*बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ चुनाव: ‘शेर’ की दहाड़ से गूंजा मैदान, बिना पैनल के अकेले प्रत्याशी लेखराज शर्मा ने छेड़ा ऐतिहासिक महासंग्राम!*
किरंदुल/बैलाडीला, 28 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के लौह क्षेत्र बैलाडीला में व्यपारी कल्याण संघ का चुनावी तड़का लग चुका है। पूरा बाजार चुनावी रंग में रंग गया है, जहां अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवारों ने पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन इस चुनावी महासंग्राम का असली हीरो उभर रहा है युवा दमदार प्रत्याशी लेखराज शर्मा – वो शेर जो बिना किसी पैनल के अकेले ही मैदान में उतरकर युवाओं के जोश और व्यापारियों के समर्थन से तहलका मचा रहा है। उनका चुनाव चिन्ह ‘शेर’ तो अपने आप में ताकत का प्रतीक है, जो संघ के भविष्य को नई दहाड़ देने का वादा कर रहा है।
यह चुनाव सिर्फ पदाधिकारियों का चयन नहीं, बल्कि बैलाडीला के हजारों व्यापारियों के कल्याण का सवाल है। संघ, जो क्षेत्र के छोटे-बड़े व्यापारियों की आवाज बन चुका है, अब एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो चुनौतियों से लड़ सके – चाहे वो बढ़ती महंगाई हो, सरकारी नीतियों का बोझ हो या बाजार में प्रतिस्पर्धा का दबाव। ऐसे में लेखराज शर्मा का अकेले उतरना एक मिसाल है। बिना किसी पैनल के समर्थन के वे युवाओं की नब्ज पकड़ चुके हैं। “शेर अकेला ही काफी होता है जंगल को हिलाने के लिए,” यही उनका नारा है, और देखते ही देखते पूरा बाजार इस दहाड़ से गूंज रहा है।
बिना पैनल का दांव: रणनीति या साहस?
चुनावी जानकारों का मानना है कि पैनल सिस्टम में अक्सर गुटबाजी हावी हो जाती है, जहां पदाधिकारी आपस में ही उलझ जाते हैं। लेकिन शर्मा ने इस बार उल्टा चाल चली है। बिना पैनल के उतरकर उन्होंने साफ संदेश दिया – “यह चुनाव व्यक्तिगत ताकत और व्यापारियों के हित का है, न कि गुटों का।” उनका यह दांव कामयाब साबित हो रहा है। युवा व्यापारी, जो संघ के भविष्य को लेकर चिंतित थे, अब शर्मा के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया, “लेखराज भाई का जोश देखकर लगता है जैसे शेर मैदान में घुसा हो। वे अकेले हैं, लेकिन हम सब उनके साथ हैं।”
शर्मा का प्रचार जोरो-शोरों पर है। सुबह से शाम तक वे बाजार घूम रहे हैं – छोटे स्टॉल वालों से लेकर बड़े ट्रेडर्स तक। उनका मुख्य वादा साफ है: “व्यापारियों के लिए सस्ता लोन, बाजार सुरक्षा और डिजिटल मार्केटिंग का नेटवर्क।” युवाओं के समर्थन ने उन्हें और मजबूत कर दिया है। 30 साल से कम उम्र के 70% समर्थक शर्मा के पीछे हैं, जो संघ को नई ऊर्जा दे सकते हैं। “शेर का चिन्ह ही काफी है – ताकत, साहस और नेतृत्व का प्रतीक। हमारा संघ अब कमजोर नहीं, शेर बनेगा!” – शर्मा ने एक सभा में चुटकी लेते हुए कहा।
ऐतिहासिक चुनाव का रंग: धमाकेदार प्रचार और उम्मीदों की लहर
यह चुनाव बैलाडीला के इतिहास में ऐतिहासिक माना जा रहा है। पिछले चुनावों में पैनलों की जंग ने संघ को कमजोर किया था, लेकिन इस बार शर्मा की अकेली उम्मीदवारी ने सबको चौंका दिया है। प्रचार के मैदान में अन्य प्रत्याशी भी पूरी ताकत से उतर आए हैं, लेकिन शर्मा का ‘शेर’ चिन्ह बाजार की दीवारों पर चिपक गया है। रैलियां, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पर उनका अभियान धमाकेदार है। एक अनुमान के मुताबिक, उनके प्रचार में 50% से ज्यादा युवा स्वयंसेवक हैं, जो दरवाजा-दरवाजा जाकर समर्थन मांग रहे हैं।
“यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि व्यापारियों का पुनरुत्थान है। बिना पैनल के लड़ना साहस की बात है, और शर्मा में वो जोश दिख रहा है जो संघ को नई दिशा देगा,” कहते हैं संघ के वरिष्ठ सदस्य रामेश्वर । लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं। अन्य उम्मीदवार पैनलों के साथ मजबूत हैं, और वोटों का बंटवारा तय करेगा किस्मत। फिर भी, शर्मा का आत्मविश्वास देखने लायक है – “शेर कभी झुकेगा नहीं, सिर्फ दहाड़ेगा!”
चुनाव की तारीख 3 नवम्बर नजदीक आ रही है, और बैलाडीला का बाजार ‘शेर की दहाड़’ से गूंज रहा है। क्या लेखराज शर्मा बिना पैनल के इतिहास रच पाएंगे? जवाब तो वोटों में छिपा है, लेकिन उनका जोश तो साफ बता रहा है – यह महासंग्राम यादगार बनेगा। व्यापारी भाइयों, अपनी आवाज चुनें, क्योंकि शेर का साथ ही बाजार की ताकत बनेगा!

