*दंतेवाड़ा के रेवाली मिडिल स्कूल में शिक्षा का संकट: शनिवार-रविवार की छुट्टियां और प्रिंसिपल की अनुपस्थिति*

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*दंतेवाड़ा के रेवाली मिडिल स्कूल में शिक्षा का संकट: शनिवार-रविवार की छुट्टियां और प्रिंसिपल की अनुपस्थिति*

दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा जिले के कुंवाकोंडा विकासखंड की ग्राम पंचायत रेवाली पटेल पारा के मिडिल स्कूल में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय समुदाय और स्कूल के बच्चों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मिडिल स्कूल में शिक्षकों ने प्रत्येक शनिवार और रविवार को छुट्टी का नियम बना रखा है। रविवार का सरकारी अवकाश स्वाभाविक है, लेकिन शनिवार की छुट्टी और प्रिंसिपल टीकम साहू की महीने में महज एक या दो बार स्कूल में उपस्थिति शिक्षा के स्तर को लेकर चिंता का विषय बन रही है।

*शनिवार-रविवार की छुट्टियां: एक अनौपचारिक नियम*

रेवाली संकुल केंद्र के मिडिल स्कूल के सरपंच राकेश कुमार ताती ने बताया कि स्कूल में प्रत्येक शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। उन्होंने कहा, “रविवार की छुट्टी तो समझ में आती है, लेकिन शनिवार को स्कूल बंद रखना समझ से परे है।” स्कूल के चपरासी मंगल सिंह ताती ने भी इस बात की पुष्टि की कि प्राइमरी स्कूल के शिक्षक शनिवार को स्कूल आते हैं, लेकिन मिडिल स्कूल के शिक्षक दोनों दिन अनुपस्थित रहते हैं। बच्चों ने भी इस बात की तस्दीक की कि शनिवार को स्कूल बंद रहता है और शिक्षक नहीं आते।

*प्रिंसिपल की अनुपस्थिति: महीने में एक-दो बार उपस्थिति*

मामला केवल शनिवार-रविवार की छुट्टियों तक सीमित नहीं है। स्कूल के प्रिंसिपल टीकम साहू की अनुपस्थिति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सरपंच राकेश कुमार ताती ने बताया कि उन्हें यह भी नहीं पता कि मिडिल स्कूल का प्रिंसिपल कौन है, क्योंकि टीकम साहू महीने में केवल एक या दो बार स्कूल आते हैं। प्राइमरी स्कूल के शिक्षक विसंभर राम बटेरया, जिनकी नियुक्ति 16 जून 2025 को हुई, ने भी इस बात की पुष्टि की।

 उन्होंने कहा, “मैं और हेडमास्टर सुक्का राम कुंजाम नियमित रूप से स्कूल आते हैं, लेकिन मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल टीकम साहू महीने में एक-दो बार ही स्कूल में दिखाई देते हैं।”

*संकुल समन्वयक की नियुक्ति पर सवाल*

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रमोद भदौरिया ने इस मामले पर प्रकाश डालते हुए बताया कि टीकम साहू न केवल रेवाली मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल हैं, बल्कि हीरोली संकुल केंद्र के संकुल समन्वयक भी हैं। उन्होंने इस नियुक्ति पर आश्चर्य जताते हुए कहा, “नियमों के अनुसार, संकुल समन्वयक की नियुक्ति उसी संकुल केंद्र के शिक्षकों में से की जानी चाहिए। यह समझ से परे है कि टीकम साहू को 40 किलोमीटर दूर हीरोली संकुल केंद्र का समन्वयक क्यों नियुक्त किया गया।” बीईओ और सहायक बीईओ (एबीईओ) ने इस मामले की जांच के लिए रेवाली संकुल केंद्र का दौरा करने का निर्णय लिया है।

*शिक्षा पर प्रभाव: बच्चों का भविष्य खतरे में*

रेवाली जैसे नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। मिडिल स्कूल में शिक्षकों की अनुपस्थिति और शनिवार की अनौपचारिक छुट्टियां बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। नियमों के अनुसार, प्रिंसिपल को सप्ताह में कम से कम तीन कक्षाएं लेना अनिवार्य है, लेकिन टीकम साहू की अनुपस्थिति के कारण यह नियम भी लागू नहीं हो पा रहा है। बच्चों ने बताया कि शिक्षकों के न आने से उनकी पढ़ाई अधूरी रह जाती है, जिसका सीधा असर उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ रहा है।

*स्थानीय समुदाय की चिंता*

रेवाली के ग्रामीण और सरपंच इस स्थिति से बेहद नाराज हैं। सरपंच राकेश कुमार ताती ने कहा, “हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर है। अगर शिक्षक और प्रिंसिपल स्कूल नहीं आएंगे, तो बच्चे क्या सीखेंगे? सरकार को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के बावजूद, मिडिल स्कूल की स्थिति चिंताजनक है, जिससे क्षेत्र में शिक्षा का स्तर प्रभावित हो रहा है।

*प्रशासनिक लापरवाही या व्यवस्थागत खामी?*

इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आ रही है। बीईओ प्रमोद भदौरिया ने स्वीकार किया कि टीकम साहू की नियुक्ति और उनकी अनुपस्थिति की शिकायतें गंभीर हैं। उन्होंने कहा, “हम इस मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि ऐसी स्थिति पहले क्यों नहीं पकड़ी गई और प्रिंसिपल की अनुपस्थिति को लेकर कोई निगरानी क्यों नहीं की गई।

*आगे की राह*

दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्र, जहां शिक्षा बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की एकमात्र उम्मीद है, वहां इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, प्रभावी निगरानी तंत्र, और स्थानीय समुदाय की भागीदारी जरूरी है। रेवाली मिडिल स्कूल का यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

*निष्कर्ष:* रेवाली मिडिल स्कूल में शनिवार-रविवार की अनौपचारिक छुट्टियां और प्रिंसिपल टीकम साहू की अनुपस्थिति शिक्षा व्यवस्था की एक गंभीर खामी को उजागर करती है। बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए प्रशासन को त्वरित और कठोर कदम उठाने होंगे। इस मामले में जांच और कार्रवाई की प्रगति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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