद्मश्री कैलाश खेर की मधुर प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कंपनी के सीएमडी अमिताभ मुखर्जी ने विभिन्न परियोजनाओं से चयनित अधिकारियों और कर्मचारियों को सीएमडी अवार्ड्स से सम्मानित किया, जिसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना की खदानों व संयंत्रों की उपलब्धियां सराही गईं।
मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन (इंटक) किरंदुल के अध्यक्ष विनोद कश्यप और सचिव ए.के. सिंह ने एनएमडीसी परिवार को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने श्रमिकों के समर्पण को कंपनी की असली ताकत बताया और कहा कि एनएमडीसी हितार्थ तथा श्रमिक हितार्थ कार्यरत यूनियन आगे भी मजबूती से योगदान देगी।
*बैलाडीला से नगरनार तक: संघर्ष की गाथा से सफलता की मिसाल*
एनएमडीसी की यात्रा 1962-64 में बैलाडीला (बस्तर, छत्तीसगढ़) से शुरू हुई, जब फाउंडर टीम ने तंबुओं में रहकर, लाल पानी को फिल्टर कर पीते हुए कठिनाइयों का सामना किया। आज बैलाडीला दुनिया की सर्वश्रेष्ठ लौह अयस्क खदानों में शुमार है। कंपनी की डायमंड माइन (पन्ना, मध्य प्रदेश) एशिया की सबसे उन्नत खदान है, जबकि नगरनार स्टील प्लांट (बस्तर) आधुनिक इस्पात उत्पादन का प्रतीक बनकर भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है।
श्रमिकों को कंपनी की रीढ़ बताते हुए यूनियन ने जोर दिया कि कठोर मौसम और जोखिमों के बीच उनकी मेहनत ने एनएमडीसी को सार्वजनिक क्षेत्र की चमकती मिसाल बनाया। सीएमडी अमिताभ मुखर्जी के कुशल नेतृत्व में उत्पादन, तकनीक और प्रबंधन नए शिखर छू रहे हैं।
*श्रम-प्रबंधन समन्वय: प्रगति की कुंजी*
आल इंडिया एनएमडीसी वर्कर्स फेडरेशन और सभी श्रम संगठनों का योगदान सराहनीय रहा। शॉप काउंसिल से लेकर बाइपार्टाइट व ट्राइपार्टाइट मंचों तक का सहयोग साइकिल के दो पहियों की तरह कंपनी को आगे बढ़ा रहा है। स्थायी और ठेका श्रमिकों के हित में कई ऐतिहासिक फैसले इसी समन्वय से संभव हुए।
*सीएसआर में अग्रणी भूमिका*
खनन के साथ एनएमडीसी शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर में सक्रिय है। जगदलपुर मेडिकल कॉलेज और गीदम एजुकेशन हब जैसी परियोजनाएं राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं। किरंदुल, बचेली, दोणामलाई, पन्ना और नगरनार परियोजनाएं कंपनी को वैश्विक स्तर पर मजबूत बना रही हैं।
*नवरत्न से महारत्न की ओर*
68 वर्षों की उपलब्धियां, अनुभव, तकनीक और समर्पण एनएमडीसी को महारत्न status की दहलीज पर ले जा रही हैं। यूनियन ने सीएमडी, निदेशक मंडल, फेडरेशन, अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों और उनके परिवारों को पुनः शुभकामनाएं दीं।
जय मजदूर – जय एनएमडीसी – जय हिंद!

