*किरंदुल नगरपालिका का दोहरा रवैया: गरीब ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं पर कार्रवाई, मेन रोड के अवैध अतिक्रमण पर चुप्पी*
किरंदुल नगरपालिका परिषद (दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़) द्वारा 28 जुलाई 2025 को जारी नोटिस (क्रमांक 653/राजस्व/न.पा.परि./किरंदुल) ने स्थानीय ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। नोटिस में चार सब्जी विक्रेताओं को सड़कों पर अवैध अतिक्रमण हटाने और वार्ड क्रमांक 08 के मुख्य बाजार में दुकानें लगाने का आदेश दिया गया है। लेकिन इन विक्रेताओं का दावा है कि उनकी दुकानें मेन रोड पर नहीं हैं और न ही वे यातायात में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न करती हैं। इसके उलट, मेन रोड पर बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण को नजरअंदाज कर नगरपालिका गरीब ग्रामीणों को निशाना बना रही है, जिससे प्रशासन पर निजी लाभ के लिए पक्षपात का गंभीर आरोप लग रहा है।
*ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं की स्थिति:*
नोटिस प्राप्त करने वाले चार सब्जी विक्रेता निम्नलिखित स्थानों पर अपनी दुकानें लगाते हैं:
डीएवी स्कूल के सामने बस स्टॉप के नीचे: रोड से हटकर साइड में, जहां यातायात प्रभावित नहीं होता।
टाइप 3, शीतला माता मंदिर के सामने: मेन रोड से 8 फीट अंदर, जहां कोई वाहन आवागमन नहीं करता। इस स्थान पर एक महिला सब्जी विक्रेता, जो ग्राम पेंटा (किरंदुल से 22 किमी दूर) से आती है, अपने दो बच्चों के साथ स्वरोजगार के जरिए परिवार का भरण-पोषण करती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वरोजगार योजना के तहत आत्मनिर्भरता का उदाहरण है।
नगरपालिका कार्यालय से 200 मीटर दूर: फुटपाथ पर दो ग्रामीण विक्रेता शाम के समय अपने खेत की सब्जियां बेचते हैं, बिना किसी यातायात बाधा के।
ये विक्रेता गरीब ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं और अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह सब्जी बिक्री पर निर्भर हैं। इनके दुकान स्थानों पर कोई हादसा होने का खतरा नहीं है, फिर भी नगरपालिका ने इन्हें नोटिस जारी कर परेशान किया है।
*मेन रोड पर अवैध अतिक्रमण की अनदेखी:*
विपरीत स्थिति में, वार्ड क्रमांक 08 के मुख्य बाजार में, जहां इन विक्रेताओं को दुकानें लगाने को कहा गया है, बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण ने सड़क को पूरी तरह जाम कर रखा है। पहले इस रोड से 10 चक्का वाहन आसानी से गुजरते थे, लेकिन अब छोटी चार पहिया गाड़ियों को भी निकलने में मुश्किल होती है। दोपहिया वाहनों को तो सामने से आने वाली गाड़ियों के लिए रुकना पड़ता है। हाल ही में इसी अतिक्रमण के कारण एक बड़ा जामुन का पेड़ गिरने से राहुल नामक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज हैदराबाद में चल रहा है। इसके बावजूद, नगरपालिका ने इन बड़े अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
*पक्षपात और निजी लाभ के आरोप:*
स्थानीय लोगों और प्रभावित विक्रेताओं का आरोप है कि नगरपालिका का यह दोहरा रवैया प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों के साथ उनकी साठगांठ को दर्शाता है। मेन रोड पर अतिक्रमण करने वालों को बार-बार नोटिस देने के बावजूद कोई कार्रवाई न होना और गरीब ग्रामीण विक्रेताओं को निशाना बनाना यह सवाल उठाता है कि क्या नगरपालिका अधिकारी और जनप्रतिनिधि निजी लाभ के लिए बड़े अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दे रहे हैं? यह स्थिति न केवल गरीब ग्रामीणों के साथ अन्याय है, बल्कि मेन रोड पर बढ़ते अतिक्रमण से बड़े हादसों को भी न्योता दे रही है।
*प्रशासन की चुप्पी और जनता का आक्रोश:*
नगरपालिका के मुख्य अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इस मामले को और गंभीर बनाती है। मेन रोड पर अतिक्रमण के कारण होने वाली परेशानियों और हादसों के जोखिम को नजरअंदाज कर गरीब विक्रेताओं को निशाना बनाना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि प्रशासन की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सड़क सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर गंभीर है, तो पहले मेन रोड के बड़े अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
निष्कर्ष और मांग:
*किरंदुल नगरपालिका का यह कदम गरीब ग्रामीणों के प्रति असंवेदनशीलता और बड़े अतिक्रमणकारियों के प्रति नरम रवैये को उजागर करता है।*
जनता मांग कर रही है कि:
गरीब ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं के खिलाफ नोटिस वापस लिया जाए।
मेन रोड पर अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।
नगरपालिका अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि निजी लाभ के लिए पक्षपात के आरोपों की जांच हो।
यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है इस बीच, यह सवाल बना हुआ है कि क्या किरंदुल नगरपालिका वास्तव में जनहित में काम कर रही है या कुछ प्रभावशाली लोगों के हितों की रक्षा में लगी है?

